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Written By: Anshumala | Published : March 26, 2019 9:51 AM IST
दिल का दौरा पड़ने पर रोगियों को इलाज के “सुनहरे घंटे“ को मिस नहीं करना चाहिए। © Shutterstock
आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों को खराब जीवनशैली से लेकर जीन-संरचना तक अनेक कारकों के चलते, अन्य जातीय समूहों की तुलना में लगभग 8 से 10 साल पहले ही दिल के दौरे का शिकार होना पड़ जाता है। स्थिति तब और बिगड़ जाती है, जब दिल के दौरे के शिकार लोगों में से कई को 3 घंटे या उससे भी अधिक समय के बाद अस्पताल पहुंचाया जाता है, जिससे उनके सामान्य स्वास्थ्य को लौटाने में मुश्किल होती है। वे उपचार के गोल्डन आवर या सुनहरे घंटे को खो चुके होते हैं जो दिल का दौरा पड़ने के बाद पहला एक घंटा होता है, जो जटिलताओं और फलस्वरूप मृत्यु की आशंका को कम करने में महत्वपूर्ण होता है।
कई लोग समय रहते लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते हैं या उचित कदम नहीं उठा पाते हैं। दिल के दौरे के रोगियों को समय रहते और जीवन रक्षक देखभाल के मद्देनजर गोल्डन आवर बेहद महत्वपूर्ण है। यह आवश्यक है कि कमर के लेवल से ऊपर सीने में कैसा भी दर्द हो तो ईसीजी करना जरूरी है और बिना देरी किए एक चिकित्सक से सलाह लिया जाना चाहिए।
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इस बारे में बात करते हुए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत (नई दिल्ली) के सीनियर डायरेक्टर एंड यूनिट हेड, कार्डियोलॉजी डॉ. राजीव अग्रवाल ने कहा, “दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में समय का बड़ा महत्व है। बहुत से लोग सीने में दर्द को नजरअंदाज करते हैं। इसे एसिडिटी या अपच से जोड़ कर देखते हैं। हालांकि, छाती में होने वाले कैसे भी तीव्र दर्द की हालत में तुरंत एक विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। उन्हें खासतौर से जिन्हें जेनेटिक या अनुवांशिक वजह से हृदय की समस्याएं हैं। इसमें हृदय की मांसपेशियों की क्षति को रोकने के लिए, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और रक्त परीक्षण शामिल है। शुरुआत में, सटीक तरीके से हृदय रोग की पुष्टि की जानी जानी चाहिए।
पसीने के साथ सीने में गंभीर दर्द, सांस लेने में कठिनाई, ब्लैकआउट, डूबने का अहसास, ठंडा पड़ना, अत्यधिक थकान, मधुमेह रोगियों में खासकर, सीने में दर्द जो दोनों हाथों, जबड़े और पीठ की ओर फैलता प्रतीत हो तथा पेट की परेशानी, उल्टी या मतली आना आदि। महिलाओं को सांस लेने में कठिनाई, मतली, उल्टी और पीठ में दर्द जो जबड़े तक फैलता है आदि का अनुभव हो सकता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा, “दर्द की तीव्रता निर्णायक फैक्टर नहीं होनी चाहिए। दिल के कुछ दौरे पूरी तरह से दर्द रहित हो सकते हैं और सीने में अचानक जलन, सांस फूलना, चक्कर आना, बेचैनी, उल्टी या पसीना जैसे लक्षणों के रूप में प्रकट हो सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे अस्पष्ट लक्षणों का अनुभव करता है जो दिल का दौरा पड़ने के कारण हो सकता है, तो “गोल्डन रूल“ यह है कि उन्हें ''गोल्डन आवर'' के भीतर कैथ लैब वाले किसी अस्पताल में ले जाना चाहिए। यदि प्राथमिक एंजियोप्लास्टी तुरंत की जाती है तो हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है, जो कि सबसे प्रभावी उपचार है।”
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- अकारण हार्टबर्न, असामान्य जगहों पर दर्द, लगातार उल्टी आदि लक्षणों को अनदेखा न करें, क्योंकि यह दिल का दौरा हो सकता है।
- यदि पहला ईसीजी और रक्त परीक्षण सामान्य है, तो डॉक्टर अक्सर रोगी को 1 से 3 घंटे के बाद फिर से परीक्षण करने के लिए कहते हैं। ऐसा करने में विफलता आपको जोखिम में डाल सकती है।
- दिल का दौरा पड़ने से पहले ही आप हार्ट अटैक के संदेह में घर पर एस्पिरिन की गोली ले सकते हैं। इससे कई लोगों की जान बच जाती है।
- रोकथाम इलाज से बेहतर होती है। स्वस्थ आहार और व्यायाम के साथ स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं।
- धूम्रपान और तम्बाकू को ना कहें। आहार और व्यायाम द्वारा शरीर के वजन को नियंत्रित करें।
- निवारक जांच के लिए डॉक्टर से मिलें। अपने बीपी, ब्लड शुगर आदि की जांच करवाएं और उन्हें नियंत्रित रखें। अगर डॉक्टर सलाह दे तो कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं लें।
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