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Toxic Ex Ko Kaise Bhule: अक्सर हम देखते या सुनते हैं कि कोई व्यक्ति अपने पुराने पार्टनर से बहुत दुखी रहा, उसे बहुत अधिक मानसिक तनाव मिला, आत्मसम्मान को ठेस पहुंची, फिर भी कुछ समय बाद वह उसी व्यक्ति के पास वापस चला जाता है या जाने की कोशिश करता रहता है। यह स्थिति बाहर से देखने पर समझ में नहीं आती। लोग पूछते हैं- ‘जब इतना दुख मिला, तो वापस क्यों गए?’ लेकिन सच्चाई यह है कि टॉक्सिक रिश्ते से बाहर निकलना केवल फैलता लेने तक ही सीमित नहीं होता है।
इसके पीछे गहरे भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे होते हैं, जिन्हें जानने के लिए हमने साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा से बात की। वह कहती हैं कि ‘टॉक्सिक रिश्ते अक्सर भावनात्मक जाल की तरह होते हैं। व्यक्ति को धीरे-धीरे इस तरह बांध लेते हैं कि वह चाहकर भी खुद को पूरी तरह अलग नहीं कर पाता।’ आइए आपको साइकोलॉजिस्ट द्वारा बताए उन कारणों के बारे में बताते हैं, जिनकी वजह से हमारा अपने टॉक्सिक पार्टनर के पास बार-बार वापस जाने का मन करता है।
डॉक्टर कहती हैं कि कोई भी रिश्ता केवल बुरे अनुभवों से नहीं बना होता। उसमें कुछ खूबसूरत पल, साथ बिताया हुआ समय और उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। जब रिश्ता टूटता है, तो व्यक्ति अक्सर उन्हीं अच्छे पलों को याद करता है। उसे लगता है कि शायद साथी बदल जाएगा या इस बार सब ठीक हो जाएगा। यही उम्मीद उसे फिर से उसी रिश्ते की ओर खींच लेती है।
कई लोगों के लिए अकेलापन बहुत भारी होता है। भले ही रिश्ता दुख देता हो, लेकिन किसी का साथ होने का एहसास उन्हें सुरक्षा देता है। डॉक्टर मालिनी सबा के अनुसार, कुछ लोग गलत रिश्ते में सिर्फ इसलिए बने रहते हैं क्योंकि उन्हें अकेले रहने से डर लगता है। उन्हें लगता है कि ‘कम से कम कोई तो है।’
अगर किसी व्यक्ति का आत्मसम्मान कमजोर हो, तो वह खुद को बेहतर व्यवहार के योग्य नहीं मान पाता। टॉक्सिक पार्टनरअक्सर सामने वाले व्यक्ति को हमेशा यह महसूस कराते हैं कि वह उनके बिना कुछ नहीं है। बार-बार ऐसा सुनने से व्यक्ति इस बात पर विश्वास करने लगता है और उसी रिश्ते में लौट जाता है।
टॉक्सिक रिश्तों में अक्सर एक पैटर्न देखने को मिलता है, जिसमें पहले झगड़ा या चोट पहुंचाना, फिर माफी और बदलने का वादा, और फिर वही व्यवहार दोहराना होता है। यह एक भावनात्मक चक्र बन जाता है। व्यक्ति सोचता है कि इस बार बदलाव स्थायी होगा, लेकिन कुछ समय बाद सब पहले जैसा हो जाता है। यह उम्मीद और निराशा का सिलसिला उसे बार-बार वापस ले आता है।
कई बार व्यक्ति रिश्ते के खत्म होने को स्वीकार नहीं कर पाता। उसे लगता है कि कहानी अधूरी रह गई। वह यह साबित करना चाहता है कि रिश्ता सफल हो सकता है। इसी कोशिश में वह फिर उसी व्यक्ति के पास चला जाता है।
जब कोई व्यक्ति अपनी खुशी, आत्मविश्वास और पहचान पूरी तरह दूसरे पर निर्भर कर देता है, तो अलग होना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में टॉक्सिक रिश्ता भी जरूरत जैसा महसूस होने लगता है।
टॉक्सिक एक्स के पास बार-बार लौटना कमजोरी नहीं, बल्कि भावनात्मक उलझन का परिणाम है। डॉक्टर मालिनी सबा मानती हैं कि जब व्यक्ति खुद को महत्व देना और स्वस्थ सीमाएं तय करना सीख लेता है, तभी वह ऐसे रिश्तों से पूरी तरह मुक्त हो पाता है। प्यार वह होना चाहिए जो सुकून दे, आत्मसम्मान बढ़ाए और सुरक्षा का एहसास कराए। अगर कोई रिश्ता बार-बार आपको तोड़ रहा है, तो जरूरी है कि आप खुद को चुनें - क्योंकि आपका मानसिक स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।