परीक्षा के समय माता-पिता क्या करें? जानें बच्चों का मनोबल बढ़ाने वाली 6 जबरदस्त टिप्स

How To Boost The Morale of Children: परीक्षा से पहले हर बच्चे के मन में डर कहता है कि कहीं वह फेल न हो जाए या उसके मार्क्स कम न आ जाएं। अगर आप अपने बच्चे के मनोबल को बढ़ाना चाहते हैं तो साइकोलॉजिस्ट की बताई इन असरदार बातों को जरूर मानें।

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Written By: Vidya Sharma | Published : February 23, 2026 10:19 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

Bachho Ke Board Exam: परीक्षा का समय केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए तनावपूर्ण हो सकता है। अंक, भविष्य और प्रतिस्पर्धा की चिंता बच्चों के मन पर दबाव डालती है। ऐसे समय में माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि परीक्षा के दौरान बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। अगर घर का वातावरण शांत और सहयोगपूर्ण हो, तो बच्चा बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

लेकिन कुछ माता-पिता अपने बच्चों के कंधों पर अच्छे नंबर लाने का बोझ सा रख देते हैं, जिसकी वजह से बच्चे खुद को कमजोर और प्रेशराइज फील करते हैं। वहीं कुछ पेरेंट्स ऐसे भी होते हैं जो बच्चे की टेंशन कम करना चाहते हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि आखिर वह अपने बच्चे को कैसे मोटिवेट कर सकते हैं? वह कैसे उनका मनोबल बढ़ा सकते हैं आदि-आदि। आइए समझते हैं कि माता-पिता को क्या करना चाहिए।

दबाव नहीं, समर्थन दें

अक्सर माता-पिता अनजाने में बार-बार यह कह देते हैं - ‘अच्छे नंबर लाना’, ‘फेल मत होना’, ‘शर्मिंदा मत करना’ आदि-आदि। ऐसी बातें बच्चों के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती हैं। डॉ. मालिनी सबा के अनुसार, बच्चों को यह महसूस कराना जरूरी है कि उनका महत्व केवल अंकों से नहीं है। जब बच्चा जानता है कि परिवार उसका साथ देगा, तो उसका तनाव कम होता है।

तुलना करने से बचें

‘देखो, पड़ोस का बच्चा कितना पढ़ता है’ कई माता-पिता इस तरह की तुलना बच्चे के मन में हीन भावना पैदा कर सकती है। हर बच्चे की क्षमता और सीखने की गति अलग होती है। तुलना करने के बजाय उसकी प्रगति पर ध्यान देना अधिक प्रभावी होता है।

पढ़ाई का संतुलित समय तय करें

लगातार कई घंटों तक पढ़ना थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकता है। माता-पिता को बच्चों को छोटे-छोटे ब्रेक लेने, हल्की शारीरिक गतिविधि करने और पर्याप्त नींद लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए। पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या से एकाग्रता बेहतर होती है। इससे आपको सभी चीजें अच्छे से याद होंगी और एग्जाम भी अच्छे जाएंगे। इसलिए आप अपने स्टडी टाइम को मैनेज करें

सकारात्मक भाषा का प्रयोग करें

बच्चों से कहें- ‘तुमने मेहनत की है, हमें तुम पर भरोसा है।’, ‘गलतियां सीखने का हिस्सा हैं।’ डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि सकारात्मक शब्द बच्चों के अंदर आत्मविश्वास भरते हैं। जब बच्चा खुद पर विश्वास करता है, तो उसका प्रदर्शन स्वाभाविक रूप से बेहतर होता है। इसलिए अपने बच्चे को मोटिवेट करें

स्वस्थ वातावरण बनाएं

डॉक्टर कहती हैं कि घर का माहौल जितना शांत और व्यवस्थित होगा, बच्चे उतना ही ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। तेज आवाज, अनावश्यक मेहमान या लगातार डांट-फटकार से बचें। परीक्षा के समय परिवार का सहयोग बच्चे को सुरक्षा का एहसास देता है।

भावनाओं को समझें

अगर बच्चा घबराया हुआ या परेशान दिखे, तो उसकी बात ध्यान से सुनें। उसे यह कहने का मौका दें कि वह क्या महसूस कर रहा है। डॉक्टर मालिनी सबा के अनुसार, जब बच्चे की भावनाओं को स्वीकार किया जाता है, तो उसका डर आधा हो जाता है। यही मौका है कि आप अपने बच्चे को सुरक्षित महसूस करवा सकते हैं।

परिणाम नहीं, प्रयास पर ध्यान दें

डॉक्टर सबा कहती हैं कि ‘परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। बच्चों को सिखाएं कि सफलता और असफलता दोनों सीखने का अवसर हैं। जब ध्यान प्रयास पर होगा, तो परिणाम का दबाव कम महसूस होगा। परीक्षा के समय बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत भरोसे, समझ और सहयोग की होती है। अगर माता-पिता बच्चों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक माहौल तैयार करें, तो उनका मनोबल मजबूत रहता है। मजबूत मनोबल ही अच्छे प्रदर्शन की असली कुंजी है।

याद रखिए- अंक महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन बच्चे का आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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