
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr V. Nagarjuna Maturu
what is Sleep Divorce
एक समय था, जब पति-पत्नी का एक ही बिस्तर पर सोना मजबूत रिश्ते की निशानी मानी जाती थी। लेकिन आजकल एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में आ रहा है, जिसे स्लीप डिवोर्स कहा जाता है। नाम सुनकर भले ही यह किसी रिश्ते के टूटने जैसा आपको लगे, लेकिन वास्तव में इसका तलाक से कोई कनेक्शन नहीं है। इसमें कपल्स बेहतर नींद के लिए अलग-अलग बिस्तरों या कमरों में सोने का फैसला करते हैं।
हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट, क्लीनिकल एंड इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. वी. नागार्जुन मातुरु का कहना है कि जब पार्टनर्स की नींद एक-दूसरे की वजह से बार-बार प्रभावित होती है, तब स्लीप डिवोर्स एक व्यावहारिक समाधान बन सकता है। खर्राटे, अलग-अलग स्लीप शेड्यूल, बार-बार करवट बदलना, रेस्टलेस लेग सिंड्रोम या देर रात तक स्क्रीन इस्तेमाल करने जैसी आदतें अक्सर आपके पार्टनर के नींद में बाधा डालती हैं। ऐसे में स्लीप डिवोर्स लेना एक बेहतर समानधान माना जाता है।
What is Sleep Divorce
डॉक्टर कहते हैं कि अब काफी लोग यह समझ चुके हैं कि अच्छी नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरत है। एक सर्वे में पाया गया कि स्लीप डिवोर्स अपनाने वाले लगभग 53 प्रतिशत लोगों ने अपनी नींद की गुणवत्ता में सुधार महसूस किया। जो लोग लंबे समय तक अलग सोते रहे, उन्हें औसतन हर रात 37 मिनट अधिक नींद मिली।
एक्सपर्ट का मानना है कि नींद की कमी से चिड़चिड़ापन, तनाव और आपसी बहस बढ़ सकती है। ऐसे में अगर अलग सोने से दोनों पार्टनर्स को बेहतर आराम मिलता है, तो इसका सकारात्मक असर रिश्ते पर भी पड़ सकता है।
डॉ. मातुरु बताते हैं कि पर्याप्त नींद इमोशनल बैलेंस, मेमोरी और मूड रेगुलेशन के लिए बेहद जरूरी है। जब दोनों पार्टनर्स अच्छी नींद लेते हैं, तो दिनभर की थकान और चिड़चिड़ापन कम हो सकता है। इससे रिश्तों में बिना वजह के तनाव भी घट सकते हैं।
What is Sleep Divorce
हालांकि, एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि स्लीप डिवोर्स को रिश्तों की हर समस्या का समाधान नहीं माना जाना चाहिए। अगर कपल्स के बीच पहले से कम्युनिकेशन की कमी, इमोशनल दूरी या अन्य विवाद मौजूद हैं, तो अलग सोना इन समस्याओं को दूर नहीं कर पाएगा। यह सिर्फ नींद से जुड़ी परेशानियों का समाधान है।
कुछ रिसर्च और एक्सपर्ट्स का कहना है कि साथ सोना इमोशनल जुड़ाव को बढ़ा सकता है। वहीं, कुछ लोगों को अलग सोने से अकेलापन महसूस हो सकता है या शारीरिक नजदीकियां कम हो सकती हैं। यही वजह है कि स्लीप डिवोर्स अपनाने वाले कपल्स को सोने से पहले साथ समय बिताने, बातचीत करने और अपनी नियमित अंतरंगता बनाए रखने की सलाह दी जाती है। कई विशेषज्ञ इसे बेहतर नींद के लिए व्यवस्था मानते हैं, न कि रिश्ते में दूरी का संकेत।
अगर अलग सोने की वजह खर्राटे, स्लीप एपनिया, अनिद्रा या अन्य नींद संबंधी विकार हैं, तो स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लेना जरूरी है। वहीं यदि अलग सोने का कारण लगातार झगड़े या भावनात्मक तनाव हैं, तो रिलेशनशिप काउंसलर या थेरेपिस्ट की मदद लेना बेहतर हो सकता है।
Disclaimer : स्लीप डिवोर्स किसी रिश्ते की असफलता का संकेत नहीं है। कई कपल्स के लिए यह बेहतर नींद और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य पाने का एक तरीका हो सकता है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि दोनों पार्टनर्स इस फैसले पर खुलकर बातचीत करें, एक-दूसरे की जरूरतों को समझें और रिश्ते की भावनात्मक नजदीकियों को बनाए रखें।