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Written By: Atul Modi | Published : May 27, 2024 8:04 PM IST
रिश्तों को जब आप अपनी सोच के तराजू में तोलने लगते हैं तो उसका संतुलन बिगड़ना तय है। अगर आप पहले से ही किसे रिश्ते में हैं या फिर नया रिश्ता बनाने जा रहे हैं तो अपने जहन में बंधी शक, शंका, आशंकाओं, अपेक्षाओं, धारणाओं की गांठों को खोल दें। ऐसा करने पर ही आप अपने रिश्ते को अपना 100 परसेंट दे पाएंगे। तब ही आपका रिश्ता सही मायनों में सफल भी होगा। चलिए जानते हैं किसी भी रिश्ते को सफल बनाने के 5 सबसे सरल तरीके।
रिश्ते को सफल बनाने का पहला गुरु मंत्र है पहले से ही सामने वाले को लेकर धारणा न बनाएं। बल्कि खुलकर बात करें। जैसे- अगर कोई आपको पहले ज्यादा कॉल करता था और कुछ दिनों बाद वह दिनभर में एक ही कॉल कर पा रहा है तो आप ये न सोचें कि वह आपसे बात नहीं करना चाहता या वो आपको पसंद नहीं करता। बल्कि हो सकता है कि उसे कोई जरूरी काम हो। ऐसे में अच्छा ये है कि आप उससे साफ पूछ लें कि आज आपने मुझे कम कॉल क्यों किया। ऐसा करने से आप नकारात्मक विचारों से बचेंगे। क्योंकि ये विचार रिश्ते में खटास पैदा करते हैं।
जिस भी रिश्ते में आप अपेक्षाएं ज्यादा रख लेंगे, उसमें आप हमेशा दुखी रहेंगे। दरअसल, अपेक्षाओं का मतलब ही है दुख। आमतौर पर रिश्ते में बंधे दो लोग एक दूसरे से कई अपेक्षाएं करते हैं, लेकिन इसके बारे में आपस में बात नहीं करते। ऐसे में जब ये उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं तो आपका दिल टूट जाता है। आप रिश्ते को लेकर अलग-अलग बातें सोचने लगते हैं। ये अपेक्षाएं और उम्मीदें रिश्ते से प्यार को दूर कर देते हैं। जैसे- मेरे बर्थडे पर उसे मुझे सरप्राइज गिफ्ट देना चाहिए था या मेरे लिए पार्टी अरेंज करनी चाहिए थी या मुझे कहीं बाहर घुमाने ले जाना चाहिए आदि। जब ये अपेक्षाएं पूरी नहीं होती तो आपके रिश्ते पर इसका असर पड़ता है। चिंता की बात तो यह है कि सामने वाले को इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि आखिर उसने गलती कहां की है।
कम्यूनिकेशन यानी बातचीत दो लोगों को आपस में जोड़े रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका है। रिश्ते में बातचीत कभी बंद नहीं करनी चाहिए और यह बात पर्सनल व प्रोफेशनल दोनों ही जगह लागू होती है। आपस में बात करके आप बड़ी से बड़ी परेशानी को हल कर सकते हैं। अगर आप किसी बात पर एक-दूसरे से सहमत नहीं भी हैं तो भी खुलकर एक दूसरे को बताएं। संवाद खत्म होने का सीधा मतलब है संबंध खत्म होना।
रिश्ता हमेशा प्यार की डोरी से बंधा हुआ होना चाहिए, इसमें स्वार्थ की कहीं जगह नहीं होनी चाहिए। जब आप स्वार्थ के चलते कोई रिश्ता बनाते हैं तो उसका दुखद अंत होना निश्चित है। क्योंकि ऐसे रिश्तों को आप अपना पूरा समर्पण दे ही नहीं सकते। प्यार का मतलब ही है कि अपने से पहले दूसरे की सोचना। अगर आपके रिश्ते में यह बॉन्ड नहीं है तो मान लीजिए यह रिश्ता बहुत लंबा सफर तय नहीं कर सकेगा। यह बात हर रिश्ते पर लागू होती है।
आमतौर पर आने देखा होगा कि ऑफिस से जैसे ही पार्टनर घर आता है सामने वाला शख्स उसका मूड देखे बिना अपने दिनभर की शिकायतों का पिटारा उसके सामने खोलने लगता है। वह यह जानने की कोशिश ही नहीं करता कि दिनभर में उसके पार्टनर के साथ क्या हुआ, वह किन परिस्थितियों में रहा, उसका ऑफिस का समय कैसे बीता, उसका काम खत्म हो पाया या नहीं। लेकिन ऐसा करना गलत है। आपको हमेशा सामने वाले के मूड को देखकर बात करनी चाहिए। साथ ही पार्टनर्स को आपस में एक दूसरे को स्पेस भी देनी चाहिए। अधिकांश कपल्स रिश्ते में यह बड़ी गलती कर बैठते हैं।
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