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भागवत गीता के ये 5 श्लोक देते हैं रिश्तों को सही तरीके से निभाने की समझ, अपनाएंगे तो खुशहाल बना रहेगा रिश्ता

Bhagwat Geeta Or Rishte: अगर आप रिश्तों की सही पहचान करना चाहते हैं या उन्हें सही तरीके से निभाने में असक्षम हो रहे हैं तो भागवत गीता के इन 5 श्लोक और उनके सार को याद रखें।

भागवत गीता के ये 5 श्लोक देते हैं रिश्तों को सही तरीके से निभाने की समझ, अपनाएंगे तो खुशहाल बना रहेगा रिश्ता

Written by Vidya Sharma |Updated : March 16, 2026 4:17 PM IST

Bhagwat Geeta Mai Rishto Ke Bare Mai Kya Kaha Gaya Hai: भागवत गीता हमें जिंदगी का सार सिखाती है। अगर कोई इसे सही से सार्थक रूप से पढ़ ले तो यह तय है कि वह मोह-माया से मुक्त हो जाएगा। महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखी भागवत गीता में हर विषय के बारे में लिखा गया है, जिसमें से एक है रिश्ते। यह रिश्ता दोस्ती का भी हो सकता है, माता-पिता और बच्चे का भी हो सकता है, गुरु और शिष्य का भी, मित्र व शत्रू के साथ-साथ खुद से भी।

लेकिन हम में से कुछ लोग रिश्तों को न सही से समझ पाते हैं और न ही निभा पाते हैं। ऐसे में भागवत गीता में लिखें 5 श्लोक हमें रिश्तों को समझने की समझ देते हैं और उन्हें बचाने में मदद करते हैं। आइए आपको उन 5 श्लोकों के बारे में बताते हैं जिनका सार रिश्तों को बचाने के लिए हर किसी को अपने जीवन में जरूर उतारना चाहिए।

पहला श्लोक सिखाता है- परिणाम की न सोचना

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श्रीमद्भगवद्गीता की अध्याय 2 के श्लोक 47 में लिखा गया है कि 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥' जिसका अर्थ है कि आप बस अपना कर्म करो, फल की चिंता न करो। इसे रिश्तों में उतारें तो हमें अपना कर्म करना चाहिए, बिना सामने वाले से इस अपेक्षा के कि हमने इतना किया है तो वह भी करेगा।

दूसरा श्लोक बताता है- खुद पर नियंत्रण रखना

'दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते' यह श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 2 का श्लोक 56 है। इसका हिंदी में अर्थ है दुख में विचलित न होने वाला, सुख में इच्छा न रखने वाला, तथा राग, भय और क्रोध से मुक्त व्यक्ति ही वास्तव में स्थिर बुद्धि वाला मुनि कहलाता है। अगर हम इसे जीवन व रिश्तों में उतारें तो हमें हमेशा अपने मन को स्थिर रखना चाहिए, दूसरों के बिहेवियर से अपनी शांति नहीं खराब करनी चाहिए। वरना अधिकतर अस्थिर मन रिश्तों में द्वेष, भय व क्रोध पैदा करता है।

तीसरा श्लोक सिखाता है- अहंकार का त्याग

हमारे कई रिश्ते इसलिए भी टूट जाते हैं क्योंकि कोई एक व्यक्ति मैं के पीछे भाग रहा होता है और अपने अहंकार को आगे रखता है। इसी गलती को सुधारने के लिए भागवत गीता के दूसरे अध्याय के 71वें श्लोक   कहता है कि 'विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति'। इसका सीधा-सीधा सार है कि जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं, मेरा व मैं, ममता, व लालच से मुक्त होकर जीवन जीता है, वह मोक्ष को प्राप्त होता है। लेकिन कुछ लोग अपने अहंकार के चलते रिश्तों को गवा देते हैं और उन्हें खराब कर देते हैं। इसलिए आप अपने रिश्तों को स्वयं से ज्यादा अहमियत दें।

चौथा श्लोक सिखाता है- माफ करना

श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें अध्याय का 13वां श्लोक है- 'अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च निर्ममो निरहंकार समदुःखसुखः क्षमी' जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति सभी जीवों के प्रति नफरत नहीं रखता है, जिसका स्वभाव मित्रता वाला है और वह दयालु है, उसमें मैं व मेरा जैसे भाव नहीं हैं, जो अहंकार से मुक्त है, सुख व दुख दोनों को बराबर समझता है और सबको माफ कर देता है। सभी के अंदर ऐसा भाव आना चाहिए। जो व्यक्ति रिश्तों में होने वाली गलतियों को माफ कर देता है उसके रिश्ते अधिक मजबूत होते हैं।

पांचवा श्लोक सिखाता है- जुड़ाव न रखना

आजकल हर रिश्ते में अटैचमेंट है, सामने वाले को कंट्रोल करने की इच्छाएं हैं। इसी को लेकर भागवत गीते के छठे अध्याय के 9वें श्लोक में कहा गया है कि 'सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु। साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते॥' व्यक्ति को हमेशा ऐसा होना चाहिए जो बिना किसी स्वार्थ के अपने मित्रों, शत्रुओं, तटस्थ, ईर्ष्यालु, बन्धुओं, साधुओं और पापियों के प्रति समान रहता है, वही श्रेष्ठ योगी है और जीवन में सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त करता है।' किसी से भी रखी गई उम्मीद या जुड़ाव हमें अधिक दुख पहुंचाती है।

Highlights

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  • किसी भी रिश्ते को चलाने के लिए हमारा खुद को सामने वाले के स्थान पर रखकर सोचना चाहिए।
  • अपने रिश्ते को सही से निभाने के लिए कभी भी अहंकार नहीं लाना चाहिए।
  • बातें कहकर सुलझती हैं, इसलिए उन्हें बीच छोड़ने की बजाय खुलकर बात करें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।