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समझ नहीं आ रहा लाइफ को ट्रैक पर कैसे लाएं? फिल्म डियर जिंदगी के ये 3 लाइफ लेसन दिखाएंगे डायरेक्शन

Dear Zindagi From Dear Zindagi: कुछ फिल्में हमें जिंदगी के बारे में और लाइफ को जीने के नए तरीके तरीके सिखा जाती है। आइए जानते हैं फिल्म डियर जिंदगी हमें क्या सिखाती है?

समझ नहीं आ रहा लाइफ को ट्रैक पर कैसे लाएं? फिल्म डियर जिंदगी के ये 3 लाइफ लेसन दिखाएंगे डायरेक्शन
डियर जिंदगी मूवी

Written by Vidya Sharma |Updated : April 8, 2026 4:16 PM IST

Dear Zindagi Film Se Konse Lesson Milte Hain: बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में बनी हैं जिनमें से कुछ तो लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आई होंगी, कुछ बहुत पसंद आई होंगी और कुछ ऐसी हैं जो रीलीज डेट के बाद से आज तक, धीरे-धीरे अपने महत्व और स्टोरी को लोगों के बीच बसाए हुए है और कई लोग उन्हें एक थेरेपी की तरह देख रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं शाहरुख खान और आलिया भट्ट की फिल्म डियर जिंदगी की। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे देखने वाले व्यक्ति के जीवन में थोड़ा ही सही पर बदलाव जरूर आया है।

आज हम आपको इस लेख में फिल्म में दर्शाए गए ऐसे सीन और डायलॉग के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें अगर आपने सही तरीके से समझ लिया तो लाइफ की गाड़ी सही ट्रैक पर आ जाएगी और जिंदगी को अलग ढंग से जीने का तरीका सिखा जाएगी। आइए हम इन 5 लाइफ लेसन के बारे में बताते हैं।

हर बार मुश्किल रास्ता चुनना जरूरी नहीं

फिल्म डियर जिंदगी में शारुखान डॉक्टर जहांगीर खान के रोल में आलिया भट्ट उर्फ कायरा को एक कहानी सुनाते हैं, जिसमें आखिर में वह आलिया के पात्र से कहते हैं कि 'कभी-कभी हम मुश्किल रास्ता सिर्फ इसलिए चुनते हैं क्योंकि हमें लगता है इम्पोर्टेंट चीजें पाने के लिए मुश्किल रास्ता अपनाना चाहिए। अपने आप को पनिश करना बहुत जरूरी समझते हैं, लेकिन क्यों? आसान रास्ता क्यों नहीं चुन सकते? क्या बुराई है उसमें। खासकर के जब उस मुश्किल को सामना  करने के लिए हम तैयार ही नहीं हैं।'

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एक से ज्यादा पार्टनर होना गलत नहीं

फिल्म के दौरान आलिया भट्ट लगभग 3 लड़कों से बात करती है, लेकिन उसे किसी के साथ भी वैसी फीलिंग नहीं आती जैसी वह चाहती है। जब उसे डॉक्टर खान (शाहरुख खान) एक कुर्सी वाला एग्जांपल  देते हैं। वह आलिया से पूछते हैं कि 'क्या तुम कभी कुर्सी लेने गई हो? क्या एक ही बार में कुर्सी पसंद कर ली है? तो आलिया जवाब देती है कि नहीं, कई सारी देखने के बाद एक मिलता है, जो कंफर्टेबल होती है।' 

जब डॉक्टर खान बताते हैं कि 'जब एक कुर्सी लेने से पहले हम इतना सोचते हैं, इतनी कुर्सियां ट्राई करते हैं तो लाइफ पार्टनर चुनने से पहले क्यों नहीं?' इसलिए हम कितने लोगों को डेट कर रहे हैं या किन से बात कर रहे हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि एक अच्छे इंसान की तलाशकरने के लिए हमें कई खराब लोगों से भी मिलना पड़ता है। यही बात नौकरी या लाइफ के अन्य पड़ावों पर भी लागू होती है।

सेल्फ रिस्पेक्ट सबसे पहले है

कायरा को बहुत बुरा लगा कि रघुवेंद्र ने पहले उसे प्रपोजल दिया और जब उसने रघु को जाने के लिए कहा तो उसने किसी और से सगाई कर ली। यह वह समय था जब आलिया को भी रघु के लिए फीलिंग्स थी, लेकिन इस धोखे के बाद वह बहुत ही ज्यादा कंफ्यूज थी कि क्या उसे अपनी पहली फिल्म जो कि वह रघू के साथ यूएस में करने वाली थी, वह करनी चाहिए या नहीं। 

लेकिन आखिर में वह अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट चुनती है और यूएस वाले ऑफर को ठुकरा कर गोआ में रहती है और अपनी ड्रीम शॉर्ट फिल्म कंप्लीट करती है। कभी-कभी कुछ खो देना हमारी लाइफ में आने वाले बड़े बदलाव का एक नया पड़ाव भी होता है। इसलिए अपनी कदर करें और सेल्फ रिस्पेक्ट को चुनें

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।