
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : January 5, 2026 10:05 AM IST
Kya Haq Jamana Pyar Ki Nishani Hai: हर रिश्ते में प्यार की परिभाषा अलग-अलग होती है। कुछ पार्टनर एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करते हैं, लेकिन फिर भी एक दूसरे का फोन चेक करते हैं। वहीं कुछ एक-दूसरे को पूरा स्पेस देते हैं अपने सपनों को पूरा करने के लिए। ऐसे में कई कपल ऐसे भी हो सकते हैं जो अपने पार्टनर पर पूरा हक जमाना पसंद करते हों। अक्सर लोग सोचते हैं कि किसी पर अपना हक जमाना प्यार की निशानी है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम सामने वाले से प्यार करते हैं, और ये मानने लगते हैं कि हमें उसका अच्छा-बुरा और सही गलत सब पता है। ऐसे में हम उन्हें हर विषय पर राय देने लगते हैं और धीरे-धीरे यह राय ऑर्डर में बदल जाती है। लेकिन क्या यह सच में प्यार है? क्या सच में किसी पर हक जमाना हमारा उनके प्रति प्यार को दिखाता है? आइए हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि जब हम किसी से प्यार करते हैं तो हमारा हक होता है कि हम अपने पार्टनर को सही गलत समझाएं। लेकिन जब यह हक जमाने की आदत ज्यादा बढ़ जाती है तो एक व्यक्ति सामने वाले को अपनी प्रॉपर्टी समझने लगता है और उम्मीद रखता है कि जो वह बोलेगा/बोलेगी, वही होगा। आइए आपको बताते हैं कि प्यार क्या होता है, और अगर इसमें ज्यादा हक जमाना जाए तो क्या हो सकता है।
प्यार एक सेफ फीलिंग है, जो हमें किसी व्यक्ति के साथ या उससे बात करके अनुभव होती है। इसमें दो लोगों की बीच एक-दूजे के लिए रिस्पेक्ट होती है, केयर होती है और सिम्पेथी की जगह एम्पैथी होती है। न की किसी को बांध कर रखने की जिद फिक्र की जाल में कैद करना। लेकिन अगर कोई रिश्ते में हक जमाने लगे तो फिर क्या होता है? क्या यह प्यार की कैटेगरी में आएगा? आइए जानते हैं।
अगर आपका पार्टनर सही चीजों के लिए, जैसे आपकी पढ़ाई, फ्यूचर, आम जरूरतों के लिए हक जमा कर कुछ कह रहा है तो यह अच्छी बात है। लेकिन अगर आप हक और पजेसिवनेस में अंतर नहीं कर पा रहे हैं तो यह सही नहीं। पजेसिवनेसएक ऐसी फीलिंग होती है जिसमें हम अपने पार्टनर को अपनी प्रॉपर्टी समझने लगते हैं और उन्हें अपनी मर्जी के अनुसार चलाने की कोशिश करते हैं।
किसी की भी हक जमाने या पजेसिवनेस होने की आदत सिर्फ पार्टनर को ही हर्ट नहीं करती है, बल्कि रिश्ते को टूटने की कगार पर ले आती है। जब हम अपने पार्टनर को अपनी मर्जी के अनुसार चलाने की कोशिश करते हैं, तो शुरुआत में तो सहते हैं, लेकिन जब चीजें बढ़ जाती हैं तो वह हमें छोड़कर जाने लगते हैं। किसी के जाने के बाद हमें यह समझ आता है कि जो हमने किया वह गलत था।
इसलिए आप अपने जीवन में रिश्ते की और उस व्यक्ति की अहमियत को समझें। पार्टनर पर अधिक हक न जमाएं, या अगर जमा भी रहे हैं तो उनसे खुलकर बात करें कि आप क्या सोच रहे हैं और क्या कहना चाहते हैं। हो सकता है आपका पार्टनर आपकी परेशानी को समझे।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
अगर एक या दोनों पार्टनर असंतुष्ट हों, साथ ही संवाद की कमी हो तो इस स्थिति में कपल में दूरी आ सकती है।
एक नार्सिसिस्ट पार्टनर रिश्ते में भावनात्मक शोषण, आत्म-संदेह, और आत्मसम्मान की कमी पैदा कर सकता है, जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है।
ऐसे रिश्ते में सीमाएं तय करना, आत्मसम्मान बनाए रखना और जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल काउंसलिंग लेना जरूरी होता है।