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Ex Partner VS New Partner After Marriage: शादी से पहले कई लोगों का किसी न किसी के साथ भावनात्मक जुड़ाव रहा होता है। हर रिश्ता शादी तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं। जीवन की परिस्थितियां, परिवार, समय और प्राथमिकताएं कई बार लोगों को अलग रास्तों पर ले जाती हैं। ऐसे में जब दो ऐसे लोग शादी करते हैं जिनका अतीत में किसी अन्य व्यक्ति से कोई प्रेम संबंध रहा हो, तो कभी-कभी रिश्ते में भावनात्मक असहजता दिख सकती है। जैसे अगर हम उदाहरण के तौर पर देखें तो महिलाएं नए रिश्ते में जुड़ती हैं तो वह कुछ समय बाद पास्ट को भूल जाती हैं और अपने नए रिश्ते को पूरी तरह अपना कर नया परिवार बसाती हैं।
वहीं अगर हम पुरुषों की बात करें तो कई बार देखा जाता है कि वह अपनी एक्स की यादों से निकल नहीं पाते हैं। परिवार आगे बढ़ने पर भी पुरुष अपनी पत्नी को अपने प्रेमिका से कम्पेयर करता है। यही गलती उन्हें अपनी वर्तमान जिंदगी और खुशियों से वंचित रखती हैं। ऐसे में साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉ. मालिनी सबा कहती हैं कि ‘शादी के बाद पास्ट को देखने का नजरिया व्यक्ति के स्वभाव, भावनात्मक परिपक्वता और वर्तमान रिश्ते की गुणवत्ता पर निर्भर करता है, न कि सिर्फ इस बात पर कि वह पुरुष है या महिला।’ आइए आपको थोड़ा विस्तार से बताते हैं कि डॉक्टर क्या कहती हैं।
अक्सर देखा जाता है कि शादी के बाद कई महिलाएं अपने नए रिश्ते और परिवार को प्राथमिकता देती हैं। वे धीरे-धीरे अपने पुराने रिश्तों की भावनाओं से बाहर आकर वर्तमान को अपनाने की कोशिश करती हैं। डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि महिलाओं में भावनात्मक रूप से ‘एडजस्ट’ करने की क्षमता सामाजिक परवरिश का हिस्सा भी होती है।
बचपन से ही उन्हें रिश्तों को निभाने और परिवार को प्राथमिकता देने की सीख दी जाती है। इसलिए वे नए रिश्ते में खुद को ढालने की कोशिश ज्यादा करती हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें अतीत की यादें नहीं आतीं। फर्क सिर्फ इतना है कि वे उन यादों को अपने वर्तमान जीवन पर हावी नहीं होने देतीं।
कई बार यह देखा गया है कि कुछ पुरुष अपने पुराने प्रेम संबंधों की यादों से बाहर आने में समय लेते हैं। अगर जिस व्यक्ति से वे भावनात्मक रूप से जुड़े थे, उससे शादी नहीं हो पाई, तो उनके मन में अधूरापन रह सकता है।
डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि पुरुषों को बचपन से अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करने की उतनी ट्रेनिंग नहीं मिलती जितनी महिलाओं को। वे दर्द या निराशा को भीतर दबा लेते हैं। यही कारण है कि कई बार वे अतीत की तुलना वर्तमान से करने लगते हैं। लेकिन यह हर पुरुष पर लागू नहीं होता। यह पूरी तरह व्यक्तिगत अनुभव और भावनात्मक परिपक्वता पर निर्भर करता है।
जब कोई व्यक्ति अपनी वर्तमान जीवनसाथी की तुलना अपने पुराने साथी से करता है, तो वह अनजाने में अपने रिश्ते की नींव कमजोर करता है। तुलना से असंतोष बढ़ता है और वर्तमान की अच्छाइयां नजर नहीं आतीं। डॉक्टर मालिनी सबा के अनुसार, ‘तुलना का मतलब है कि आप अभी भी अतीत को पकड़े हुए हैं। जब तक आप अतीत को सम्मान के साथ विदा नहीं करेंगे, तब तक वर्तमान को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाएंगे।’
उर्दू शायर साहिर लुधियानवी ने एक शेर लिखा था- 'वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा।' यानी कि अतीत को भले ही मिटाया नहीं जा सकता है, लेकिन उसे सही स्थान या किसी अच्छे मोड़ पर लाकर खत्म कर देना और आगे बढ़ना जरूरी है। हर रिश्ता हमें कुछ सिखाता है, चाहे वह सफल हो या नहीं। जरूरी यह है कि व्यक्ति अपने पुराने अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़े, न कि उन्हें वर्तमान रिश्ते पर बोझ बना दे।
शादी के बाद पुराने रिश्तों को देखने का नजरिया व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग होता है। इसे केवल पुरुष या महिला के व्यवहार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। डॉ. मालिनी सबा मानती हैं कि एक सफल वैवाहिक जीवन की कुंजी है - भावनात्मक परिपक्वता, स्वीकार्यता और वर्तमान के प्रति प्रतिबद्धता।
अतीत एक अध्याय है, पूरी किताब नहीं। जो लोग इस अंतर को समझ लेते हैं, वे अपनी वर्तमान जिंदगी को ज्यादा खुशहाल और संतुलित बना पाते हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।