पति-पत्नी के रिश्तों में खटास होने का कारण कहीं पेरेंट्स की ज्यादा दखलअंदाजी तो नहीं? कैसे लगाएं पता

Shadi Me Parents Ki Dakhal Andazi | किसी भी चीज का ज्यादा होना हमेशा नुकसान पहुंचाता है, फिर चाहे यह पति-पत्नी के रिश्ते में पेरेंट्स की जरूरत से ज्यादा दखलअंदाजी ही क्यों न हो।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : January 27, 2026 1:24 PM IST

Parents Interference After Marriage in Hindi: कहा जाता है कि रिश्ते में जितना प्यार होता है, तकरार भी उतनी ही होती है। क्योंकि जितना प्यार होगा एक दूसरी की चिंता भी उतनी ही होगी, तो ऐसे में हम अपने पार्टनर को कई काम करने से रोकने-टोकने लगते हैं, जिससे कई बार तकरार भी हो जाती है। लेकिन कई बार तकरार के कारण अलग भी हो सकते हैं, जैसे कि पेरेंट्स। अब चाहे लड़के के पेरेंट्स हों या लड़की के जरूरत से ज्यादा दखलअंदाजी करना, पति-पत्नी के रिश्ते में खटास पैदा कर सकता है। हम ऐसा नहीं बोल रहे हैं कि पेरेंट्स जान-बूझकर ऐसा करते हैं, बल्कि उन्हें भी अपने बच्चों की चिंता होती है। ऐसे में कई बार तनाव पैदा हो जाता है। लेकिन ऐसा होता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपकी शादी में यह खटास इसी वजह से तो नहीं आ रही है, तो इन 4 आसान तरीकों से पता लगाएं।

बार-बार सलाह देने की आदत

अगर आप पाते हैं कि आपके पेरेंट्स हर छोटे-बड़े फैसले में बिना मांगे सलाह देने लगते हैं और उनकी राय आपकी और आपके पार्टनर की राय के ऊपर हावी हो जाती है, तो यह एक संकेत है कि आपके रिश्ते में वह दखलअंदाजी कर रहे हैं और रिश्ते में खटास पैदा हो रही है। हालांकि, पेरेंट्स की सलाह बहुत जरूरी है, लेकिन बार-बार सलाह देना तनाव पैदा करता है और उससे रिश्ते में खटास आने लगती है।

निजी मामलों में हस्तक्षेप

पति-पत्नी के बीच की छोटी-मोटी जमीनी बातें जैसे, नौकरी करना, दोस्तों से मिलना, कहीं घूमने जाना आदि आपसी बातचीत में भी माता-पिता लगातार दखल दे रहे हैं, तो यह रिश्ते में तनाव पैदा करता है, क्योंकि आपका साथी उनकी राय को मान लेता हैं और आपसे बहस करता है। पेरेंट्स कई बार चिंता में भी निजी मामलों में हस्तक्षेप करने लगते हैं और उससे दिक्कत आने लगती है।

पार्टनर की आलोचना

कई बार पेरेंट्स आपके पार्टनर की आदतों, सोच या व्यवहार पर लगातार टिप्पणी करते रहते हैं। इससे पार्टनर को अनचाहा दबाव महसूस होता है और आप दोनों के बीच दूरी बढ़ने लगती है, जिसका असर रिश्ते पर होने लगता है। आप बेशक उन बातों को न करें, लेकिन एक दिन उन बातों को सच मानने लगती हैं। लेकिन यह भी ध्यान रखें कि जरूरी नहीं है पेरेंट्स कुछ गलत ही बोल रहे हों, इसलिए हर चीज को सुनिश्चित करना चाहिए।

फैसलों पर सवाल खड़े करना

शादीशुदा जिंदगी में फैसले आप दोनों को मिलकर लेने चाहिए। लेकिन अगर पेरेट्स बार-बार आपके साथी के फैसलों पर सवाल खड़े करें तो परेशानियां बढ़ने लगती हैं। अंत में यह पति-पत्नी के आत्मविश्वास और आपसी समझ को कमजोर कर देता है। फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन कई बार पेरेंट्स चिंतित होने की वजह से उन्हें लगता है कि वे सारे फैसले गलत ले रहे हैं।

समझदारी से काम लें

रिश्तों की मिठास को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि पति-पत्नी के बीच निजी सीमाओं का सम्मान हो और पेरेंट्स की मदद मांगने पर ही प्राप्त हो। ऐसा न होना और लगातार आलोचना का समाना करना रिश्तों को खराब कर सकता है। यह भी समझना जरूरी है कि कई बार हम भी गलती कर रहे होते हैं और इस कारण से पेरेंट्स को बार-बार टोकना पड़ता है। हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आपकी गलती नहीं है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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