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Written By: Anshumala | Updated : August 6, 2019 5:02 PM IST
ब्राउन राइस खाने के फायदों के बारे में जानें यहां... © Shutterstock
अधिकतर लोग सफेद चावल अधिक खाना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि सफेद चावल की बजाय ब्राउन राइस अधिक फायदेमंद (Brown Rice Benefits) होता है? दरअसल, सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस या भूरा चावल अधिक पौष्टिक होता है। इसमें मैंगनीज, फॉस्फोरस, सेलेनियम, तांबा और नियासिन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जब आप सफेद चावलपकाते हैं, तो इसमें मौजूद मुख्य पोषक तत्व बाहर निकल जाते हैं, लेकिन ऐसा ब्राउन राइस के साथ नहीं होता है। ब्राउन राइस खाने के फायदों (Brown Rice Health Benefits ) के बारे में जानें यहां...
ब्राउन राइस में कैलोरी कम मात्रा में होती है। इसे खाने से आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते हैं। इसमें फाइबर भी अधिक होता है, जो मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। साथ ही, सादे चावल की तुलना में इसे आप कम खाएंगे, तो ही आपका पेट भरा हुआ महसूस होगा। ऐसे में आप वजन घटाने के अपने लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।
एक कटोरी ब्राउन राइस में पूरे दिन की मैग्नीशियम की आवश्यकता का 21 % मौजूद होता है। मैग्नीशियम से हड्डियां मजबूत होती हैं। ये मांसपेशियों और मस्तिष्क पर पड़ने वाले कैल्शियम के प्रभाव को भी संतुलित करता है।
मस्तिष्क स्वस्थ रहेगा तो आपका संपूर्ण शरीर भी स्वस्थ रहेगा। ऐसे में ब्राउन राइस जरूर खाएं। इसमें मैगनीज होता है, जो पोषक तत्व, फैटी एसिड्स और हार्मोन्स के निर्माण में मदद करता है। इससे नर्वस सिस्टम को फायदा पहुंचता है।
ब्राउन राइस में वाइट राइस की तुलना में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ता नहीं है। नियमित रूप से ब्राउन राइस खाने से डायबिटीज का जोखिम 20% तक कम हो सकता है।
हृदय रोग से बचना चाहते हैं, तो ब्राउन राइस व्हाइट राइस की तुलना में अधिक बेहतर विकल्प है। ब्राउन राइस खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है, जिससे दिल की धमनियों में ब्लॉकेज नहीं होता। धमनियों में ब्लॉकेज दिल की बीमारियों का कारण बनता है। ब्राउन राइस के चोकर में अनसैचुरेटेड ऑयल होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं। ऐसे में इसका सेवन जरूर करें।
इसके छिलके और चोकर में अघुलनशील फाइबर होते हैं। ये पित्त में पथरी नहीं बनने देते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, महिलाएं यदि इसका सेवन करें, तो उनमें पित्त की पथरी का जोखिम कम हो जाता है।