लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से संभव है पित्ताशय की पथरी और वजन घटाना, जानें कैसे
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी तकनीक पहले से भी बेहतर हो गई है, क्योंकि इसमें रोगी को कम दर्द होता है। कम से कम निशान पड़ते हैं और सामान्य जीवन की गतिविधियों को जल्दी ही शुरू कर सकते हैं।
जम्मू में वजन घटाने, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, पैनक्रियाज, कोलोन कैंसर, पित्त व रिफलक्स और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी laparoscopic surgery के लिए फोर्टिस (गुड़गांव) त्रिवेणी नर्सिंग होम (जम्मू) के सहयोग से एक विशेष ओपीडी का आयोजन करता है। यह ओपीडी इस नर्सिंग होम में हर महीने 2 दिनों के लिए चालू रहती है, जिसका प्रबंधन फोर्टिस के मिनिमल एक्सेस, बैरियाट्रिक और जीआई सर्जरी निदेशक डॉ. अजय कुमार कृपलानी करते हैं। डॉ. कृपलानी का कहना है कि मैंने जम्मू में दो दशक पहले पित्ताशय की पथरी (Gallstones) हटाने के लिए लेप्रोस्कोपिक या न्यूनतम एक्सेस सर्जरी (what is laparoscopic surgery) करना शुरू किया था। अब यह तकनीक पहले से भी बेहतर हो गई है, क्योंकि इसमें रोगी को कम दर्द होता है। कम से कम निशान पड़ते हैं और सामान्य जीवन की गतिविधियों को जल्दी ही शुरू कर सकते हैं।
लेप्रोस्कोपिक से संभव है पेट की समस्याओं का इलाज
तकनीक और टेक्नोलॉजी में जबरदस्त प्रगति के साथ लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (laparoscopic surgery) से अब पेट की कई समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि जम्मू के निवासी इस तकनीक का लाभ उठा पा रहे हैं। जम्मू में मैंने पिछले दो दशकों में 3000 से अधिक रोगियों के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की है। हालांकि, इसके लिए विशेष उपकरणों, कौशल और ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके परिणाम अत्यधिक संतोषजनक होते हैं।
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लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के फायदे
एक चीरा लगाकर की जाने वाली यह सर्जरी कम दर्द, कम निशान और बहुत ही कम समय में रिकवरी वाली एक एडवांस तकनीक है। हालांकि, पित्ताशय की पारंपरिक सर्जरी के लिए पेट में 4 चीरे लगाने पड़ते हैं, जबकि नई तकनीक के साथ इस सर्जरी में केवल एक छोटे से चीरे से ही काम बन जाता है। पित्ताशय के लिए पारंपरिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में मेटल चिप का उपयोग किया जाता है, जो पेट के अंदर ही रहती है और सीटी स्कैन या एमआरआई के दौरान समस्या पैदा करती है। एक चीरे वाली तकनीक में किसी प्रकार की मेटल चिप का उपयोग नहीं किया जाता है।
वजन घटाने के भी आता है काम
वजन घटाने के लिए भी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है। वैसे, इस सर्जरी के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल फॉलो किया जाता है, जिससे अच्छे परिणाम के साथ मरीज की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाता है। डॉ. कृपलानी कहते हैं कि हमनें इस सर्जरी के जरिए 240 किलो के मरीज का भी ऑपरेशन किया है। फोर्टिस (गुड़गांव) की जोनल निदेशक, डॉ. रितु गर्ग का कहना है कि इस ओपीडी के जरिए हम जम्मू में अपनी अत्याधुनिक तकनीकों का विस्तार करने का उद्देश्य रखते हैं।