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Written By: Yogita Yadav | Published : August 31, 2019 9:27 AM IST
'माइंडफुलनेस' नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई इस स्टडी में कहा गया है कि इंसानों पर मेडिटेशन का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। यह इंसानों के सोचने के तरीकों को भी प्रभावित करता है। © Shutterstock
हाल में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि कुछ खास तरह के मेडिटेशन (Meditation benefits) तकनीक से क्रिएटिव थिकिंग बढ़ती है। यह स्टडी 'माइंडफुलनेस' नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है। स्टडी में कहा गया है कि इंसानों पर मेडिटेशन (Meditation benefits) का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। यह इंसानों के सोचने के तरीकों को भी प्रभावित करता है, जिससे नए आइडियाज आते हैं। इसका प्रभाव अनुभवी मेडिटेटर्स के साथ नए मेडिटेटर्स पर भी पड़ता है।
मेडिटेशन यानी ध्यान भारतीय मनीषियों की एक मूल्यवान परंपरा है। यह किसी वस्तु पर अपने विचारों का केन्द्रीकरण या एकाग्रता नहीं है, अपितु यह अपने आप में विश्राम पाने की प्रक्रिया है। इसमें तन और मन पूरी तरह एक ही बिंदु पर एकाग्रचित हो जाते हैं। ध्यान करने से हम अपने किसी भी कार्य को अधिक एकाग्रता से पूर्ण सकते हैं।
ध्यान के कारण शरीर की आतंरिक क्रियाओं में विशेष परिवर्तन होते हैं और शरीर की प्रत्येक कोशिका प्राणतत्व (ऊर्जा) से भर जाती है। शरीर में प्राणतत्व के बढ़ने से प्रसन्नता, शांति और उत्साह का संचार भी बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर ठीक रहता है, इम्यूनिटी बढ़ती है। तनाव के कारण होने वाली तमाम समस्याओं से आप ध्यान के माध्यम से छुटकारा पा सकते हैं। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और सामाजिक रूप से ज्यादा सकारात्मक हो जाते हैं।
इस स्टडी में 40 लोग शामिल हुए थे। सभी लोगों को थिकिंग टास्क दिया गया था, जिसे करने से पहले 25 मिनट तक मेडिटेशन किया। इन लोगों में आधे अनुभवी और आधे फर्स्ट टाइम मेडिटेटर्स शामिल थे। स्टडी में क्रिएटिविटी के दो मेन इनग्रिडियंट्स पर मेडिटेशन के अलग-अलग तकनीकों के प्रभावों की जांच की गई।
स्टडी में यह भी बताया गया है कि सभी प्रकार के मेडिटेशन तकनीक का क्रिएटिविटी पर एक जैसा प्रभाव नहीं पड़ता है। जिन लोगों ने ओपन मॉनिटरिंग मेडिटेशन किया उन लोगों के पास एक ही समस्या के कई समाधान थे। वहीं, जिन लोगों ने फोकस्ड अटेंशन मेडिटेशन था, उन पर कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला।