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Written By: Yogita Yadav | Published : August 7, 2019 8:30 AM IST
इस आसन को करने से आप दिन-भर तरोताज़ा महसूस करते हैं। पैरों के टखने, घुटने और जंघाओं की कसरत हो जाती है और जोड़ लचीले बनते हैं।
सारा दिन डेस्क जॉब करने वालों की समस्या यह होती है कि उनके पेट और कमर के आसपास फैट (Yogasana for burn fat) जमना शुरू हो जात है। कमर पर जमे फैट के ये टायर देखने में बहुत ही भद्दे लगते हैं। साथ ही इससे कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर आप अपनी कमर, पेट और जांघों के आसपास जमे इस फैट से छुटकारा चाहते हैं तो आपको हर रोज उत्थानासन (Yogasana for burn fat) करना चाहिए। आइए जानते हैं कौन सा है यह आसन और इसे कैसे करना है।
अकसर लगातार बैठे रहने से शरीर के निचले हिस्से में भारीपन (Yogasana for burn fat) महसूस होने लगता है। खासतौर से महिलाओं में कमर दर्द, पेट के निचले हिस्से का लटकना और जांघ के आसपास जमा फैट बहुत परेशान करता है। इसके लिए आपको उत्थानासन का अभ्यास करना चाहिए। इससे शरीर का निचला हिस्सा मजबूत होता है और कमर-घुटने आदि में लचीलापन भी बढ़ता है। उत्थान आसन हमारे पैरों, पीठ और कंधों की पेशियों में महत्वपूर्ण खिंचाव लाता है। साथ ही इससे कमर के आसपास जमे फैट टायर (Yogasana for burn fat) से भी निजात मिलती है।
सीधे खड़े रहें, दोनो पैरों में लगभग एक मीटर का अंतर रखिए।
दोनों पैरों को बाहर की ओर मोड़िए।दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में मिला लीजिए, बाजू को सीधा और ढीला रखिए. सांस भर लीजिए। यह प्रारम्भिक स्थिति है।
सांस छोड़ते हुए घुटने मोड़े और 30 सेंटी मीटर तक नीचे बैठिए, प्रयास करें कि आगे न झुकें। सांस भरते हुए वापस सीधे खड़े हो जाए।
इसी प्रकार सांस छोड़ते हुए आधा मीटर नीचे बैठिए। जब आपकी जांघ ज़मीन के समानांतर हो जाए। उस स्थिति में रुकने का प्रयास करें, फिर सांस भरते हुए प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
इस बार सांस छोड़ते हुए घुटने मोड़ते हुए इतना नीचे बैठिए कि हाथों की अंगुलियां ज़मीन से स्पर्श हो जाएं, परन्तु आगे न झुकें, रीढ़ को सीधा रखने का प्रयास करें।
बाज़ुओं को और कंधों को ढीला ही रखें। इस स्थिति में कुछ पल रुकने का प्रयास करें तत्पश्चात सांस भरते हुए वापस प्रारम्भिक स्थिति में आ जाएं।
इससे पेट और कमर के आसपास जमे फैट को कम करने में मदद मिलती है।
नाभि से नीचे पेट का व्यायाम होता है। पीठ के मध्य की मांसपेशियां सशक्त होती हैं।
उत्थान आसन के अभ्यास से शरीर की प्राण ऊर्जा का प्रवाह नियमित होता है। आप दिन-भर तरोताज़ा महसूस करते हैं।
पैरों के टखने, घुटने और जंघाओं की कसरत हो जाती है और जोड़ लचीले बनते हैं।
गर्भवती महिलाएं पहले से तीन महीने के बाद पहली और दूसरी अवस्था का ही अभ्यास करें। योग प्रशिक्षक और डाक्टर की सलाह भी ली जा सकती है।
योग के अभ्यासी को कमर या पीठ दर्द ख़ासकर साइटिका और स्लिप डिस्क की संभावना नहीं रहती। जिन्हें पहले से दर्द हो उन्हें खड़े होने वाले यह आसन नहीं करने चाहिए।
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