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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 21, 2021 3:03 PM IST
पेट में गुड़गुड़ और मच रही सीने में जलन? बिना दवा के इन 6 योगासन से दूर करें पेट से जुड़ी समस्याएं, जानें नेचुरोपैथ टिप्स
Yoga poses to get rid of stomach fluctuation : एसिड रिफ्लक्स के रूप में भी जाने जाने वाली एसिडिटी की बीमारी होना आम है। यह बीमारी तब होती है जब पेट बहुत ज्यादा एसिड उत्पन्न करने लगता है। एसिड द्वारा भोजन के टूटने की प्रक्रिया होती है, लेकिन कभी-कभी पेट में ज्यादा एसिड का उत्पादन ज्यादा होने लग जाता है, जिससे एसिड की अधिकता हो जाती है। एसिड रिफ्लक्स या हार्ट बर्न के लिए भोजन को ठीक से चबाना, पर्याप्त पानी पीना और धूम्रपान ना करना जरूरी होता है क्योंकि यह स्थिति को और खराब कर सकता है। कुछ अन्य प्राकृतिक इलाजों के साथ योग करने से पाचन तंत्र में एसिडिटी को कम करने में मदद मिल सकती है और योग एसिड रिफ्लक्स के इलाज में भी प्रभावी हो सकता है।
एक स्टडी में ये निष्कर्ष सामने आया है कि जो लोग एसिड रिफ्लक्स का अनुभव करते हैं, उनमें स्ट्रेस यानी की तनाव भी होता है, जो कि एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ाने का काम करता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, योग करने से एसिड रिफ्लक्स जैसे पाचन डिसआर्डर से जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करने और/या कम करने में मदद मिलती है।
पश्चिमोत्तानासन, या आगे झुकने का आसन पेट के अंगों के बेहतर कार्य करने में मदद करता है। इस आसन से कई सारे लाभ मिलते है। यह आसन एसिडिटी जैसे पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करता है। यह आसन पीरियड को नियमित करने और पेट की चर्बी को कम करने में भी मदद करता है।
हलासन को हल मुद्रा के रूप में जाना जाता है क्योंकि "हला" वाक्यांश "हल" का संस्कृत रूप है, और "आसन" का अर्थ संस्कृत में "मुद्रा" होता है। इस आसन में लचीलेपन, ताकत और रीढ़ की मांसपेशियों को भी बढ़ाने की क्षमता होती है। यह कंधों और पीठ की मांसपेशियों में तनाव को दूर करने का एक प्रभावी तरीका होता है। इसके अतिरिक्त यह आसन पाचन में सुधार करती है और वजन घटाने के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित हुई है।
यह काफी आसान योग का आसन है। इस आसन को लंच या डिनर के बाद किया जा सकता है। यह आसन एसिडिटी की समस्या को कम करने के लिए बहुत उपयुक्त होते है क्योंकि यह आसन पाचन क्रिया में सुधार करता है, सूजन को कम करता है और पेट की परेशानी को कम करने में मदद करता है। यह आसन "डायमंड पोज़" के रूप में भी जाना जाता है, वज्रासन एक अच्छी मेडिटेशन है और यह एक साँस लेने की मुद्रा भी है।
यह एसिडिटी को कम करने के लिए एक और शक्तिशाली आसन है, और इस तरह यह कब्ज और गैसजैसे पाचन समस्याओं को ठीक करने के लिए काफी उपयोगी होता है। यह पेट में आंतों और अन्य अंगों की भी मालिश करता है और पीठ के निचले हिस्से और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके अन्य लाभ भी हैं, जैसे कूल्हे के जोड़ों में सर्कुलेशन में सुधार और पीठ के निचले हिस्से में तनाव को कम करना आदि।
उष्ट्रासन करने से पेट के अंगों को उत्तेजित करके पाचन को मजबूत करने में मदद करता है। यह छाती, पेट और गर्दन में ताकत और लचीलेपन को बढ़ाता है और पेल्विक एरिया और मस्तिष्क में बेहतर ब्लड फ्लो में मदद करता है। फेफड़ों और छाती में बेहतर क्षमता प्रदान करने के लिए यह आसन फायदेमंद है। यह आसन पेट के क्षेत्र से तनाव को भी दूर करता है, जिससे एसिडिटी का इलाज होता है।
यह सांस लेने वाली तकनीक शरीर की गर्मी उत्पन्न करती है, जो तब शरीर में जमा अपशिष्ट पदार्थों और विषाक्त पदार्थों को तोड़ती है, विशेष रूप से पेट क्षेत्र में ये अपशिष्ट पदार्थ टूटते हैं जिससे एसिडिटी कम होती है। यह आपके फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने, उन्हें मजबूत बनाने में भी मददगार है।
चूंकि योग पेट और एसिडिटी की समस्याओं के लिए एक शानदार इलाज हो सकता है, यह कुछ आसान, डाइट में बदलाव और अच्छी खाने की आदतों को अमल में लाकर एसिडिटी की समस्या को कम किया जा सकता है, ताकि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य में स्पष्ट रूप से सुधार हो सके।
यह रिकमेंड किया जाता है कि एक औंस पीने के बजाय खूब सारा पानी पिएं और केवल पानी पर निर्भर न रहें। इसकी जगह ग्रीन टी, फ्रूट जूस, नीबू पानी और फ्रूट स्मूदी, नारियल पानी पिएं। यह आपमें पेट ख़राब होने की संभावना को कम करने में मदद करेगा क्योंकि यह आपके पेट में एसिडिटी को कम करेगा।
मसालेदार भोजन करने से एसिडिटी की समस्या होती है। एसिडिटी से पीड़ित लोगों को लाल चटनी, सिरका या इसी तरह के अन्य खाद्य पदार्थों के साथ भोजन करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ये काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ताजे फल और कच्ची सब्जियों का सेवन ज्यादा करें।
अनियमित समय पर खाने से भी अक्सर एसिडिटी हो जाती है। और इसलिए नैचुरोपैथ भी समय पर भोजन करने और भोजन न छोड़ने की सलाह देते हैं।
इसके अतिरिक्त लोगों को बहुत अधिक या बहुत कम खाने से बचना चाहिए क्योंकि इन क्रियाओं से शरीर में असंतुलन हो सकता है। एक या दो बार ज्यादा भोजन के बजाय पूरे दिन में कम मात्रा में थोड़ा थोड़ा खाने से पाचन में मदद मिल सकती है। इससे आपको पर्याप्त पोषण मिलता है। यह न केवल एसिडिटी को दूर करने के लिए बल्कि एक स्वस्थ लाइफस्टाइल को बनाए रखने में भी मददगार होती है।
इनपुटः (डॉ. जी प्रकाश , डिप्टी चीफ मेडिकल अफसर , जिंदल नेचरक्योर इंस्टिट्यूट)
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