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Yoga For Thyroid Patients:थायराइड में वेट लॉस के लिए करें ये 2 योगासन, ये डाइट टिप्स भी आएंगी काम

पढ़ें कुछ योग आसनों के बारे में जिनके अभ्यास से थायराइड की बीमारी के लक्षण कम हो सकते हैं और मरीजों को इससे फायदा पहुंच सकता है। (Yoga Poses For Thyroid Patients )

Yoga For Thyroid Patients:थायराइड में वेट लॉस के लिए करें ये 2 योगासन, ये डाइट टिप्स भी आएंगी काम

Written by Sadhna Tiwari |Updated : December 16, 2021 12:14 AM IST

Yoga Poses For Thyroid Patients: थायराइड की बीमारी एक लाइफस्टाइल से जुड़ी हुई बीमारी है जिसके मरीजों की संख्या में वैश्विक स्तर पर बढ़ती जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, हर चौथा व्यक्ति थाइराइड से जुड़ी किसी समस्या से पीड़ित है।  थायराइड गर्दन में पास स्थित एक ग्लैंड है जहां से ऐसे हार्मोन्स का स्त्राव होता है जो शरीर का मेटाबॉलिज्म बनाए रखने का कार्य करते हैं। जब थायराइड ग्रंथि में किसी तरह की गड़बड़ी आ जाती है तो थायराइड से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। मुख्यत: थायराइड की बीमारी 2 प्रकार की होती है-पहली हाइपो थायरायड और दूसरी हाइपर थायरायड। थायराइड की समस्या से राहत पाने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल और योग की मदद ली जा सकती है। यहां आप पढ़ेंगे कुछ ऐसे ही योग आसनों के बारे में जिनके अभ्यास से थायराइड की बीमारी के लक्षण कम हो सकते हैं और मरीजों को इससे फायदा पहुंच सकता है। (Yoga Poses For Thyroid Patients In Hindi)

थायराइड के लक्षण क्या हैं? (Symptoms Of Thyroid)

  • गर्दन में सूजन और
  • हार्ट बीट बढ़ना
  • चिड़चिड़ापन और मूड ख़राब होना
  • हेयर फॉल
  • बहुत अधिक पसीना आना

थायराइड के लिए योगासन (Yoga Poses For Thyroid Patients)

शीर्षासन

इस योगासन के अभ्यास से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और इससे इम्यूनिटी बूस्ट हो सकती है। यह योगासन फोकस और मेमरी बूस्ट करने वाला भी माना जाता है। साथ ही थायराइड के मरीजों के लिए भी यह काफी लाभकारी साबित हो सकता है। यहां पढ़ें इस योगासन के अभ्यास का तरीका-

  • शीर्षासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर एक चादर या चटाई बिछाएं जो एक ही जगह टिकी रहे या जिसके सरकने का खतरा ना हो।
  • अब, घुटनों पर बैठ जाएं और वज्रासन की मुद्रा बनाएं। इस स्थिति में आपके दोनों हाथों की अंगुलियों को एक-दूसरे में फंसाकर उन्हें इंटरलॉक कर लें। अब हाथों को जमीन पर रखें।
  • अब अंगुलियों के जुड़े रहते हुए अपनी हथेलियों को इस तरह मोड़ें कि वह कटोरी के आकार में नज़र आएं। अब, धीरे- धीरे अपना सिर नीचे की ओर झुकाएं और उसे हथेलियों पर रखें।
  • फिर, अपने दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाएं और उन्हें स्ट्रेट रखें। जिन लोगों को अभ्यास ना हो या बैलेंस बनाने में दिक्कत आती है ऐसे लोग अपने पैरों को ऊपर ले जाने के लिए दीवार का सहारा ले सकते हैं।
  • इस मुद्रा में आपका पूरा शरीर एकदम सीधा होना चाहिए। कुछ देर तक इस मुद्रा में बने रहने के लिए बॉडी-बैलेंस बनाए रखने का जितना हो सके उतना प्रयास करें।
  • शुरुआत में इस मुद्रा में 15-20 सेकेंड तक बने रहने की कोशिश करें और इस दौरान गहरी सांसें लेते रहें।
  • फिर, धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए शरीर को पूर्व मुद्रा में ले जाने की कोशिश करें। धीरे-धीरे अपने पैरों को जमीन की तरफ नीचे ले जाएं और पूर्व मुद्रा में आने के बाद 1 मिनट रेस्ट करें।
  • अपनी सुविधा के अनुसार, शीर्षासन का अभ्यास करें और रिपिट करें।

सर्वांगासन

इस आसन के अभ्यास से शरीर के अधिकांश अंगों को फायदा होता है इसीलिए, इसका अभ्यास बहुत सावधानी से और किसी एक्सपर्ट की देखरेख में करने की सलाह दी जाती है ताकि, सर्वांगासन का भरपूर लाभ योग करने वाले व्यक्ति को मिल सके।  सर्वांगासन के प्रभाव के बारे में बात करें तो इस आसन के अभ्यास से स्ट्रेस और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं से राहतमिलती है जो कि थायराइड की बीमारी का एक बड़ा कारण हो सकती हैं। साथ ही मस्तिष्क की तरफ शक्ति और रक्त का संचार भी बेहतर तरीके से होता है। यह बॉडी बैलेंस को बढ़ाने वाला और एंटी-एजिंग प्रभावों के लिए भी जाना जाता है।

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सर्वांगासन के अभ्यास का तरीका

  •  जमीन पर योगा मैट बिछाकर बैठ जाएं।
  • सुखासन या वज्रासन की मुद्रा में बैठें और आराम से सांस लें।
  • फिर, पीट के बल लेट जाएं और पैरों को सीधा रखें।
  • फिर, हाथों को जमीन पर रखें और फैलाकर सीधा रखें।
  • अब धीरे-धीरे अपने शरीर के निचले हिस्से को ऊपर उठाएं।
  • फिर, दोनों हाथों को जमीन से उठाएं और पीठ को सपोर्ट करें। कोहनियों को मज़बूती से जमीन पर टिकाकर रखें।
  • अब हिप्स और कमर को ऊपर उठाएं और स्ट्रेट रखें। ध्यान रखें कि आपके शरीर का पूरा भार भुजाओं और कंधों पर रहे।
  •  पैरों की उंगलियां नाक के समांनातर और चिन आपके चेस्ट के नज़दीक होनी चाहिए।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकेंड तक बने रहें।

थायराइड के मरीजों के लिए डाइट टिप्स (Diet Tips For Thyroid Patients)

संतुलित और हेल्दा डाइट भी थायराइड की समस्या से आराम दिलाने में मदद कर सकती है। हेल्दी डाइट से प्राप्त पोषक तत्व थायराइड ग्लैंड को होनेवाले नुकसान की भरपाई कर सकता है जिससे बीमारी के लक्षण भी कम हो सकते हैं। थायराइड के मरीजों को अपनी डाइट में इन चीज़ों का समावेश करना चाहिए।

आयोडीन रिच फूड

थायराइड की एक वजह भोजन में आयोडिन की कमी भी हो सकती है। इसीलिए, इसके लक्षणों को कम करने के लिए अपनी डाइट में आयोडीन से समृद्ध फूड्स को शामिल करें।

मुलेठी

यह नेचुरल औषधी शरीर को ताकत देती है और कमजोरी दूर करती है। इसके साथ ही यह थायराइड ग्लैंड की कार्यक्षमता सुधारने वाले विभिन्न पोषक तत्व भी प्राप्त हो सकते हैं। इससे, थायराइड की समस्या के लक्षण कम हो सकते हैं।

सोया प्रॉडक्ट्स

जिन लोगों को थायराइड की समस्या हो उनके लिए सोया प्रॉडक्ट्स का सेवन लाभकारी साबित हो सकता है। दरअसल, सोया में कुछ ऐसे केमिकल्स पाए जाते हैं जो शरीर में हार्मोन्स के स्तर को संतुलित बना सकते हैं। हालांकि, सोया प्रॉडक्ट्स और सोयाबीन का सेवन अपने डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट से पूछकर ही करें, ताकि इसके नुकसान से बचा जा सके।

सी-फूड

मछलियों को आयोडीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है।  मीठे पानी की मछली के सेवन के साथ-साथ सी-फूड का सेवन करने से आयोडीन की आवश्यक मात्रा प्राप्त हो सकती है।

दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स

शाकाहारी डाइट लेने वाले लोगों के लिए दूध और दूध से बने फूड्स का सेवन थायराइड में बहुत लाभ हो सकता है। डेयरी प्रॉडक्ट्स का सेवन करने से प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन डी की भी अच्छी मात्रा प्राप्त हो सकती है।

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(डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई बीमारीय, योग और डाइट से जुड़ी सभी जानकारियां  सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)