ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए योग की लें मदद, करें इन 3 योगासनों का अभ्यास
ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क कम करने के लिए आप योग की भी मदद ले सकते हैं। कुछ ऐसे योगासन भी हैं जिनके अभ्यास से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है। यहां पढ़ें कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में जो ब्रेस्ट कैंसर से सुरक्षा के लिहाज से मददगार माने जाते हैं। साथ ही जानें इन योगासनों के अभ्यास का सही तरीका-
Written by Sadhna Tiwari|Updated : October 20, 2020 4:33 PM IST
Yoga for Breast Cancer: ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए हर साल अक्टूबर महीने में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह ( Breast Cancer Awareness Month 2020 ) मनाया जाता है। इस पूरे महीने ब्रेस्ट कैंसर के बारे में लोगों को जागरुक बनाने और इसके इलाज, रिस्क और निदान की दिशा में नवीनतम गतिविधियों और रिसर्च के बारे में चर्चा की जाती है। ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत ब्रेस्ट टिश्यूज़ में सूजन और ब्लॉकेज़ के साथ होती है। ( Breast Cancer Symptoms )
ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं को होनेवाले सबसे आम कैंसर प्रकारों में से है। इसके कई कारण होते हैं। लेकिन, सही लाइफस्टाइल की मदद से इसके खतरे को कम किया जा सकता है। हेल्दी डायट, व्यसन और नशे की लत से दूर रहने, मोटापा कम करने और ब्रेस्टफीडिंग कराने से इस समस्या का खतरा कम किया जाता है। ( Breast Cancer Prevention)
क्या योगासनों की मदद से ब्रेस्ट कैंसर से बचा जा सकता है?
इसी तरह ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क कम करने के लिए आप योग की भी मदद ले सकते हैं। कुछ ऐसे योगासन भी हैं जिनके अभ्यास से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है। यहां पढ़ें कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में जो ब्रेस्ट कैंसर से सुरक्षा के लिहाज से मददगार माने जाते हैं। साथ ही जानें इन योगासनों के अभ्यास का सही तरीका-
अब एक गहरी सांस लें। अपने दोनों हाथों में मुट्ठी बांधे।
मुट्ठी बंधे हुए अपने दोनों हाथ को नाभि के आस-पास रखें।
अब सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। इसी मुद्रा में थोड़ी देर रूकें।
अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए शरीर को ऊपर उठाएं और सीधे बैठ जाएं।
उष्ट्रासन (Yoga for Breast Cancer)
इस आसन में शरीर की मुद्रा ऊंट जैसी बनती है। इसीलिए, इसे उष्ट्रासन कहते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस योगासन से होने वाले फायदों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम करने भी है।
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अब, अपने हाथों को हिप्स के पास रखें। इस मुद्रा में बैठते समय यह ध्यान रखें कि, आपके पैरों के तलवे ऊपर की तरफ रहें।
अब, सांस खींचते हुए रीढ़ की निचली हड्डी को आगे की तरफ झुकाएं।
कमर को पीछे की तरफ मोड़ें। फिर, हथेलियों से अपने पैरों पर ही मजबूती से पकड़े। ध्यान में रखें कि इन सबके बीच आप पूरी तरह रिलैक्स हों।
आसन के दौरान इस मुद्रा में थोड़ी देर होल्ड करें। फिर, धीरे-धीरे पूर्व मुद्रा में आ जाएं।
ऐसे करें वक्रासन का अभ्यास
इस आसन के अभ्यास के लिए सबसे पहले ज़मीन पर आराम से बैठ जाएं। (Yoga for Breast Cancer)
अब अपने पैरों को सीधा रखते हुए मने की ओर फैला दें। पैरों को एक-दूसरे से सटा दें।
फिर, दाएं पैर को मोड़ते हुए बाएं पैर के घुटने के बगल ले आएं। दाएं हाथ को अपनी पीठ के पीछे से ले जाते हुए ज़मीन पर रखें।
इसके बाद अपने बाएं हाथ से दाहिने पैर के बाएं से हाथ को ले जाएं और दाहिने पैर के घुटने को छुएं।
इस आसन के दौरान सांस लेने की गति नॉर्मल ही रखें। अपनी सुविधा के हिसाब से इस आसन को रिपीट करें।
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