Yoga for Better Sleep : सुकून भरी नींद पाने के लिए करें सुप्त वीरासन, जानें इसके फायदे, करने का सही तरीका

क्या आपको रात में नींद नहीं आती है? यदि नींद नहीं आने की समस्या से हैं परेशान, तो सुप्त वीरासन का करें नियमित अभ्यास। इसे योगासन को करने से नींद अच्छी आती है। जानें सुप्त वीरासन के फायदे...

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Written By: Anshumala | Updated : August 31, 2021 8:43 PM IST

Yoga for better Sleep in Hindi: स्वस्थ रहने के लिए जिस तरह से हेल्दी डाइट की जरूरत होती है, उसी तरह से भरपूर नींद की भी जरूरत होती है। पर्याप्त सोने से आप मेंटली और फिजिकली फिट रहते हैं। नींद की कमी से आप इन्सॉम्निया के शिकार हो सकते हैं। सुबह उठने पर आलस, सुस्ती और ऊर्जा की कमी शरीर में लगातार बनी रहती है। इससे कोई भी काम सही से नहीं हो पाता है। ध्यान लगाने में समस्या होती है। दिन में काम के दौरान आपको नींद आ सकती है। आज लोगों के पास इतना काम है कि वे अपने खानपान, नींद, एक्सरसाइज आदि पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं।

बेतरतीब लाइफस्टाइल फॉलो करने से दिनचर्या सही से फॉलो नहीं करते और रात में देर तक जागकर काम करते हैं। जब नींद नहीं पूरी होती है, तो लोग नींद आने की दवा खाने लगते हैं। ऐसी दवा सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होती हैं। आपको यदि पर्याप्त नींद नहीं आती है तो बिना दवा खाए भी भरपूर नींद ले सकते हैं। ऐसा होगा योग की मदद (Yoga for better Sleep in Hindi) से। जी हां, कुछ योग के नियमित अभ्याय से आप रात में चैन की नींद सो सकते हैं।

सुप्त वीरासन करने से नींद आती है अच्छी (Supta Virasana for Better Sleep)

सुप्त वीरासन (Supta virasana) को अंग्रेजी में रेक्लाइन्ड हीरो पोज (reclined hero pose) भी कहते हैं। यदि आपने सुप्त बद्ध कोणासन का कभी अभ्यास किया है, तो सुप्त वीरासन भी कुछ-कुछ इसी तरह का योगासन है। सुप्त वीरासन के नियमित अभ्यास से रात में सुकून भरी नींद आती है। इसे करने के लिए मैट बिछाकर बैठ जाएं। अब कमर के पीछे तकिया रखें। अब धीरे-धीरे अपने कमर से ऊपर के शरीर को पीछे की तरफ ले जाते हुए लेट जाएं। हाथों को दोनों तरफ खोल लें। दोनों पैरों को घुटने से मोड़कर अपनी कमर तक ले जाएं। इस अवस्था में जितनी देर हो सके बने रहें।

सुप्त वीरासन करने के फायदे

1 हार्ट में ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर।

2 रात में नींद ना आने की समस्या होती है दूर।

3 दिल की नसों में ब्लॉकेज नहीं होने देता।

4 फेफड़े की मांसपेशियां लचीली बनी रहती हैं।

5 गैस, अपच, जलन आदि की समस्या दूर करता है।

6 रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है।

7 कमर, घुटनों, जोड़ों की समस्या कम होती है।

8 पेल्विक मांसपेशियां होती हैं टोन।

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