गैस, एसिडिटी, अपच से राहत दिलाने और भूख बढ़ाने के लिए बच्चों से कराएं ये 4 योगासन

इन आसन से बच्चों की हजम करने की शक्ति बेहतर होती है और भूख बढ़ती है!

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Written By: Editorial Team | Published : November 20, 2017 1:56 PM IST

बच्चों को भी अक्सर एसिडिटी और गैस जैसी पाचन समस्याएं परेशान करती हैं। ऐसे में आप उन्हें दवा ना देकर योग करा सकते हैं। इससे गैस और एसिडिटी से राहत मिलती है और भूख में सुधार होता है। योग एक्सपर्ट रमन मिश्राआपको कुछ योगासन बता रहे हैं, जिन्हें आपको बच्चों से कराने चाहिए।

1) शशांकासन

यह तनाव और चिंता को दूर करने के लिए एक बेहतर आसन है। इससे पेट के अंगों की मसाज होती है और पाचन तंत्र बेहतर होता है।

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  • सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं।
  • दाहिने पैर को मोड़कर पीछे की ओर यानि हिप्स के नीचे रखें।
  • ठीक इसी तरह बाएं पैर को मोड़कर पीछे की ओर यानि बाएं हिप्स के नीचे रखें और बैठ जाएं।
  • अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस को बाहर छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें।
  • अब सांस लेते हुए सबसे पहले पेट व सीने को उठाए और हाथों को उठाते हुए पहली पोजीशन में जाएं।
  • इसी तरह से इस क्रिया को 4 से 5 बार करें।

2) चिन्मय मुद्रा

इस मुद्रा में शरीर में ऊर्जा के प्रवाह में सुधार होता है, पाचन को उत्तेजित करता है और इस तरह भूख को सुधारने में मदद मिलती है।

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  • अपनी आंखें बंद करके सुखासन में आराम से बैठें
  • इस मुद्रा में अंगूठा और तर्जनी चिन मुद्रा की तरह एक दूसरे को स्पर्श करते हैं, शेष उंगलियां मुड़कर हथेली को स्पर्श करती हैं।
  • हाथों को जांघों पर हथेलियों को आकाश की ओर करके रखे और लंबी गहरी सांस लें।
  • एक बार फिर सांस के प्रवाह और शरीर पर इसके प्रभाव को महसूस करें।

3) पवनमुक्तासन

यह आसन शरीर में मौजूद आवश्यकता से अधिक गैस को बाहर निकालने में सहायक है। यह आपके शरीर से हानिकारक गैस को बाहर निकालने में भी मदद करता है और आपको बहुत सारी बीमारियों से बचाता है।

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  • सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को फैलाएं और इनके बीच की दूरी को कम करें।
  • अब दोनों पांव उठाएं घुटने मोड़ें। घुटनों को बांहों से घेर लें।
  • सांस छोड़े, घुटनों को दबाते हुए छाती की ओर लाएं। सिर उठाएं तथा घुटनों को छाती के निकट लाएं जिससे ठोड़ी घुटनों को स्पर्श करने लगे।
  • जहां तक सम्भव हो सके इस मुद्रा को मेन्टेन करें।
  • फिर सांस लेते हुए पैरों को जमीन पर लेकर आएं। यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

4) पश्चिमोत्तानासन

इस आसन के दौरान रीढ़ की हड्डी के साथ शरीर का पिछला भाग तन जाता है जिसके कारण इसका नाम पश्चिमोत्तानासन दिया गया है। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज़्यादा लाभदायक आसन है। यह विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है।

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  • सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं। अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं।
  • पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें। सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं।
  • फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके।
  • धीरे धीरे सांस लें, फिर धीरे धीरे सांस छोड़े। और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें।
  • धीरे धीरे इस की अवधि को बढ़ाते रहे। यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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