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Yogasana at age of 45 for women: 45 की उम्र के बाद सभी को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना शुरू कर देना चाहिए क्योंकि इस उम्र में शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। खासकर, महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य का खास ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में शरीर में कई तरह के हॉर्मोन्स से भी संबंधित बदलाव होते हैं। 40 से 45 वर्ष की उम्र में महिलाओं को अपनी डाइट, जीवनशैली का खास ध्यान देना चाहिए। खानपान में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, अनाज आदि भरपूर शामिल करें। साथ ही कुछ एक्सरसाइज के नियमित अभ्यास से भी आप खुद को 45 वर्ष की उम्र के बाद स्वस्थ और फिट रख सकती हैं।
यदि आप चाहती हैं कि आप आगे भी फिट और हेल्दी रहें, तो कुछ योग और एक्सरसाइज का अभ्यास हर दिन करना शुरू कर दें। 45 की उम्र में आप अधिक हेवी और इंटेंस एक्सरसाइज तो नहीं कर सकती हैं, ऐसे में खुद को एक्टिव रखने के लिए एरोबिक्स, जॉगिंग, वॉकिंग जैसे हल्के एक्सरसाइज कर सकती हैं। इनके अभ्यास से आप निरोग रह सकती हैं।
अक्सर बढ़ती उम्र में हड्डियों की समस्या जैसे गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस के होने का रिस्क बढ़ जाता है। यदि आप कम उम्र से ही कैल्शियम से भरपूर चीजों का सेवन करेंगी तो इन रोगों से बची रहेंगी। यदि आपको ये समस्याएं अभी नहीं हुई हैं, तो भी आप कैल्शियम और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना शुरू कर दें।
45 की उम्र में अधिकतर महिलाओं को मेनोपॉज हो जाता है। मेनोपॉज होने पर कई तरह के शारीरिक बदलाव, समस्याएं नजर आती हैं। इसके लिए आप विपरीतकर्णी आसन करें। यह रिप्रोडक्टिव सिस्टम में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। शरीर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। गठिया का दर्द करे कम। डिप्रेशन, माइग्रेन, यूरिनरी इंफेक्शन, माइग्रेन आदि समस्याओं से राहत दिलाए।
पीठ के बल दीवार के नजदीक लेट जाएं। दोनों पैरों को दीवार से लगाएं। पैर बिल्कुल सीध में हों। अब दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। कूल्हों को भी ऊपर की तरफ उठाएं। अपने शरीर को हाथों से सहारा दें और कंधा, चेहरा और गर्दन को स्थित रखें। 5 मिनट इसी तरह रुकें, गहरी सांस लेते रहें फिर सांस छोड़ दें।
अक्सर बढ़ती उम्र में पीठ, कमर, कंधे आदि में दर्द की समस्या बनी रहती है। इस तरह के दर्द ना हों, तो इसके लिए करें पर्वतासन। काम करने वाली महिलाएं यदि लगातार बैठकर ऑफिस का काम करती रहती हैं, तो ना सिर्फ शरीर बल्कि दिमाग पर भी इसका नेगेटिव असर होता है। रीढ़ की हड्डी भी प्रभावित होती है। पर्वतासन करने के दौरान आपका शरीर पर्वत की चोटी की तरह नजर आता है। पर्वतासन करने के लिए वज्रसान में बैठें। अब हथेलियों को जोड़ते हुए नमस्ते मुद्रा बनाएं और हथेलियों को सीने पर ले आएं। हथेलियों को सिर के ऊपर ले जाएं। शरीर को बिल्कुल सीधा रखें। एड़ियों को जमीन पर रखते हुए हिप्स को ऊपर ले जाएं। हथेलियों को सीने के पास लाएं। थोड़ी देर इसी अवस्था में ठहरें। फिर से इस प्रक्रिया को दोबारा से करें। रीढ़ की हड्ड को हमेशा सीधी रखें।