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Written By: Atul Modi | Published : February 19, 2021 1:54 PM IST
कपालभाति प्राणायाम करने से पहले सावधानी बरतनी जरूरी है।
कपालभाति (Kapalbhati) एक योगिक तकनीक है। आमतौर इसे प्राणायाम के तौर पर जानते हैं। इस प्राणायाम में हम अपने पेट वाले एरिया पर दबाव डालते हुए झटके से सांस बाहर निकालते हैं और सामान्य तरीके से सांस अंदर लिया जाता है।
जब कपालभाति में प्राणायम शामिल किया जाता है तो इसमें सांसों पर और आंतरिक ऑर्गंस की गति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इसे प्राणों के अंदर व बाहर जाने का अभ्यास भी कहा जा सकता है। हालांकि हठ योग प्रदीपिका के अंतर्गत कपालभाति करते समय हमारा शरीर कुछ ऐसा हो जाता है जिसे 'ब्रीद ऑफ फायर' भी कहा जा सकता है।
कपालभाति एक एडवांस लेवल की सांस लेने वाली एक्सरसाइज है इसलिए इसे शुरू करने से पहले आपको कुछ बेसिक लेवल के प्राणायाम आसन करने चाहिए ताकि आपको कपालभाति करते समय ज्यादा दिक्कत न आए। हालांकि, कुछ लोगों के लिए कपालभाति प्राणायाम करने की मनाही है।
जिन लोगों को पेट में अल्सर हैं उन्हें कपालभाति करने से बचना चाहिए। क्योंकि कपालभाति करने के दौरान पेट के संपूर्ण भाग पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण अल्सर की समस्या बढ़ सकती है।
कपालभाति प्राणायाम पीरियड्स के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जिन महिलाओं की माहवारी का समय चल रहा है या जो महिलाएं गर्भवती हैं उन्हें भी कपालभाति करने से बचना चाहिए।
जो लोग अस्थमा या श्वसन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं उन्हें भी कपालभाति करते समय ज्यादा प्रयास नहीं करना चाहिए। कोशिश करें कि इस स्थिति में प्राणायाम न करें। अगर आप ऐसा करें तो एक्सपर्ट की सलाह लें।
अगर आप उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित हैं तो आपको कपालभाति प्राणायाम करने से बचना चाहिए। उच्च रक्तचाप में प्राणायाम करना रक्तचाप को बढ़ा सकती है। आपको योगाचार्य की देखरेख में ये प्राणायाम करना चाहिए।
कपालभाति प्राणायाम शुरू करने से पहले अपनी क्षमता जान लें व उसी के हिसाब से इसे करने का समय स्थापित करें। साथ ही आपको एक्सपर्ट की सलाह लेकर ही कपालभाति प्राणायाम करना चाहिए।