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Written By: Jitendra Gupta | Updated : June 20, 2021 11:14 AM IST
प्रेगनेंसी में साधारण महिला के लिए कौन से योगासन हैं बेस्ट, एक्सपर्ट से जानें किस योगासन को करने से मिलेगा लाभ
Yoga in Pregnancy in hindi : कोरोनावायरस की दूसरी लहर ने लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इससे वे लोग ज्यादा प्रभावित हुए हैं जो वायरस से संक्रमित हुए हैं। इस महामारी ने खुद की देखभाल पर सवाल खड़ा किया है। बहुत से लोगों ने कमजोर इम्युनिटी सिस्टम के विपरीत प्रभावों को समझा और महसूस किया है। कोरोनावायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है और योग इसमें आपकी मदद कर सकता है। योग को मरीज को शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक करने के लिए सबसे प्रभावी तरीके के रूप में माना गया है।
कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डॉ दीपक वर्मा का कहना है, "योग से शरीर और दिमाग को आराम देते हुए इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। अगर योग के सही आसनों को नियमित रूप से किया जाए तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के कार्य में सुधार करने से लेकर तनाव कम करने तक मदद मिल सकती है। जो आसन आप करेंगे उससे शरीर और दिमाग को मजबूत किया जा सकता है और बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
1-योग से थकान को भी दूर किया जा सकता है।
2-उचित डाइट और पर्याप्त नींद लेने के अलावा योग जैसी फिजकल एक्सरसाइज (शारीरिक व्यायाम) रिकवरी प्रक्रिया में अच्छी खासी मदद करते हैं।
3-योगासन ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करने के लिए जाना जाता हैं।
नोवल कोरोनावायरस मुख्य रूप से मानव के श्वसन प्रणाली पर हमला करता है और इसलिए रिकवरी प्रक्रिया में प्रमुख फोकस फेफड़ों की क्षमता और श्वसन प्रणाली के प्राकृतिक श्लेष्मा निकासी तंत्र में सुधार पर होना चाहिए। कपालभाति और प्राणायाम जैसे योग के आसन रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वास तंत्र) पर बहुत अच्छा प्रभाव डालते हैं। चूंकि यह बीमारी मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है, इसलिए योग किसी व्यक्ति के शरीर और दिमाग को आराम देने और कोविड के बाद तेजी से ठीक होने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग पाचन तंत्र और हार्ट रेट (हृदय गति) में सुधार करने में भी मदद कर सकता है। पाचन तंत्र और हार्ट रेट इन्फेशन के दौरान भी प्रभावित होता है।
नई दिल्ली स्थित नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी की फर्टिलिटी कंसल्टेंट डॉ अस्वती नायर का कहना है, "काम करने के घंटे में बढ़ोत्तरी होने, मुश्किल शेड्यूल होने, बहुत ज्यादा कम शारीरिक गतिविधि और आसमान छूती उम्मीदों के कारण जिंदगी में बहुत चिंता और तनाव हो गया है। इस तरह की लाइफस्टाइल से फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं होने लगी हैं।
नोएडा स्थित मदरहुड हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजिस्ट और सीनियर ऑब्स्ट्रेटिशियन कंसल्टेंट डॉ मंजू गुप्ता ने कहा, "गर्भावस्था के दौरान मध्यम मेहनत वाली एक्सरसाइज करना जरूरी होता है। प्राणायाम या सांस लेने वाले योग के आसन से गुस्से और निराशा जैसी नकारात्मक भावनाएं दूर होती हैं और तनाव कम होता है साथ ही मन शांत और आरामदायक रहता है।
उन्होंने कहा कि मां बनने वाली महिलाओं को योग समग्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। प्रसव से पहले के चरण के दौरान योग गर्भावस्था के सामान्य लक्षणोंजैसे मॉर्निंग सिकनेस, दर्दनाक पैर में ऐंठन, स टखनों में सूजन और कब्ज के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए हमेशा यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी चीज को करने से पहले अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह-मशविरा जरूर कर लें और किसी ट्रेंड योग शिक्षक के मार्गदर्शन में ही योग के आसन करें। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि योग करते हुए आपको गर्भावस्था के दौरान खायी जाने वाली जरूरी दवाओं को नहीं छोड़ना है। योग के आसन गर्भवती महिलाओं को प्रसव के बाद तेजी से ठीक होने में भी मदद करते हैं।
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