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फैट है आपके शरीर के लिए फायदेमंद या ख़राब ?

जी हां, सभी तरह के फैट्स आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते।

अगर आप किसी आम आदमी से वसा से स्वास्थ्य को होने वाले फायदे के बारे में पूछेंगे, तो शायद वह आप पर हंसे। वसा से शरीर को होने वाले नुकसान के बारे में वह आपको लेक्चर भी दे सकता है। हम सभी जानते हैं कि अधिक मात्रा में वसा लेना नुकसानदायक है। लेकिन इसके साथ ही आपको यह भी पता होना चाहिए कुछ फैट्स ऐसे होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद भी हैं। एएके कमानी प्राइवेट लिमिटेड की टेक्निकल हेड मिस गौरी अय्यर संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए वसा के महत्व के बारे में यहां बता रही हैं। लेकिन इससे पहले आपको अच्छे और खराब वसा के बारे में जानना जरूरी है।

क्या है अच्छा और खराब वसा : वसा दोनों अच्छे और खराब तरह के होते हैं इसलिए इन दोनों के बीच के अंतर को समझना काफी महत्वपूर्ण है और फिर आपको यह निर्णय लेना है कि आप इसका सेवन करना चाहते हैं या नहीं। फैट्स चार तरह के होते हैं इसमें मोनो अनसैचुरेटेड फैट्स (MUFA) और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट्स (PUFA) को अच्छे फैट्स की श्रेणी में रखा जाता है वहीँ ट्रांस फैट्स और सैचुरेटेड फैट्स(SAFA) को खराब वसा की श्रेणी में रखा गया है।

माना जाता है कि एमयूएफए बॉडी में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में मदद करता है। पीयूएफए भी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है लेकिन बहुत अधिक मात्रा में इसके सेवन से अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी कम होने लगती है। वहीं दूसरी ओरसैचुरेटेड फैट्स की ज्यादा मात्राएलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त ट्रांस फैट्स जो हाइड्रोजनीकरण की प्रक्रिया के दौरान बनते हैं, एलडीएल स्तर में वृद्धि करते हैं जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एमयूएफए युक्त खाद्य पदार्थ जैसे ऑलिव, कैनोला, मूंगफली का तेल और पीयूएफए युक्त पदार्थ जैसे मकई, सूरजमुखी, सोयाबीन और सनफ्लावर ऑयल अपने आहार में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि वे लाभदायक वसा हैं और हृदय रोग के जोखिम को कम करते हैं।

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वसा के फायदे:

ऊर्जा प्रदान करता है : अधिकांश लोगों का मानना है कि कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर के लिए ऊर्जा प्रदान करने का एकमात्र साधन है। एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट चार कैलोरी ऊर्जा प्रदान करता है, जबकि एक ग्राम वसा नौ कैलोरी प्रदान करता है, जोकि लगभग उसका दोगुना है। यह सलाह दी जाती है कि 1,800 कैलोरी आहार में कुल ऊर्जा का 20-30% हमें तेल और वसा से मिलना चाहिए। तेल और वसा जिसे तुरंत ऊर्जा के रूप में उपयोग नहीं किया जाता है, कोशिकाओं में संग्रहीत होता है और बाद में जब शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है तो इसी से प्राप्त की जाती है।

विटामिन के अवशोषण में सहायक : वसा में घुलनशील विटामिन जैसे विटामिन ए, डी, ई, और के बेहद महत्वपूर्ण हैं और हमें प्रतिदिन इसकी आवश्यकता होती है। ये विटामिन स्टोरेज और अवशोषण के लिए वसा पर निर्भर करते हैं। विटामिन ए हमारी आँखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है, विटामिन डी हमारे हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है, विटामिन ई फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रल कर देता है और विटामिन के रक्त का थक्का बनने में सहायता करता है। शरीर में विटामिन को अवशोषित होने के लिए फैट का होना बहुत ज़रूरी है।

शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार: तेल और वसा हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं। खासतौर पर सैचुरेटेड फैटी एसिड बॉडी की इम्युनिटी पॉवर बढ़ाने में बहुत प्रभावी हैं साथ ही इनमें एंटीफंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इनफ्लैमेटरी क्षमताएं भी होती है जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी हैं।

त्वचा और आंखों की नमी बरकरार रहती है: सैचुरेटेड फैटी एसिड शरीर के ल्यूब्रिकेशन को सुधारने में भी मदद करते हैं। शरीर में ओमेगा -3 और ओमेगा -6 फैटी एसिड की कमी से त्वचा और आँखें सूखने लगती हैं। इसलिए शरीर में नमी की मात्रा को नियंत्रित रखने के लिए इन वसा का सेवन बहुत ज़रूरी है। डाइट में उन चीजों को शामिल करें जिसमें ओमेगा-3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड की पर्याप्त मात्रा हो।

ब्लड में हार्मोन का स्तर संतुलित रखता है : शरीर के लिए वसा की सही मात्रा और गुणवत्ता आवश्यक होती है क्योंकि वसा हमारे शरीर के हार्मोन बनाने में भी मदद करती है। तेल और वसा हमारे शरीर के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पदार्थों सहित प्रोस्ट्रैग्लैंडीन और हार्मोन जैसी पदार्थों के संरचनात्मक घटक होते हैं जो शरीर के कई कार्यों को नियंत्रित करते हैं। एसेंशियल फैटी एसिड फैट बर्निंग की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं और मेटाबोलिज्म रेट को बढ़ाने में मदद करते हैं। डायबिटीज के मरीजों में यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में भी मददगार हैं।

दिमाग के सही तरीके से काम करने में सहायक : ऑस्टियोपोरोसिस की जांच और मस्तिष्क के सही तरीके से काम करने में सहायता करने के लिए सैचुरेटेड फैटी एसिड को अत्यंत प्रभावी पाया गया है। हमारा दिमाग कोलेस्ट्रॉल और आवश्यक फैटी एसिड से बना होता है, आवश्यक फैटी एसिड की कोई कमी दिमाग की गतिविधि को कम कर सकती है जो कि दिमाग के सभी प्रकार के चेतन और अवचेतन कार्यों को करने में मदद करता है। इतना ही नहीं, तेल या वसा मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करने का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है।

कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग के खतरे को कम करता है : वे लोग जो ओमेगा 3 युक्त चीजें जैसे कि मछली, फ्लेक्ससीड्स या फ्लेक्सीसीड तेल का सेवन करते हैं उनके शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। शुगर और कार्बोहाइड्रेट के सेवन को कम करके ट्राइग्लिसराइड लेवल और हृदय रोगों के जोखिम को आसानी से कम किया जा सकता है। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल युक्त सैचुरेटेड फैट्स जैसे कि एग फैट्स और नारियल तेल हृदय रोगों के जोखिम को कम करता है और एंटीऑक्सिडेंट गुणों के कारण ब्लड में इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा इनके सेवन से हाइपरटेंशन के मरीजों का ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है।

ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना कम होती है: रिसर्च से इस बात कि पुष्टि हुई है कि जो लोग हेल्दी ऑयल और फैट्स का सेवन कम करते हैं उनमें ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना काफी ज्यादा होती है। हालांकि जिन लोगों ने अपनी डाइट में फिश ऑयल, फ्लेक्ससीड या ओमेगा-3 से भरपूर चीजों का सेवन अधिक मात्रा में किया उनमें जोड़ों के दर्द और जकड़न की समस्या से काफी राहत मिली।

फर्टिलिटी में सुधार : प्रजनन क्षमता पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए एक बड़ी चिंता है और दोनों मेंप्रजनन हार्मोन एसेंशियल फैट्स से ही बने होते हैं। एसेंशियल फैट्स की कमी से महिलाओं में अनियमित माहवारी और मेनोपॉजऔर पुरुषों में मेल हार्मोन में परिवर्तन होने लगता है जिससे पुरुष और महिला दोनों की प्रजजन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

वजन कम करने में मददगार : हाल में हुए रिसर्च में पाया गया है कि संतुलित आहार के साथ ओमेगा -3 फिश ऑयल, फ्लेक्सीसीड ऑयल या ओमेगा- 3 के किसी भी शाकाहारी स्रोत का उपयोग वजन घटाने में मदद करता है। यह स्पष्ट है कि तेल और वसा शरीर के मेटाबोलिज्म रेट को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। भोजन में शामिल किए जाने वाले वसा की मात्रा के बजाय उसकी गुणवत्ता पर ज़ोर देना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण कारक यह है कि हमें अपने खाने की आदतों के बारे में पता होना चाहिए और यह हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करता है यह भी जानना जरूरी है।  तेल, वसा, कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन किसी भी चीज की ज़रूरत से ज्यादा मात्रा का सेवन आपके लिए नुकसानदायक ही है इसलिए फैट्स का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करें।

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अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock

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