... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Yogita Yadav | Published : April 10, 2019 6:30 PM IST
अमूमन लोग यह मानते हैं कि मालिश यानी मसाज सिर्फ सर्दियों में ही करवानी चाहिए, यह असल में तथ्य नहीं केवल प्रचलन है। © Shutterstock.
हर मौसम की अपनी कुछ जरूरतें और फायदे होते हैं। इन्हीं के मद्देनजर इस मौसम के नियम तय होते हैं। आयुर्वेद में अभ्यांगम यानी मसाज को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। आयुर्वेद में हर रोज शरीर की मालिश करने की सलाह दी गई है। पर ज्यादातर लोगों को लगता है कि मालिश सिर्फ सर्दियों में ही करवानी चाहिए। क्या वाकई मालिश का मौसम से कोई ताल्लुक है ? आइए जानते हैं विस्तार से।
यह भी पढ़ें - कॉलेज पहुंचकर कहीं आप तो नहीं हो रहे ‘फ्रेशमैन 15’ के शिकार
क्यों जरूरी है मालिश
आयुर्वेद में दैनिक नियमों में मालिश को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। वहां हर रोज मालिश यानी मसाज करने की सलाह दी गई है। जब आप बहुत थक जाते हैं तब मालिश आपको फिर से तरोताजा करने में मदद करती है। इससे मालिश मांसपेशियो की सिकुड़ने और फैलने की क्षमता में बढोत्तरी करती है। मेटाबॉलिजम को सही रखने में भी मालिश का बहुत अहम योगदान है।
यह भी पढ़ें – विश्व स्वास्थ्य दिवस 2019 : ये हैं सेहत के वे पांच दुश्मन जिनसे आपको लड़ना है
और भी हैं फायदे
यह भी पढ़ें – विश्व स्वास्थ्य दिवस 2019 : इन दस कारणों से आपको आज ही छोड़ देनी चाहिए शराब
क्या मालिश का मौसम से कोई ताल्लुक है ?
अमूमन लोग यह मानते हैं कि मालिश यानी मसाज सिर्फ सर्दियों में ही करवानी चाहिए। यह तथ्य नहीं केवल प्रचलन है। लोग सर्दियों में सेहत के प्रति ज्यादा सजग होते हैं इसलिए इन दिनों में वे पार्लर में बॉडी या हेयर मसाज करवाना पसंद करते हैं। जबकि मालिश हर मौसम में शरीर के लिए जरूरी है। असल में मसाज का काम शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त कर शरीर को चुस्ती फुर्ती प्रदान करना है। इसलिए मौसम कोई भी हो अगर आप तरोताजा रहना चाहते हैं तो मसाज यानी मालिश को अपने रूटीन में शामिल करें।