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फिटनेस लेवल की जांच करने के लिए अपनाया जाने वाला यो यो टेस्ट भारतीय क्रिकेट टीम में हाल ही में अनिवार्य कर दिया गया है। भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयन अब उन्हीं खिलाड़ियों का होगा जो यो यो टेस्ट पास कर पाएंगे। यो-यो फिटनेस टेस्ट में ऐसा क्या होता है कि यह इतना महत्वपूर्ण हो गया है। खिलाड़ियों का फिटनेस लेवल वैसे भी ठीक रहता है लेकिन यो यो टेस्ट फिटनेस में कई खिलाड़ी फेल हो जाते हैं। हम यहां इस बारे में चर्चा कर रहे हैं कि आखिर में यो यो टेस्ट क्या है ?
यो यो टेस्ट एक तरह से 20 मीटर की दूर पर बनी दो लाइनों के बीच दौड़ने की प्रक्रिया को कहते हैं। इस दौड़ को पूरा करने के लिए निश्चित समय और अलग-अलग समय में कुछ अलग स्टेप लेने के लिए कहा जाता है।
यो-यो फिटनेस टेस्ट देने के लिए खिलाड़ी को 20 मीटर की दूरी पर बनी दो लाइनों के बीच दौड़ना होता है और जब बीप या सीटी बजती है तो उसे तुरंत मुड़ना होता है। मुड़ने के दौराना आपको दोड़ की तेजी को कंट्रोल करना होता है और फिर तुरंत वापस भी दौड़ना होता है। खिलाड़ी को हर एक मिनट पर अपने दौड़ने की गति को तेज करना होता है या जो समय तय किया गया होता है उस तय समय पर अपनी गति को बढ़ाना होता है।
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अगर खिलाड़ी तय समय पर दोड़ पूरी नहीं कर पाता है तो उसे एक मौका और देते हुए 2 और बीप के बाद तेज दौड़ना पड़ता है और जब बीप फिर से बजे तो वापस मुड़ना होता है। अगर इसके बाद भी खिलाड़ी तय समय पर दोनों छोरों पर नहीं पहुंच पाता है तो उसे यो-यो फिटनेस टेस्ट से बाहर कर दिया जाता है।
यो-यो फिटनेस टेस्ट एक साफ्टवेयर आधारित प्रक्रिया है। यो-यो फिटनेस टेस्ट में खिलाड़ी के नतीजों को रिकॉर्ड किया जाता है। यो-यो फिटनेस टेस्ट के अलग-अलग लेवल होते हैं। खिलाड़ी को फिटनेस टेस्ट पास करने के लिए अलग-अलग लेवल के लिए तय मानक को पाना होता है।
यो-यो फिटनेस टेस्ट में कुल 23 लेवल होते हैं। वैसे तो सामान्य इंसान के लिए शुरूआत से ही टेस्ट करना पड़ता है लेकिन खिलाड़ियों के लिए पांचवे लेवल से शुरुआत की जाती है। पांचवे और नौवे लेवल पर एक शटल होता है जबकि 11 वें लेवल पर स्पीड लेवल 2 शटल होते हैं। जो खिलाड़ी 12वें और 13वें लेवल पर पहुंच जाता है उसके लिए शटल की संख्या 3 हो जाती है। अगर अभी तक के इतिहास की बात करें तो कोई भी खिलाड़ी 23वें लेवल तक नहीं पहुंच पाया है।
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शटल की संख्या के साथ दूरी भी बढ़ जाती है। हर शटल के बीच खिलाड़ी को 40 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यो-यो फिटनेस टेस्ट में अलग-अलग लेवल पर गति भी अलग-अलग तय होती है। दो शटल के बीच की दूरी तय करने के लिए खिलाड़ी को 10 सेकेंड का समय दिया जाता है।
यो-यो फिटनेस की शुरुआत यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्टियल में ल्यूक लेगर नामक व्यक्ति ने की थी। ल्यूक लेगर के यो-यो फिटनेस टेस्ट को लोकप्रियता शताब्दी के अंत में ज्यादा मिली। शुरुआत में यह 20 मीटर की दूरी में खिलाड़ी लगातार 12 मिनट तक तेज दौड़ लगाता था। पहले यह क्रिकेट में सबसे उपयुक्ट फिटनेस टेस्ट माना जाता था। पहले इस फिटनेस टेस्ट में 30 सेकेंड के अंदर बॉल फेंकन, थ्रो फेंकना, हिट लगाकर दौड़ना शामिल था।
हेल्थ एक्सपर्ट्स और फिजियोथेरेपिस्ट्स के अनुसार यो-यो फिटनेस टेस्ट आसान टेस्ट नहीं होता है। यो-यो फिटनेस टेस्ट खिलाड़ियों के लिए बेहतर टेस्ट होता है। सामान्य लोगों के लिए यह टेस्ट बहुत ही मुश्किल होता है। यो-यो फिटनेस टेस्ट खिलाड़ियों की फिटनेस बहुत हाई कर देता है। इस टेस्ट से गुजरने वाले खिलाड़ी प्रदर्शन तो बेहतर करते ही है साथ में खेल में लगने वाली चोट से भी बचते हैं। यो-यो फिटनेस टेस्ट से खिलाड़ियों का रनिंग लेवल हाई हो जाता है।
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सामान्य लोगों को इस फिटनेस टेस्ट में भाग नहीं लेना चाहिए। जब आप पूरी तरह से फिट हों और आपका शरीर सही शेप में हो तभी इस फिटनेस टेस्ट में भाग लेना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स की माने तो जो खिलाड़ी थोड़े समय में तेजी से प्रदर्शन करते हैं उनके लिए यो-यो फिटनेस सबसे अच्छा होता है। जैसे कम समय में तेज दौड़ या क्रिकेट में 20-20 मैच में थोड़े समय में जल्द रियेक्शन देना।