... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Published : October 5, 2017 1:04 PM IST
जिम जाने वाले लोगों के बीच केटोजेनिक डायट काफी लोकप्रिय है। इसमें कम कार्बोहाइड्रेट और फैट अधिक होता है जो वजन कम करने के लिए प्रभावी होता है और बॉडी में एसिडिटी लेवल कम करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इस डायट को लेने से आपके शरीर का क्या होता है? आमतौर पर जब कार्बोहाइड्रेट उपलब्ध होता है, तो आपका शरीर ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। हालांकि, जब आपके शरीर में कार्बल्स उपलब्ध नहीं होते हैं, तो आपका शरीर फैट को तोड़ना और केटोन के रूप में ईंधन स्रोत को परिवर्तित करना शुरू कर देता है। फोर्टिस हेल्थकेयर में एंडोक्रोबोलॉजिस्ट डॉक्टर निर्मला झा आपको बता रही हैं कि केटोजेनिक डायट लेने से क्या होता है।
1) सिरदर्द और मतली
जब आप कार्बोहाइड्रेट से फैट की तरफ जाते हैं, तो इसके कई इफेक्ट्स नजर आते हैं। सिरदर्द, मतली, मांसपेशियों में ऐंठन इसके साइड इफेक्ट्स में से कुछ हैं।
2) कब्ज
अगर आपको डायट से फाइबर और पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं, तो आपको पाचन की समस्या हो सकती है। कम फाइबर की वजह से कब्ज एक आम समस्या है। कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें जैसे आलू, क्विनोआ और फल नहीं खाने से भी कब्ज हो सकता है।
3) थकान
इस डायट को लेने के दौरान आप थोड़ी सुस्ती और थकान महसूस कर सकते हैं। हालांकि जब आपका शरीर इसका आदि हो जाएगा, तो आपको स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के दौरान कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।
4) सांस की बदबू
एसिटोन लीवर में उत्पादित केटोन पदार्थ में से एक है जो सांस की बदबू का कारण बनता है। इसलिए यदि आप केटो डायट पर हैं, तो आपको सांस की बदबू का अनुभव हो सकता है।
5) इलेक्ट्रोलाइट में गड़बड़ी
लो-कार्ब डायट को इलेक्ट्रोलाइट हानि का कारण भी माना जाता है, जिससे आपको मांसपेशियों में ऐंठन और थकान हो सकती है। इसलिए आपको ईद डायट के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
6) विटामिन और पोषण तत्वों की कमी
इस डायट में कम कैल्शियम, मैग्नीशियम और एमिनो एसिड होते हैं। इसके अलावा, आप विटामिन बी 12 और विटामिन डी की कमी से पीड़ित भी हो सकते हैं। केटोजेनिक डायट के दौरान लगभग 2-5 फीसदी रोगियों में विटामिन की कमी का पता चला है।
7) भूख में कमी
प्रोटीन का अधिक सेवन करने से आप दिनभर भरा हुआ महसूस करते हैं। यह डायट आपकी भूख को मारती है और आपको कम भूख लगती है।
इस बात का रखें ध्यान
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो लो-कार्बोहाइड्रेट ब्लड शुगर में उपयोगी हो सकता है लेकिन इसे खाने में कोई भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। यदि आपके पास जठरांत्र संबंधी समस्याएं हैं, तो फाइबर की कमी एक समस्या हो सकती है।
वजन घटाने के लिए
शोर्ट टर्म के लिए किस डायट का इस्तेमाल करने से वजन घटाने में जरूर मदद मिलती है। लेकिन इसकी बड़ी समस्या यह है कि आपको जीवनशैली में अचानक बदलाव की जरूरत होती है। इस बदलाव से शरीर में पानी का वजन कम होता है और जब आप नॉर्मल डायट लेना शुरू करते हैं, तो वजन कम करना मुश्किल हो जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग एक बार में 50 से 100 मील की दूरी पर दौड़ते थे, उन्हें अधिक फैट बर्न करने में मदद मिली। उन्होंने अपनी डायट के कार्बोहाइड्रेट की खपत को 10 फीसदी कम किया यानी वो कार्बोहाइड्रेट से केवल 200 कैलोरी ले रहे थे जो केवल 2 ब्रेड से मिल जाती है।
Read this in English
अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock
संदर्भ- [1] Jeff S. Volek a, b, Daniel J. Heidenreich, b, Catherine Saenz a, b, Laura J. Kunces Metabolic characteristics of keto-adapted ultra-endurance runners, Metabolism, 100-110, 2016