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सुबह उठना चाय पीना, नहाना, तैयार होना और तुरंत ऑफिस चले जाना। 9 से 10 घंटे ऑफिस में काम करने के बाद घर लौटना और उसके बाद घर के काम समेट कर सो जाना।
बिजी लाइफ में अगर आपका भी यही शेड्यूल है, तो रुक जाइए। क्योंकि इस तरह की लाइफस्टाइल आपको बीमार कर सकती है। ऐसी लाइफ के कारण बीमारियों से बचाव करने के लिए आपको रोजाना सिर्फ 1 किलोमीटर चलना चाहिए। रोजाना सिर्फ 1 किलोमीटर चलना सुनने में भले ही बहुत छोटा कदम लगे, लेकिन इसके फायदे बेहद बड़े हो सकते हैं। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां लोगों के पास लंबे वर्कआउट के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है, वहीं 1 किलोमीटर की रोजाना वॉक एक आसान, व्यावहारिक और असरदार आदत बन सकती है।
शारदाकेयर-हेल्थसिटी के इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. चिराग टंडन (Dr. Chirag Tandon, Director, Internal Medicine, ShardaCare-Healthcity) का कहना है कि रोजाना सिर्फ 1 किलोमीटर वॉक करने से शरीर एक्टिव तो रहता ही है, बल्कि मन शांत और दिमाग भी तरोताजा महसूस करता है।आइए जानते हैं रोजाना सिर्फ 1 किलोमीटर वॉक करने से शरीर को क्या-क्या फायदे मिलते हैं।
नियमित रूप से 1 किलोमीटर चलने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। इससे ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
यह बात सुनने में थोड़ी सी अजीब लग सकती है, लेकिन रोजाना सिर्फ 1 किलोमीटर वॉककरके आप वजन को घटा सकते हैं। डॉ. चिराग टंडन बताते हैं कि रोजाना 1 किलोमीटर वॉक करने से मेटाबॉलिज्म एक्टिव होता है। इससे कैलोरी को तेजी से बर्न करने में मदद मिलती है और वजन कंट्रोल में रहता है।

दिन में लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठकर काम करने से अक्सर मानसिक तनाव की समस्या देखी जाती है। जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, छोटी-सी वॉक भी शरीर पर जमे तनाव को कम करने में फायदेमंद होती है। रोजाना सिर्फ 1 किलोमीटर वॉक करने से तनाव, डिप्रेशन और एंजाइटी के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।
एक्सपर्ट का कहना है कि रोजाना 1 किलोमीटर वॉक करने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। सुबह या शाम की हल्की वॉक तनाव, चिंता और थकान को कम कर सकती है। इससे मूड बेहतर होता है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है और व्यक्ति खुद को पहले से ज्यादा एक्टिव महसूस करता है।
नियमित रूप से चलने पर जोड़ों और पैरों की गतिशीलता बनी रहती है। रोजाना 1 किलोमीटर वॉक करने से पैरों की मांसपेशियां एक्टिव रहती हैं। इससे उम्र बढ़ने पर होने वाली जोड़ों के दर्द की परेशानी कम होती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पहले से ही जोड़ों में दर्द की परेशानी है, तो उन्हें कम उम्र में ही रोजाना वॉक करनी चाहिए।
डॉ. चिराग टंडन का कहना है- सबसे खास बात यह है कि 1 किलोमीटर चलने के लिए किसी विशेष उपकरण, जिम सदस्यता या कठिन ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती। बस नियमितता और इच्छाशक्ति चाहिए। छोटे-छोटे कदम ही लंबे समय में बड़े बदलाव लाते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति अपनी सेहत में सुधार की शुरुआत करना चाहता है, तो रोजाना 1 किलोमीटर चलना एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी शुरुआत हो सकती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।