इन 4 तरीकों से सोना है आपकी सेहत के लिए फायदेमंद!

आयुर्वेदिक वैक्सिनेशन के लिए सोना इस्तेमाल किया जाता है।

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Written By: Editorial Team | Published : October 19, 2017 10:27 PM IST

सोने का आकर्षण पूरी दुनिया के लोगों को सदियों से है। सदियों से हम मनुष्यों को इस पीली अनमोल चमकीली धातु से बहुत प्यार है।जिसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है लेकिन यह कीमती धातु सिर्फ आपके शरीर की सजावट भर के काम की नहीं है। इसके और भी कई फायदे हैं। उपचार में स्वर्ण के फायदे 5000 साल पहले ही लोगों को पता चल चुकी थी। जब प्राचीन मिस्र के लोग शरीर, मन और आत्मा के शुद्धिकरण के लिए सोने का सेवन करते थे। 2500 ईसा पूर्व से, ओरिएंटल साहित्य में नियमित रूप से दवाइओं के निर्माण में सोने के इस्तेमाल की जानकारी दी गयी है। सेहत के लिहाज से अपने फायदों के लिए आयुर्वेद में स्वर्ण को बहुत अहमियत है। हमने सोने के लाभों के बारे में बता रहे हैं इंटिग्रल आयुर्वेद से आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. मानन गांधी।

"गोल्ड या सोना एक बहुत सुरक्षित धातु है। यह आसानी से पच जाता है और आसानी से अवशोषित हो सकता है। यह इतना सौम्य है कि इसे एक-दिन के बच्चे को भी दिया जा सकता है,” डॉ. गांधी ने बताया। उन्होंने यह भी बताया कि सोने को उसके धातु वाले रूप में नहीं खाया जाता है। यह आमतौर पर ऑक्सेलेट्स या कार्बोनेट करके इस्तेमाल किया जाते हैं। विषाक्तता या टॉक्सिसिटी की जांच के बाद ही खाने के उपयोग किया जाता है।

दिमाग के विकास में मददगार

पुराने ज़माने में कहा जाता था कि सोना मस्तिष्क के विकास में मदद करता है। शायद यही कारण है कि सोने का इस्तेमाल स्वर्ण प्राशन में किया जाता है, जो एक आयुर्वेदिक नुस्खा है, जो 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दिया जाना था। इस नुस्खे के कई फायदे हैं, जिनमें से एक छोटे बच्चों के दिमाग के विकास में सहायता करना भी है। डॉ. गांधी का कहना है कि, "दरअसल, आयुष मंत्रालय ने भी जनता के फायदे के लिए 50 रुपये की सब्सिडी वाली दर से इसे बेचने का आदेश दिया है।" आचार्य कश्यप ने खुद बताया था कि सोना बुद्धि, पाचन, मेटाबॉलिज़्म, शक्ति, रोगप्रतिरोधक शक्ति, रंग, फर्टिलिटी और लंबी ज़िंदगी में सुधार करने में मदद कर सकता है।

आयुर्वेदिक वैक्सिनेशन के लिए सोना इस्तेमाल किया जाता है  

डॉ. गांधी कहते हैं, "पुराने समय में, स्वर्ण प्राशन को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया था।" यह नुस्खा मानव शरीर में रोगप्रतिरोधक कार्यों को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, और जब वैक्सिनेशन का आविष्कार नहीं हुआ था तब यह बच्चों बच्चों को उनकी रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए दिया जाता था। "इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गोल्ड को अन्य तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाता था। बच्चे के कानों में सोने की मदद से छेद किया जाता था जिसे कर्णवेध संस्कार कहते थे और ऐसा कहा जाता है कि इससे रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती थी।"

सोना उपचार में तेज़ी लाता है

"सोने की सबसे विशेष बात है इसकी वह बेमिसाल ताकत है; जो किसी भी अन्य दवा की तुलना में शरीर को तेज़ी से प्रभावित करता है, "डॉक्टर बताते हैं। "दरअसल जब गोल्ड या सोना एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है तो दवाएं तेज़ी से काम करती है।" अब सोने के नैनोपार्टिकल्स (nanoparticles) का इस्तेमाल कैंसर के उपचार में दवा वाहक, फोटोथर्मल एजेंट (photothermal agents), विपरीत एजेंट और रेडियोसेंसीटाइज़रर्स के रूप में किया जा रहा है।1 डॉ. गांधी एक उदाहरण देते हुए कहते हैं, एलर्जी से परेशान एक 15 वर्षीय मरीज़ में 3-4 महीने इलाज़ के बाद भी कोई सुधार नहीं दिख रहा था। उन्होंने कहा, "मैंने अपनी दवाओं में स्वर्ण भस्म शामिल किया और उसमें तेज़ रिकवरी देखने को मिली।"

सोना एंटी-एजिंग है

हम जब एंटी-एजिंग कहते हैं, तो इसका मतलब कम कॉस्मेटिक्स और लंबी उम्र और बेहतर गुणवत्ता वाले जीवन से होता है। "स्वर्ण भस्म आपको अपने जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करता है। यह आपकी उम्र बढ़ाने का काम करता है, "डॉक्टर ने बताया। यही कारण है कि सोने का इस्तेमाल दवाओं की जेरियाट्रिक शाखा (geriatric branch) में भी किया जाता है। सोने के सेवन से आपकी उम्र जल्दी नहीं बढ़ती और शरीर को बूढ़ा नहीं होने देता, और इससे आपको अपनी ज़िंदगी अच्छी तरह जीने में मदद मिलती है।

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अनुवादक: Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत : Shutterstock Images.

संदर्भ-1. Paul, W., & Sharma, C. P. (2011). Blood compatibility studies of Swarna bhasma (gold bhasma), an Ayurvedic drug. International Journal of Ayurveda Research2(1), 14–22. https://doi.org/10.4103/0974-7788.83183

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