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Written By: Yogita Yadav | Published : February 26, 2019 6:07 PM IST
सूर्य नमस्कार मन शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है, हर रोज सूर्य नमस्कार करनेे से बच्चों की सहनशक्ति बढ़ती है और परीक्षा के दिनों की चिंता और असहजता कम होती है। © Shutterstock
इन दिनों एग्जाम चल रहे हैं। ज्यादातर बच्चों को यह शिकायत होती है कि वे चाहकर भी एग्जाम में अपने सब्जेक्ट पर फोकस नहीं कर पाते। इसकी सबसे बड़ी वजह है ध्यान केंद्रित कर सकने की क्षमता का अभाव। इसके लिए विशेषज्ञ सूर्य नमस्कार करने की सलाह देते हैं। पर सवाल यह उठता है कि आखिर किस समय किया जाए सूर्य नमस्कार, जिससे इसका भरपूर लाभ तन और मन को मिल सके।
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सूर्य नमस्कार के लाभ
श्री श्री रवि शंकर कहते हैं मणिपुर चक्र में ही हमारे भाव एकत्रित होते है और यही वो स्थान है जहाँ से अंतःप्रज्ञा विकसित होती है। सामान्यतया मणिपुर चक्र का आकार आँवले के बराबर होता है, लेकिन जो योग ध्यान के अभ्यासी हैं उनका मणिपुर चक्र 3 से 4 गुना बड़ा हो जाता है। जितना बड़ा मणिपुर चक्र उतनी ही अच्छी मानसिक स्थिरता और अन्तर्ज्ञान हो जाते हैं।
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दिन का प्रारंभ सूर्य नमस्कार से करें
सूर्य नमस्कार में 12 आसन होते हैं। इसे सुबह के समय करना बेहतर होता है। सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचरण बेहतर होता है, स्वास्थ्य बना रहता है और शरीर रोगमुक्त रहता है। सूर्य नमस्कार से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर शरीर के सभी अंगो को लाभ मिलता है। सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक शरीर के सभी अंगो को बहुत लाभान्वित करता है।
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सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचरण बेहतर होता है। © Shutterstock
शाम के समय भी कर सकते हैं अभ्यास
अमूमन यह देखने में आता है कि बच्चे सुबह के समय स्कूल-कॉलेज जाने में व्यस्त होते हैं। आदत कई बार इस तरह की बन जाती है कि छुट्टी वाले दिन भी बच्चे सुबह उठना नहीं चाहते। इसमें भी ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप सूर्योदय के समय सूर्य नमस्कार नहीं कर पा रहे हैं तो सूर्यास्त से पहले का समय भी चुन सकते हैं। बस इस दौरान कुछ खाया नहीं होना चाहिए। खासतौर से बच्चों के लिए यह समय तनावमुक्त होता है। शाम के समय सूर्य नमस्कार करके बच्चे अपना फोकस बढ़ा सकते हैं।
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बढ़ता है फोकस
सूर्य नमस्कार के आसन हल्के व्यायाम और योगासनो के बीच की कड़ी की तरह है और खाली पेट कभी भी किए जा सकते हैं। हालाँकि सूर्य नमस्कार के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह मन व शरीर को ऊर्जान्वित कर तरो ताज़ा कर देता है और दिनभर के कामो के लिए तैयार कर देता है। यदि यह दोपहर में किया जाता है तो यह शरीर को तत्काल ऊर्जा से भर देता है, वहीं शाम को करने पर तनाव को कम करने में मदद करता है। यदि सूर्य नमस्कार तेज गति के साथ किया जाए तो बहुत अच्छा व्यायाम साबित हो सकता है और वजन कम करने में मदद कर सकता है।
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सूर्य नमस्कार करनेे से सहनशक्ति बढ़ती है और परीक्षा के दिनों की चिंता और असहजता कम होती है। © Shutterstock
पढ़ाई के लिए जरूरी है सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार मन शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। आजकल बच्चे महती प्रतिस्पर्धा का सामना करते है। इसलिए उन्हे नित्यप्रति सूर्य नमस्कार करना चाहिए क्योंकि इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ती है और परीक्षा के दिनों की चिंता और असहजता कम होती है। सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में शक्ति और ओज की वृद्धि होती है। यह मांसपेशियों का सबसे अच्छा व्यायाम है और हमारे भविष्य के खिलाड़ियों के मेरुदण्ड और अंगो के लचीलेपन को बढ़ता है।
महिलाओं के लिए भी है लाभदायक
सूर्य नमस्कार वो कर सकता है, जो महीनो के संतुलित आहार से भी नही हो सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत महिलाओं के लिए यह एक वरदान है। इससे आप न केवल अतिरिक्त कैलोरी कम करते है बल्कि पेट की मांसपेशियो के सहज खिंचाव से बिना खर्चे सही आकार पा सकते हैं। सूर्य नमस्कार के कई आसन कुछ ग्रंथियो को उत्तेजित कर देते हैं, जैसे की थाईरॉड ग्रंथि (जो हमारे वजन पर ख़ासा असर डालती है) के हॉर्मोने के स्राव को बढ़ाकर पेट की अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करते हैं। सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास महिलाओं के मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करता है और प्रसव को भी आसान करता है। साथ ही ये चेहरे पर निखार वापस लाने में मदद करता है, झुर्रियों को आने से रोकता है और हमे चिरयुवा और कांतिमान बनाता है।