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Written By: Anshumala | Published : June 26, 2018 6:57 PM IST
अक्सर लोग ऑफिस में घंटों काम करने के दौरान पांच-छह कप चाय और कॉफी पी जाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इससे मूड फ्रेश होता है, काम करने में मन लगता है। साथ ही ब्रेन पावर बूस्ट होती है, लेकिन अधिक चाय-कॉफी पीना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है। यदि आप चाय-कॉफी पिए बिना थका-थका सा महसूस करते हैं, काम में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते और लगता है कि दिमाग काम नहीं कर रहा, तो अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव लाकर देखें। आप फ्रेश मूड से ऑफिस में काम करने लगेंगे। ये कुछ ऐसी आदतें हैं, जो आपके ब्रेन पावर को बूस्ट करने में मददगार हैं।
नाश्ता स्किप न करें
प्रतिदिन नाश्ता करेंगे, तो शॉर्ट टर्म मेमोरी और ध्यान लगाने की अवधि में सुधार होता है। कई अध्ययन इस बात को साबित कर चुके हैं कि जो लोग प्रत्येक दिन भरपूर नाश्ता करते हैं, वे काम के दौरान बेहतर परफॉर्म करते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, जो लोग नाश्ता करते हैं, वे फाइबर और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स युक्त स्वास्थयवर्धक डायट का सेवन करते हैं। जो नाश्ता नहीं करते हैं, उनमें धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन करने की आदत अधिक होती है। ऐसे लोग एक्सरसाइज भी कम करते हैं। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और फैट इन तीनों मैक्रोन्यूट्रीएंट्स समूह के अंतर्गत आने वाले खाद्य पदार्थों को नाश्ते में जरूर शामिल करें।
कॉफी की जगह पिएं ग्रीन टी
सुबह कॉफी पीने की आदत है, तो इस आदत को बदल दें। इसके बदले ग्रीन टी पिएं। ग्रीन टी ऊर्जावान बनाता है। इससे ध्यान भी बढ़ता है। माचा एक प्रकार का एशियन ग्रीन टी पाउडर होता है। सुबह यदि कॉफी पीते हैं, तो माचा पाउडर से बनी चाय या अन्य ड्रिंक पिएं। इसमें भी कैफीन होता है, लेकिन यह ऊर्जा को बढ़ाता है। इसमें एन्टीऑक्सीडेंट का डोज होता है, जो कोशिकाओं और डीएनए को क्षतिग्रस्त होने से बचाने का काम करता है। इसमें अमीनो एसिड एल-थिएनाइन होता है, जो कैफीन से होने वाले नकारात्मक असर जैसे व्यग्रता व तनाव को दूर करता है।
ऑयली मछली शामिल करें डायट में
कई अध्ययनों में यह पता चला है कि अपने आहार में ओमेगा-3 फिश ऑयल शामिल करने से ध्यान लगाने की क्षमता बूस्ट होती है। यह दिमागी क्रियाकलापों को करने के दौरान मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह को भी बढ़ाने की योग्यता रखता है। 2011 में हुए अध्ययन में यह पाया गया था कि ओमेगा-3 फैटी एसिड जो मछली में पाया जाता है जैसे सैलमन और सीफूड याद्दाश्त के कार्यों को लगभग 15 प्रतिशत तक बूस्ट करता है। फैटी एसिड युक्त डाइट भी डेमेंशिया और स्ट्रोक्स के खतरे को कम करने के साथ ही मानसिक ह्रास को भी रोकता है।
नट्स का सेवन करें जमकर
नट्स और सीड्स विटामिन ई के बेहतर स्रोत हैं। एक शोध में यह बात सामने आई है कि नट्स उम्र बढ़ने के साथ याद्दाश्त और ज्ञानात्मक कमी को बहुत हद तक कम करता है। 2012 में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि खास तौर से अखरोट उम्र से संबंधित मानसिक खराबी या विकृति को कम कर देता है। बादाम और काजू को हल्का दरदरा कर लें। इसे नाश्ते में दलिया या अनाज के साथ मिलाकर खाएं। चाहें तो बिना नमक मिले नट्स को सुबह में बतौर स्नैक्स के रूप में खा सकते हैं।
पर्याप्त सोना भी है जरूरी
एक अध्ययन के दौरान जब वैज्ञानिकों ने लोगों की सोने की आदतों का परीक्षण किया तो पाया कि जिनमें अनिंद्रा में कमी थी, उनमें ध्यान की कमी के साथ ही चौकन्नापन व सतर्कता में भी भारी कमी थी। नींद शरीर की कोशिकाओं को दोबारा से ऊर्जा से भरता है। मस्तिष्क से बेकार की चीजों को साफ करता है और सीखने और याद रखने की क्षमता को सपोर्ट करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, सात से आठ घंटे हर रात सोना जरूरी है। इससे कमी होने में लोगों मूड से संबंधित समस्याओं, ध्यान व फोकस करने में परेशानी की समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है।
मेडिटेशन से हो जाएं डी-स्ट्रेस
जो लोग मेडिटेशन करते हैं उनका ध्यान और लगातार फोकस करने की क्षमता अच्छी होती है। उस दौरान भी जब वे नीरस काम के बोझ के तले दबे हों। यदि आपको अधिक समय नहीं मिलता एक्सरसाइज या योगा करने के लिए तो यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना द्वारा किए गए शोध में पाया गया है कि चार दिनों के अंतराल में सिर्फ एक दिन 20 मिनट भी मेडिटेशन करें, तो यह याद्दाश्त और ज्ञानात्मक गुणों को सुधारने के लिए पर्याप्त है। मेडिटेशन तनाव कम करता है, खुशियों को बढ़ाता है और ये दोनों ही चीजें स्वस्थ मस्तिष्क में मददगार होती हैं।
चित्रस्रोत: Shutterstock.