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Written By: Anshumala | Published : July 10, 2018 6:43 PM IST
यदि आप लंबी उम्र तक हेल्दी और हैप्पी बने रहना चाहते हैं, तो खुद को बूढ़ा समझना छोड़ दीजिए। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। यह अध्ययन सोल नेशनल यूनिवर्सिटी में किया गया है। इस शोध में शामिल शोधकर्ताओं का कहना है कि जब तक कोई व्यक्ति खुद को बूढ़ा नहीं समझता, उसका दिमाग जवां और एक्टिव बना रहता है। ऐसे लोगों के मस्तिष्क में ग्रे मैटर अधिक मात्रा में हो सकता है। ग्रे मैटर सुनने, भावनाओं, फैसले लेने और आत्म नियंत्रण में मददगार होता है।
प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर जीनयुंग चे. का कहना है कि जो लोग खुद को जवां मानते हैं, उनकी याद्दाश्त अन्य के मुकाबले बेहतर होती है। ऐसे लोग अधिक स्वस्थ भी रहते हैं। समय से पहले खुद को उम्रदराज समझने के पीछे ग्रे मैटर में आई कमी जिम्मेदार होती है। खुद को जवां मानने वाले लोग जीवन के प्रति अधिक प्रेरित होते हैं।
डॉ. चे. के अनुसार, जो लोग उम्र से कम खुद को महसूस करते हैं, उनकी दिमागी संरचना युवा मस्तिष्क जैसी होती है। इस नतीजे पर पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों को अध्ययन में शामिल किया। इसमें 59 से 84 साल की उम्र वाले 68 स्वस्थ लोगों के दिमाग का एमआरआई स्कैन किया गया। इनसे कुछ सवाल भी पूछे गए। इनसे पूछा गया कि वे अपनी असल उम्र के मुकाबले कैसा महसूस कर रहे हैं। सभी प्रतिभागियों की तरफ से तीन अलग-अलग जवाब दिए। कुछ ने कहा कि वह अपनी उम्र से जवां महसूस कर रहे हैं। किसी का जवाब था कि वे अपनी उम्र के मुताबिक महसूस कर रहे हैं, तो वहीं कुछ ने जवाब दिया कि वे अपनी असली उम्र से अधिक महसूस कर रहे हैं।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा कि इनसानी दिमाग महज 25 साल की उम्र में बूढ़ा हो जाता है। इससे पहले लैंकास्टर यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में कहा गया था कि सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड (सीएसएफ), जो दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड में होता है, इसकी रफ्तार 25 की उम्र तक आते-आते कम होने लग जाती है। इस अध्ययन के नतीजे फ्रंटियर्स इन एजिंग न्यूरोसाइंस पत्रिका ने प्रकाशित हुए हैं।
चित्रस्रोत: Shutterstock.