मन, मस्तिष्क और शरीर को रखना है हेल्दी, तो जीवन में शामिल करें ''उत्साह''

जो व्यक्ति जीवन में उत्साह बनाए रखते हैं, उनमे डोपामिन एवं नोरएड्रिनेलिन हार्मोंस की मात्रा सामान्य बनी रहती है। ऐसे लोगों में मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक रोग होने की संभावना भी काफी कम रहती है।

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Written By: Anshumala | Published : September 5, 2018 4:06 PM IST

उत्साह है, तो जीवन है। उत्साह नहीं, तो जीवन निरर्थक है। इसके बिना जीवन जीना आसान नहीं। उत्साह जिंदगी को सार्थक बनाता है। मन, मस्तिष्क एवं शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी उत्साह जरूरी है। इसकी कमी से मस्तिष्क और शरीर अस्वस्थ होने लगता है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजय तेवतिया कहते हैं कि उत्साह हीन होने से व्यक्ति में मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक रोग उत्पन्न होने लगते हैं। जब दिमाग रोग से घिर जाता है, तो शरीर भी कई रोगों का घर बन जाता है। ऐसे में मन, मस्तिष्क एवं शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए खुद को उत्साहित बनाऐ रखना आवश्यक है। उत्साह मन, मस्तिष्क एवं शरीर के लिए ‘हेल्थ टॉनिक’ की तरह काम करता है। इससे शरीर और दिमाग को ऊर्जा मिलती है। काम करने में मन लगता है। देर तक काम करने के बावजूद भी थकान महसूस नहीं होती।

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इन उपायों का आजमा कर आप भी अपनी जिंदगी में भर सकते हैं उत्साह और उमंग की लहर-

सकारात्मक सोचें

सकारात्मक सोच वाले व्यक्तियों के साथ रहें। नकारात्मक बातें न करें। दूसरों की नकारात्मक बातों को मत सुनें। यह उत्साह को कम करती है। स्वयं को उत्साह से भरपूर रखने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है। जिनकी सोच सकारात्मक होती है, उन्हें विश्वास होता है कि यदि वे अपना कार्य ठीक तरीके से करेंगे, तो उसका परिणाम हमेशा अच्छा ही होगा। यही सोच व्यक्ति को उत्साह से ओत-प्रोत रखती है।

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डोपामिन जिम्मेदार

व्यक्ति में मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक रोग मस्तिष्क में डोपामिन एवं नोरएड्रिनेलिन नामक हार्मोंस के सामान्य से कम या ज्यादा होने के कारण होते हैं। देखा गया है कि जो व्यक्ति जीवन में उत्साह बनाए रखते हैं, उनमे डोपामिन एवं नोरएड्रिनेलिन हार्मोंस (noradrenaline hormone) की मात्रा सामान्य बनी रहती है। ऐसे लोगों में मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक रोग होने की संभावना भी काफी कम रहती है।

स्ट्रेस हार्मोन रखे नियंत्रित

शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर अधिक होने से व्यक्ति तनावग्रस्त रहने लगता है। उत्साह शरीर में स्ट्रेस हार्मोन के स्तर को भी नियंत्रित रखता है। जिन लोगों के जीवन में भरपूर उत्साह होता है, उनमें साइकोसोमेटिक बिमारी जैसे- पेप्टिक अल्सर, एलर्जी, दमा एवं अन्य रोग जैसे- उच्च रक्त चाप, हृदय रोग, मधुमेह आदि भी कम होने की संभावना रहती है।

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बदलाव है जरूरी

जीवनशैली में छोटे एवं सामान्य बदलाव निराशा और उत्साहहीनता को उत्साहवर्धक में बदल सकता है। उत्साहहीनता एक ऐसी नकारात्मक भावना है, जिसे सिर्फ वही महसूस कर सकता है, जो इससे पीड़ित है। कई बार छोटी सी घटना- दुर्घटना भी जिंदगी से उत्साह को खत्म कर देती है। आप अपनी जिंदगी को अपने सोच, तौर-तरीके, व्यवहार, व्यक्तित्व, अनुशासन और मानसिक पूर्वाग्रह में बदलाव एवं सुधार लाकर उत्साह से भर सकते हैं।

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अध्यात्म का असर

सोचने की प्रक्रिया मस्तिक में शुरू होती है। मस्तिष्क में ही नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में परिवर्तित किया जा सकता है। इसके लिए आध्यात्मिक बनें। अध्यात्म शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे व्यक्ति के अंदर उत्साह का संचार होता है। व्यायाम करें। यह मेटाबॉलिक और ग्रन्थि तंत्र को बेहतर बनाता है। मस्तिष्क में डोपामिन एवं नोरएड्रिनेलिन हार्मोंस के बनने और उनके स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। इससे व्यक्ति उत्साहवर्धक बना रहता है। ध्यान से मस्तिष्क संतुलित, शांत और आरामदायक स्थिति में रहता है, जिसके कारण मस्तिष्क मानसिक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से मुक्त रहता है। इससे मस्तिष्क हमेशा उत्साह से भरपूर रहता है। अकेलेपन से बचें। यह उत्साह में कमी लाता है। अपने विचारों को दूसरे लोगों से साझा करें। दूसरों के विचार भी सुनें। इससे आपके उत्साह में कमी नहीं आएगी। जो लोग रचनात्मक कार्य नहीं करते, वे उत्साहहीनता के शिकार हो जाते हैं। रचनात्मक कार्य करें। इससे आशाहीनता की भावना कम होती है। उत्साह एवं खुशी की भावना उत्पन्न होती है।

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