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Written By: Atul Modi | Updated : February 12, 2024 8:02 AM IST
हमारे शरीर की मशीन को ठीक से चलाने के लिए उसे ढेर सारे विटामिन और खनिज पदार्थों के ईंधन की जरूरत होती है। इन्हीं में से एक है विटामिन ई। विटामिन ई वसा में घुलनशील विटामिन है जो शरीर के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने में मदद करता है। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर को मुक्त कणों से होने वाली क्षति से बचाता है।
ब्लड टेस्ट के माध्यम से विटामिन ई की कमी का पता लगाया जा सकता है। आमतौर पर आपके शरीर में यह 5 से 5.17 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। हालांकि समय से पहले जन्मे शिशुओं और 17 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए यह सीमा अलग हो सकती है। जब किसी वयस्क के ब्लड में विटामिन ई का स्तर 4 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होता है तो यह गंभीर स्थिति मानी जाती है और उन्हें इस विटामिन के सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है।
शरीर में विटामिन ई की कमी होने पर कई लक्षण नजर आ सकते हैं। समय पर इनपर ध्यान देकर आप कई रोगों से बच सकते हैं।
आपके सेंट्रल नर्वस सिस्टम को चुस्त रखने के लिए विटामिन ई बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से आपकी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। यह शरीर के लिए आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है। इसकी कमी के कारण आपको ऑक्सीडेटिव तनाव हो सकता है। सेंट्रल नर्वस सिस्टम मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बीच संचार करता है। इसकी कमी से मस्तिष्क को संकेत मिलने तक में परेशानी होती है।
विटामिन ई की कमी के कारण आपको चलने में परेशानी हो सकती है। इस विटामिन की कमी से शरीर के पुर्किन्जे न्यूरॉन्स टूटने लगते हैं, जिससे शरीर में संकेत संचारित नहीं हो पाते। ऐसे में आपको चलने-फिरने में परेशानी आ सकती है।
विटामिन ई की कमी से आपके नर्व फाइबर को नुकसान होता है। ऐसे में नर्वस शरीर में संकेतों को सही ढंग से भेज नहीं पाती। जिसके कारण शरीर में झनझनाहट होने लगती है। इसे पैरिफल न्यूरोपैथी कहा जाता है।
आंखों की रोशनी बनाए रखने में विटामिन ई का महत्वपूर्ण रोल होता है। इसकी कमी से रेटिना और आंखों की लाइट रिसेप्टर्स कमजोर हो सकते हैं। इतना ही नहीं इस विटामिन की ज्यादा कमी होने से आपकी आंखों की रोशनी तक जा सकती है।
शरीर की इम्यूनिटी आपको कई बीमारियों और संक्रमणों से बचाती है। लेकिन अगर आपमें विटामिन ई की कमी है तो ये आपकी इम्यूनिटी को कमजोर कर देगी। बढ़ती उम्र के साथ यह जोखिम और बढ़ जाता है।
विटामिन ई वसा में घुलनशील है। जिसका मतलब है कि इसे ठीक से अवशोषित होने के लिए आहार से वसा की आवश्यकता होती है। लेकिन जो लोग क्रोनिक डायरिया, सीलिएक रोग या सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी स्थितियों से पीड़ित हैं, उन्हें वसा को अवशोषित करने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में उनमें विटामिन ई की भी कमी होती है।
समय से पहले जन्मे शिशुओं में विटामिन ई की कमी होने की आशंका अधिक होती है। क्योंकि ऐसे शिशुओं का पाचन तंत्र ठीक से विकसित नहीं हो पाता। जिसके कारण वे विटामिन ई को अवशोषित नहीं कर पाते।
कुछ दुर्लभ आनुवंशिक विकार विटामिन ई के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे इसकी कमी हो सकती है।एबेटालिपोप्रोटीनीमिया और फैमिली आइसोलेटेड विटामिन ई इसमें प्रमुख हैं।
लो फैट फूड का सेवन करने वाले लोगों में भी विटामिन ई की कमी हो सकती है। क्योंकि यह वसा में घुलनशील विटामिन है।
शराब का अत्यधिक सेवन विटामिन ई के अवशोषण को बाधित कर सकता है।