Vajra Mudra : तनाव, थकान और लो ब्लड प्रेशर का इलाज करती है वज्र मुद्रा, यूं करें अभ्यास

परीक्षा के समय बच्चे तनाव में हों या फिर सारा दिन काम करके आप थकान महसूस कर रहे हों। सभी का इलाज है वज्र मुद्रा के पास। जानें, वज्र मुद्रा करने का तरीका और इससे होने वाले सेहत लाभ...

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Written By: Anshumala | Published : September 23, 2019 2:27 PM IST

सारा दिन शारीरिक और मानसिक मेहनत करके आप थकान महसूस करने लगते हैं। कुछ लोगों को बिना मेहनत किए ही कई बार थकान महसूस होता है। योगाचार्य डॉ. शैलेन्द्र शेखर कहते हैं कि थकान का मुख्य कारण है- चिंता या शारीरिक-मानसिक श्रम। चक्कर आना, भूख और वजन में असामान्यता, नकारात्मक सोच, जोड़ों या मांसपेशियों के दर्द, अनिद्रा या अतिनिद्रा, अधिक पेशाब आना, किसी काम में मन न लगना, शरीर का तापमान सामान्य से कम हो जाना, अवसाद, थायरॉएड ग्रंथि का ठीक से काम न करना आदि अत्यधिक थकान के लक्षण हैं। ऐसे में आपको योग में मौजूद मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। वज्र मुद्रा (Vajra Mudra) करने से आप थकान के साथ ही कई अन्य समस्याओं से भी बचे रह सकते हैं।

तनाव भी दूर करती है वज्र मुद्रा

अक्सर के परीक्षा के समय बच्चे तनाव में रहने लगते हैं (Vajra Mudra benefits)। इससे परीक्षा में जो भी आता है, उसे भी आते हुए सही से नहीं लिख पाते हैं। यदि आपको भी परीक्षा के समय तनाव, चिंता या डर की समस्या परेशान करती है, तो वज्र मुद्रा का अभ्यास करना फायदेमंद साबित होगा। परीक्षा के इन दिनों में वज्र मुद्रा विद्यार्थियों को तनाव से दूर रखने में मददगार है। हमें चाय-कॉफी या ऐसे किसी अन्य उत्तेजक पदार्थ से थकान में जो राहत मिलती है, इस मुद्रा से वही लाभ मिलता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि शरीर में सबसे मजबूत नाड़ी वज्र नाड़ी ही होती है और वज्र मुद्रा वज्र नाड़ी को ऊर्जा प्रदान करती है।

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वज्र मुद्रा से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में भी मदद मिलता है। यदि निम्न रक्तचाप के कारण आपको बेचैनी महसूस हो तो वज्र मुद्रा की मदद से इस समस्या को भी दूर कर सकते हैं। इससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है। इसका अभ्यास करने से दिमाग शांत रहता है और मन में बुरे विचार नहीं आते हैं।

यूं करें वज्र मुद्रा का अभ्यास

वज्र मुद्रा करने के लिए सबसे पहले (how to do vajra mudra) कनिष्ठा, अनामिका और मध्यमा को इस प्रकार मिलाएं कि तीनों उंगलियों के नाखून एक सीध में रहें। अब अंगूठे के शीर्ष भाग को मध्यमा के शीर्ष भाग के किनारे पर इस तरह रखें कि अंगूठे का अग्रभाग मध्यमा के नाखून के कोने को छूता हुआ हो। तर्जनी उंगली सीधी रहे। पांच-पांच मिनट तक वज्र मुद्रा का अभ्यास प्रत्येक दिन तीन बार करें।

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