बड़ी हुई तोंद ने बिगाड़ दी है पर्सनेलिटी, तो इस तरह घटाएं फैट

पेट का मोटापा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा परेशान करता है, क्योंकि महिलाओं के सेक्स हार्मोंस पेट की कैविटी में फैट जमा नहीं होने देते। हालांकि, मीनोपॉज के बाद महिलाओं में भी पेट के मोटापे की आशंका पुरुषों जितनी ही हो जाती है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : February 22, 2019 4:54 PM IST

शरीर के कुल फैट की मात्रा से ज्यादा जरूरी फैक्ट है फैट का शरीर में सही डिस्ट्रिब्यूशन। यानी पूरे शरीर में फैट ज्यादा होना उतना खतरनाक नहीं है जितना सिर्फ पेट के आसपास जमा होना। पुरुषों के लिए 40 इंच से ज्यादा और महिलाओं के लिए 35 इंच से ज्यादा कमर का साइज मोटापे से जुड़ी बीमारियों का कारण बनता है।

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पॉट बेली ओबेसिटी

यह पेट का मोटापा है जिसे सेंट्रल ओबेसिटी भी कहते हैं। इसमें पेट के आसपास एक्स्ट्रा फैट जमा हो जाता है। पेट पर जमा चर्बी कई बीमारियों को साथ लेकर आती है। टाइप-2 डायबीटीज , हाई बीपी , सोते वक्त सांस लेने में तकलीफ या स्लीप एप्निया  दिल की बीमारियां , महिलाओं में मेंसेस से जुड़ी परेशानियां, चेहरे पर एक्स्ट्रा बाल और इनफर्टिलिटी की समस्याएं , गाउट , कुछ तरह के कैंसर, जैसे कि मीनोपॉज के बाद महिलाओं में गर्भाशय और स्तन कैंसर।

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ये है आम वजह

पेट का मोटापा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा परेशान करता है, क्योंकि महिलाओं के सेक्स हार्मोंस पेट की कैविटी में फैट जमा नहीं होने देते। हालांकि, मीनोपॉज के बाद महिलाओं में भी पेट के मोटापे की आशंका पुरुषों जितनी ही हो जाती है। यही वजह है कि अक्सर 40-45 की उम्र तक बिल्कुल स्लिम दिखने वाली कुछ महिलाएं अचानक 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पेट और हिप के मोटापे की शिकार हो जाती हैं। लाइफ स्टाइल और जेंडर के अलावा, चंद आदतें भी पेट के मोटापे के लिए जिम्मेदार होती हैं, जो हैं : - किसी भी तरह की एक्सरसाइज न करना - ज्यादा कैलरी वाला खाना - स्मोकिंग - ज्यादा शराब पीना

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फैट देख कर करें समाधान

उभर हुआ पेट - पेट ऊपर से नीचे तक फूला हुआ रहता है। - यह हजम न हो सकने वाला खाना ज्यादा खाने से होता है। ऐसा खाना, जिसमें विटामिन और मिनरल्स की मात्रा कम होती है।

क्या करें - ऐसे मामलों में हल्की एक्सरसाइज और बैलेंस डाइट से पेट कम करना आसान होता है। साथ ही, ऐसे ड्रिंक्स लें, जिनसे डाइजेशन ठीक रहे। मिसाल के तौर पर छाछ, नींबू पानी आदि। इससे आपके पेट का उभार कम होगा।

टायर बेली फैट - इस तरह के मोटापे में साइड से पेट टायर की शक्ल में बाहर की ओर निकलता है। पेट का यह मोटापा घंटों एक जगह बैठे रहकर काम करने और फिजिकली एक्टिव न होने की वजह से होता है। ऐसे लोगों में मीठी चीजें खाने की आदत समस्या को और बढ़ा सकती है।

क्या करें- अगर आपका मोटापा इस कैटिगरी में आता है तो सबसे पहले आप अल्कोहल और सोडा वाले कोल्ड ड्रिंक्स फौरन बंद कर दें। इस समस्या से निजात पाने के लिए हेल्दी डाइट लें और फिजिकली एक्टिव हो जाएं। रोज तकरीबन 1 घंटे की ब्रिस्क वॉक करें।

लो बेली फैट - पेट ऊपर की बजाय नीचे की ओर से ज्यादा निकला रहता है। पेट के निचले हिस्से का मोटापा अक्सर एक जगह बैठकर लगातार काम करने की आदत और एक ही तरह का खाना खाने की वजह से होता है। इस तरह के मोटापे से पीड़ित लोग शरीर के बाकी हिस्सों से पूरी तरह से स्लिम दिखते हैं, लेकिन पेट के निचले हिस्से में फैट जमा होने की वजह से मोटे नजर आते हैं।

क्या करें - इस समस्या से निजात का सबसे आसान तरीका है, अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज शामिल करें। खाने में वैरायटी रखें, संतुलित आहार लें और अनार, गाजर, मौसमी जैसे फलों के जूस पिएं, जो पेट से फैट हटाने में मददगार साबित होते हैं।

स्ट्रेस बेली - ओबेसिटी इस कंडिशन में पेट नीचे की तरफ लटका हुआ गोल होता है। इस समस्या के शिकार ज्यादातर लोग परफेक्शनिस्ट होते हैं, लेकिन उन्हें पाचन संबंधी समस्या होती है, जिसके चलते अक्सर पेट फूला रहता है।

क्या करें - वक्त पर खाना खाएं, जंक फूड और ज्यादा मात्रा में कैफीन (चाय, कॉफी, चॉकलेट ड्रिंक्स आदि) वाली चीजें लेने से बचें।

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