Healthy Eating: ग़लत तेल खाने से हो सकता है हार्ट अटैक, सही कूकिंग ऑयल चुनने के लिए फॉलो करें ये टिप्स

कूकिंग ऑयलसे ना केवल खाने का स्वाद बढ़ता है। बल्कि, इसके इस्तेमाल से आपके भोजन की पौष्टिकता भी बढ़ती है। इससे,  नैचुरल और हेल्दी फैट्स की सही मात्रा भी शरीर को प्राप्त होती है। लेकिन, कूकिंग ऑयल के ज़रिए हाई कोलेस्ट्रॉल और अनहेल्दी फैट्स भी शरीर में पहुंच जाते हैं। इसीलिए, कूकिंग ऑयल खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि वह अनहेल्दी ना हो।

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : February 18, 2020 4:30 PM IST

Healthy Cooking Oil: भोजन या डायट शरीर को मज़बूत बनाती है। क्योंकि, भोजन से मिलने वाले पौष्टिक तत्व शरीर को कार्य करने में सहायता करते हैं।  कूकिंग ऑयल ( Healthy Cooking Oil in hindi) से ना केवल खाने का स्वाद बढ़ता है। बल्कि, इसके इस्तेमाल से आपके भोजन की पौष्टिकता भी बढ़ती है। इससे,  नैचुरल और हेल्दी फैट्स की सही मात्रा भी शरीर को प्राप्त होती है। लेकिन, कूकिंग ऑयल के ज़रिए हाई कोलेस्ट्रॉल और अनहेल्दी फैट्स भी शरीर में पहुंच जाते हैं। इसीलिए, कूकिंग ऑयल खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि वह अनहेल्दी ना हो। (Tips to select Healthy Cooking Oil)

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ऐसे चुनें सही कूकिंग ऑयल:

अपने लिए कूकिंग ऑयल खरीदते समय ध्यान से लेबल पढ़ें। अक्सर, कूकिंग ऑयल में सैचुरेटेड फैट होते हैं। ऐसा कूकिंग ऑयल खरीदें, जिसमें, सैचुरेटेड फैट की मात्रा 20 फीसदी तक होती है। तेल में मूफा फैट्स (MUFA) और पूफा फैट्स (PUFA) की मौजूदगी हेल्दी मानी जाती है क्योंकि, ये दोनों गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाने का काम करते हैं। मूफा और पूफा के उलट सैचुरेटेड फैट्स और ट्रांस-फैट्स बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि कर देते हैं। जैसा कि बैड कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक की वजह बन सकता है। इसीलिए, ऐसा कूकिंग ऑयल खरीदें जिसमें, मोनो अनसैचुरेटेड फैट्स हों और इससे कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा भी कम होता है।  वहीं,  ऐसे तेल जिसमें, पॉलीसैचुरेटेड फैट्स (polysaturated fats) होते हैं उनके सेवन से बचना चाहिए।

इंडियन कूजिन के लिए कौन-सा तेल है बेस्ट :

भारतीय तरीके से कूकिंग करने के लिए ऐसे तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। जिनका, स्मोकिंग पॉइंट हाई हो। दरअसल, हाई स्मोक पॉइंट वाले तेल देर अधिक तेज़ आंच पर भी जलते नहीं और ना ही उनसे कोई बदबू आती है।  सनफ्लॉवर ऑयल, सोयाबीन का तेल, कैनोला का तेल, और तिल का तेल हाई स्मोक पॉइंट ऑयल हैं। जबकि,  ऑलिव ऑयल जैसे तेल कम या मीडियम स्मोक पॉइंट वाला तेल है।

अगर आप डीप फ्राइड या तरीवाली सब्ज़ी बनाना चाहते हैं। तो  ऐसा तेल इस्तेमाल करें जिसका स्मोक पॉइंट हाई हो। जबकि, भाप में पकाने और सलाद मे मिलाने के लिए लो-स्मोक पॉइंट वाला तेल इस्तेमाल करें।

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