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नहाना हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। शरीर से धूल हटाने से लेकर मन को तरोताजा करने तक, स्ट्रेस को कम करने और मांसपेशियों और नसों को आराम प्रदान करने के लिए नहाना बेहद महत्वपूर्ण है। आप कैसे और कब नहाते हैं, इसका आपकी ऊर्जा स्तर और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, नहाने का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। यही नहीं इसके साथ ही पानी और उसका सही तापमान भी अलग भूमिका निभाता है। ठीक और सही तरीके से स्नान करना आयुर्वेदिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राचीन चिकित्सा पद्धति बताती है कि स्नान से पहले गर्म जड़ी बूटी वाले तेल का उपयोग करना, दोषों के संतुलन और बीमारियों की रोकथाम में सहायक है।
आयुर्वेद के मुताबिक, सूर्योदय के बाद दांत साफ करने और पेट के साफ होने के बाद व सूर्यास्त के आस-पास नहाना आपकी मांसपेशियों और नसों को आराम प्रदान कर सकता है। लेकिन अच्छा रहेगा अगर आप थोड़े गरम पानी का प्रयोग करें ताकि स्ट्रेस कम हो सके। इससे रात को अच्छी नींद आने में भी मदद मिलेगी। यही नहीं व्यक्ति को उस हाथी की तरह से नहाना चाहिए जो बहुत पानी का प्रयोग करता है, ताकि मन और शरीर साफ रहे।
स्नान से पहले अभ्यंग, एक तेल मालिश भी फायदेमंद है। तिल का तेल बेहतरीन विकल्प है। हालांकि, नारियल तेल या बादाम तेल का उपयोग भी कर सकते हैं।
तेल मालिश के बाद, धीरे धीरे से पूरे शरीर पर जड़ी बूटी का पाउडर रगड़ना और फिर कुछ समय बाद उसे पानी से धोना भी शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
नहाने के पाउडर में प्रयोग की जाने वाली सामग्री (Ayurvedic Bath Powder Recipe) इस प्रकार है:
बेहतर महसूस करने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करना ठीक रहता है। हालांकि, सिर पर पानी सीधे तौर पर नहीं डालना चाहिए। क्योंकि यह बालों और आंखों की कमजोरी का कारण बन सकता है। साथ ही सिर धोते समय, कमरे के तापमान पर पानी का उपयोग करें। भोजन के तुरंत बाद नहाने से बचना चाहिए।