जांघों को बनाना है सुडौल, तो हर रोज करें गरुड़ासन

अगर आप चाहती हैं कि आपकी शेप फि‍र से बेहतर हो जाए तो हम आपको बता रहे हैं एक ऐसा आसन जो आपकी जांघों को सुडौल बनाने के साथ ही मजबूत भी बनाएगा। साथ ही यह बाजुओं की लटकी हुई चर्बी को भी टाइट करता है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : April 20, 2019 1:46 PM IST

डिलीवरी या उम्र बढ़ने के साथ बहुत सी महिलाओं का पेट लटकने लगता है। तो कई बार गर्भनिरोधकों की वजह से पेट के निचले हिस्‍से में सूजन आ जाती है। इस एरिया में लगातार दर्द रहने के कारण उनका फि‍गर पीयर शेप में हो जाता है। पर अगर आप चाहती हैं कि आपकी शेप फि‍र से बेहतर हो जाए तो हम आपको बता रहे हैं एक ऐसा आसन जो आपकी जांघों को सुडौल बनाने के साथ ही मजबूत भी बनाएगा। साथ ही यह बाजुओं की लटकी हुई चर्बी को भी टाइट करता है।

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जांघों को मजबूत बनाता है गरुड़ासन

अगर आप शरीर के निचले हिस्‍से अर्थात मूत्राशय, अंडकोष, मलाशय या जांघों में किसी तरह की समस्‍या का सामना कर रहे हैं तो आपको गरुड़ासन जरूर करना चाहिए। यह शरीर के निचले हिस्‍से को मजबूत बनाने के साथ ही बाजुओं का लचीलापन भी बढ़ाता है।

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शरीर को सुडौल बनाता है गरुड़ासन

ज्‍यादातर महिलाओं की यह समस्‍या होती है कि चर्बी उनके पेट के निचले हिस्‍से, जांघों के आसपास और बाजुओं में लटकने लगती है। इन सभी जटिल क्षेत्रों से चर्बी हटाने के लिए गरुड़ासन बहुत अच्‍छा है। गरुड़ासन योग खड़े होकर करने वाले योग में एक महत्वपूर्ण योगाभ्यास है।

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पुरुषों के लिए भी है लाभकारी

ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ महिलाओं के लिए लाभकारी है। बल्कि पुरुष भी चाहें तो इसका लाभ ले सकते हैं। यह अंडकोष एवं गुदा के लिए बहुत लाभकारी योगाभ्यास है। इस आसन में हाथ एक-दूसरे में गूंथ लिए जाते हैं और छाती के सामने इस प्रकार रखे जाते हैं, जैसे गरुड़ की चोंच होती है, इसलिए इस आसन को गरुड़ासन कहा जाता है।

इन बातों का रखें ध्‍यान

बहुत गंभीर गठिया में इस आसन को नहीं करनी चाहिए।

नसों में सूजन होने पर इसको करने से बचना चाहिए।

हड्डियों तथा जोड़ों में चोट होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।

इस तरह करें गरुड़ासन

सबसे पहले आप सीधे खड़े हों।

दाएं पांव को बाएं पांव के ऊपर से दूसरी ओर ले जाएं। अगर आपकी जांघ मोटी है तो शुरुआत में इसे करने में परेशानी हो सकती है। दूसरी तरफ पतली कमर और पतले जांघ वाले इसको आसानी से कर सकते हैं।

बाहों को रस्सी के समान एक दूसरे में गूंथ दें।

आपस में गुंथे हुए हाथों को गरुड़ की चोंच के समान छाती के आगे रखें। घुटने को मोड़कर संतुलन बनाएं।

बाएं पांव को दाएं पांव के ऊपर से ले जाकर इसे दूसरी ओर भी करें।

यह आधा चक्र हुआ।

फिर दूसरे तरफ से करें।

अब एक चक्र हुआ।

इस तरह से आप तीन से पांच चक्र करें।

गरुड़ासन के लाभ

  • इस आसन के अभ्यास से मन और शरीर के बीच सामंजस्‍य स्‍थापित होता है जिससे मन को अपार शांति मिलती है।
  • इसके नियमित अभ्यास से अंडकोष (Testicle) को बढ़ने से रोक जा सकता है।
  • यह पैरों और जांघों को मजबूत बनाता है।
  • इसका नियमित अभ्यास से गुदा, मलाशय तथा मूत्राशय के रोगियों को आराम पहुंचता है।
  • यह जोड़ों की सक्रियता बढ़ाता है, घुटनों, पैरों एवं जोड़ों का दर्द दूर करता है।
  • यह आपके हाथों को मजबूत बनाता है और कोहनी के दर्द से छुटकारा दिलाता है।
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