पाइल्स के रोगी जरूर ट्राई करें ये आसन, कुछ ही दिनों में मिल सकता है लाभ

बवासीर की वजह से बहुत से लोगों को ऑपरेशन कराना पड़ता है, लेकिन आपकी इस परेशानी में योग अहम भूमिका निभा सकता है। कई ऐसे आसान (Yoga for Piles) से आसन होते हैं, जिससे आप बवासीर जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 2, 2020 5:41 PM IST

Yoga for Piles : मानसिक और शारीरिक रोगों के लिए योग काफी फायदेमंद होता है। कई बार योग असाध्य रोगों के लिए भी बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। बदलती जीनवशैली का सबसे अधिक असर लोगों के खानपान पर (Yoga for Piles) पड़ता है। अनियमित खानपान की वजह से कब्ज (Piles Causes) की समस्या होने लगती है। इसकी वजह से पाइल्स जैसी गंभीर समस्या होने लगती है। पाइल्स को Hemorrhoids और बवासीर भी कहा जाता है।

दरअसल, बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती है। इसके कारण मल को त्यागने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी पाइल्स के कारण मलद्वार से खून भी निकलने लगता है। साथ ही खुजली की भी समस्या हो जाती है। इस परेशानी के कारण व्यक्ति को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें बवासीर की वजह से ऑपरेशन भी कराना पड़ता है, लेकिन आपकी इस परेशानी में योग अहम भूमिका निभा सकता है। कई ऐसे आसान (Yoga for Piles) से आसन होते हैं, जिससे आप बवासीर जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं बवासीर से छुटकारा पाने के लिए योगासन-

हलासन

यह आसन पेट की चर्बी को कम करने के लिए काफी फायदेमंद होता है। साथ ही बवासीर की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी यह बहुत ही फायदेमंद है। इसके साथ ही यह मांसपेशियों को भी मजबूत करने में हमारी मदद करता है।

  • हलासन (halasana) करने के लिए पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
  • उस दौरान आपके हाथ फर्श पर होने चाहिए।
  • अब सांस लेते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाते हुए सिर के ऊपर से लाते हुए फर्श से पंजे को टच कराएं।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकेंड तक रुकें।
  • यह योगासन (yoga to increase sperm quantity) पेल्विक एरिया में रक्त संचार को बढ़ाने में मदद करता है।

पर्वतासन 

यह आसन नियमित रूप से करने से बवासीर की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

  • व्रजासन में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर नमस्ते की मुद्रा बनाएं। दोनों हाथों को अपनी छाती के पास ले आएं।
  • अपनी जोड़ी हुई हथेलियों को धीरे-धीरे अपने सिर के ऊपर की तरफ ले जाएं। कोशिश करें कि हाथ जितना ऊपर जा सके उतना ऊपर ले जाएं। हाथों को सीधा रखें।
  • आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि हाथ सीधे रहें और आपकी आर्म्स यानि बाजू आपके कान के पास रहें। शरीर को एकदम सीधा रखें।
  • अब धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर ले जाएं लेकिन एड़ियों को ज़मीन पर ही रखें।
  • अब धीरे-धीरे अपनी हथेलियों को छाती के पास ले आएं और धीरे-धीरे हिप्स को भींचे और फिर जांघों के पास रखें।
  • कुछ देर बाद इसी प्रक्रिया को दोबारा करें। आप चाहे तो अपने पैरों की पोजीशन बदल सकते हैं और ध्यान रहे आपकी रीढ़ की हड्डी हमेशा सीधी रहें।

सर्वांगासन

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं।
  • अपने हाथों को धड़ के बगल में रखें और हथेलियां नीचे।
  • सांस अंदर लेते हुए अपने पैरों को सीधा ऊपर उठाएं।
  • हथेलियों से कमर को सहारा दें।
  • इस स्थिति में सीधा रहते हुए सारा वजन कंधों पर डालना हैं।
  • सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर और पैरों को नीचे लाएं।

बालासन

  • बालासन को करने के लिए सबसे पहले घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भार एड़ियों पर डाल दें।
  • अब गहरी सांस भरते हुए आगे की ओर झुकें।
  • ध्यान रहे कि आपका सीना जांघों से छूना चाहिए। फिर अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद वापस सामान्‍य अवस्‍था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को शुरुआत में पांच बार तक दोहरा सकते हैं। सहज होने पर आगे बढ़ाएं ।

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