Clean India: हाइजिन और सोशल हैबिट्स जो रखेंगी आपको हेल्दी और बनाएंगी 'स्वच्छ भारत'

पानी, हवा और मिट्टी के प्रदूषण को बढ़ाने में हम लोगों की बहुत बड़ी भूमिका है। और हमें होने वाली आम हेल्थ प्रॉब्लम्स मसलन एलर्जी, डायरिया, सर्दी-ज़ुकाम और पेट की गड़बड़ियां दूषित पानी और जहरीली हवा के सम्पर्क में आने से ही होती हैं। तो अगर आप भी स्वच्छ भारत मिशन में भागीदारी करना चाहते हैं, और बदले में चाहते हैं एक हेल्दी बॉडी तो हम बताते हैं वो तरीके , जिन्हें आप अपना सकते हैं

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 30, 2019 11:16 AM IST

स्वच्छ भारत अभियान (Clean India Movement)  देश को साफ-सुथरा बनाने के साथ हमारे देश के लोगों को हेल्दी बनाए रखने में भी बहुत मदद कर सकता है। अगर आप इस मिशन के कॉन्सेप्ट की तरफ ध्यान दें तो आप समझ सकेंगे कि किस तरह साफ-सफाई और हाइजिन हमारी कई बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स का सस्ता इलाज साबित हो सकती है। (Ways Clean India Mission can make us healthy).

जी हां, पानी, हवा और मिट्टी के प्रदूषण को बढ़ाने में हम लोगों की बहुत बड़ी भूमिका है। और हमें होने वाली आम हेल्थ प्रॉब्लम्स मसलन एलर्जी, डायरिया, सर्दी-ज़ुकाम और पेट की गड़बड़ियां दूषित पानी और जहरीली हवा के सम्पर्क में आने से ही होती हैं। तो अगर आप भी स्वच्छ भारत मिशन में भागीदारी करना चाहते हैं, और बदले में चाहते हैं एक हेल्दी बॉडी तो हम बताते हैं वो तरीके , जिन्हें आप अपना सकते हैं:

डेंगू-मलेरिया से बचना है तो, ना करें पानी को वेस्ट:

ड्रिंकिंग वॉटर या पीने के पानी को पीने लायक बनाने के लिए प्रशासन की तरफ से ढेर सारे पैसे खर्च किए जाते हैं। कई तरह की प्रोसेसिंग और बहुत-से लोगों की मेहनत के बाद हमारे घर की नल तक यह पानी पहुंचाया जाता है। लेकिन लोग बिना सोचे-समझे पीने के पानी को बर्बाद करते हैं। इससे न केवल ड्रिंकिंग वॉटर की कमी होती है, बल्कि सीवेज के ज़रिए यह शुद्ध जल गटर में बह जाता है। इस तरह हम दूषित पानी के स्तर को बढ़ाने का काम करते हैं। दूषित पानी में पनपने वाले मच्छर और कीड़े हमें मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी वॉटर-बॉर्न डिज़िज़ेज का शिकार बना देेते हैं।

सिंगल यूज़ प्लास्टिक को करें ना, बचें बीमारियों से:

प्लास्टिक हमारी सेहत और पर्यावरण के लिए भी खतरनाक है। सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल ना करें। प्लास्टिक स्ट्रा-गिलास-कप की बजाय स्टील, कांच और प्राकृतिक तरीके से बनाए गए डिस्पोजल इस्तेमाल करें। प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के झोले और थैलियां इस्तेमाल करें।

कचरे को रिसाइकल करना सीखें:

ग्लोबल वार्मिंग की एक वजह हमारे आसपास लगा कचरे का अंबार भी है, उसे कम करने से हम बदलते मौसम और उससे होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं। घर में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों को कचरे में फेंकने से पहले उसकी रिसाइकलिंग के बारे में सोचें। सब्ज़ियों के छिलकों से अचार-परांठे बनाना सीख सकते हैं, उन्हें किसी गौशाला में दे सकें तो पशुओं के लिए एक पौष्टिक चारा तैयार होगा। इसी तरह प्लास्टिक, टिन और लोहे के डिब्बे और पैकिंग्स को घर में गमले, किचन स्टोरेज़ आदि के तौर पर इस्तेमाल करें।

कार-पूलिंग करें, हवा को रखें साफ:

अस्थमा, एलर्जिक रिएक्शन और बेचैनी ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें दूषित हवा बहुत हद बढ़ा देती है। हवा में बढ़ते धुएं को कम करने के लिए पेट्रोल-डीज़ल का कम इस्तेमाल एक अहम तरीका है। इसीलिए लोगों को लिफ्ट देने और लिफ्ट मांगने से आप इस दिशा में थोड़ी मदद कर सकते हैं। जितना हो सके अपनी कार और टैक्सी में 1 या 2 से अधिक लोगों के साथ सफर करें। इससे ईंधन कम जलेगा और हवा में धुआं भी कम घुलेगा।

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