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शोध में दावा, गुस्सा करने से बढ़ती है कार्यक्षमता, जानें गुस्से से सेहत पर होता है कैसा असर

गुस्सा जाहिर करने वाले लोग, गुस्से से डरने वालों की अपेक्षा अधिक आशावादी होते हैं।

हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जो लोग गुस्सा करते हैं, उनकी कार्यक्षमता काफी हद तक बढ़ जाती है। कहने का मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति खराब मूड में ऑफिस जाता है या किसी कारण से ऑफिस में ही उसका मूड खराब हो जाता है, तो वह इस स्थिति में सामान्य स्थिति से अधिक बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, क्योंकि खराब मूड में हमारी काम करने क्षमता बढ़ जाती है। यह अध्ययन कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ वॉटरलू में किया गया।

इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता और साइकोलॉजी के प्रोफेसर तारा मैकऑले और यूनिवर्सिटी में पीएचडी छात्र मार्टिन एस. गैबल ने दावा किया है कि खुशी के मूड में होने पर अक्सर लोग अपने काम की प्राथमिकता तय नहीं कर पाते हैं और उसे मैनेज करने के लिए संघर्ष करत रहते हैं। यदि काम के लिहाज से देखा जाए तो मूड खराब होना अच्छा होता है। इससे लोगों को ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। वह बेहतर तरीके से अपने समय का प्रबंधन कर पाते हैं। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि अच्छे मूड में मन ज्यादा भटकता है और यह काम में बाधक बनता है, जबकि मूड खराब होने या गुस्से होने में आप कहीं और ध्यान नहीं देते सिवाए अपने काम पर फोकस करते हैं।

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हालांकि, प्रमुख शोधकर्ता और साइकोलॉजी के प्रोफेसर तारा मैकऑले का यह भी कहना है कि यह बात एक्सट्रोवर्ट लोगों के लिए सही हो सकती है। इंट्रोवर्ट या अंतर्मुखी लोगों पर यह फॉर्मूला फिट नहीं बैठता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसे लोग मूड खराब होने पर और भी संवेदनशील होते हैं। इस शोध में 95 लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसके लिए शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की भावनात्मक सहनशक्ति को ध्यान में रखा। इसके आधार पर उन्होंने प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा।

उन्होंने देखा कि भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील लोगों की काम के प्रति दृढ़ता अलग-अलग तरह की थी। एक्सट्रोवर्ट लोग जहां ज्यादा जूझकर काम करते रहे, वहीं अंतर्मुखी लोगों की स्थिति ज्यादा खराब दर्ज की गई।

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गुस्से के अन्य सेहत लाभ

1 अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, गुस्सा जाहिर करने वाले लोग, गुस्से से डरने वालों की अपेक्षा अधिक आशावादी होते हैं। गुस्सा करने वाले लोग खुद पर आसानी से नियंत्रण रख पाते हैं। शोध में कुछ लोगों को शामिल किया गया और उनसे जानबूझ कर खीज और झुंझलाहट उत्पन्न करने वाले प्रश्न किए गए। उनकी प्रतिक्रिया को वीडियो में रिकॉर्डिंग भी किया गया। वीडियो देखने से यह पचा चला कि जिनके चेहरे पर गुस्से की बजाय डर था, उनका ब्लड प्रेशर, नब्ज की गति और स्ट्रेस हॉर्मोन लेवल सामान्‍य से ज्‍यादा था।

2 माना जाता है कि बात-बात में गुस्सा करने से रिश्‍ते टूट जाते हैं लेकिन शोध कहता है कि गुस्सा जाहिर करने से आपसी रिश्ते और मजबूत होते हैं। ऐसे में पार्टनर के प्रति गुस्सा आ रहा हो, तो उसे दिल में न रखें। अंदर ही अंदर गुस्सा करने से बेहतर है कि उसे पार्टनर के सामने जाहिर कर दें। इससे आपका मन हल्का होगा और बात करने पर समस्या का समाधान भी निकलेगा। इससे आपका रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा।

3 गुस्‍सा करने से मस्तिष्‍क के सकारात्‍मक भावनाओं वाले हिस्‍से में खून का प्रवाह बढ़ जाता है। एक शोध में शोधकर्ताओं ने 30 पुरुषों को 50 ऐसी बातें सुनाईं, जिनसे उन्‍हें क्रोध आने लग जाए। प्रयोग के पहले और बाद में प्रतिभागियों के दिल की धड़कन, धमनीय तनाव, हॉर्मोन तनाव और कोर्टिसोल के स्‍तर की जांच की गई। शोध में पता चला कि उनमें मस्तिष्‍क का बायां हिस्‍सा अधिक सक्रिय हो गया था। यूनिवर्सिटी ऑफ वेलन्‍किया के प्रोफेसर डॉक्‍टर हेरेरो के अनुसार, मस्तिष्‍क का बायां हिस्‍सा सकारात्‍मक भावनाओं और दायां हिस्‍सा नकारात्‍मक भावनाओं को नियंत्रित करता है। बायां हिस्‍सा करीबी और खुशी बढ़ाता है, वहीं दायां हिस्‍सा डर और दुख का कारण होता है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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