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Written By: Yogita Yadav | Published : September 18, 2019 9:27 PM IST
पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाएं बहुत ज्यादा परेशान हो जाती हैं, जबकि कुछ के लिए ये दिन ज्यादा मुश्किल भरे नहीं होते। ऐसे मे सवाल उठता है कि क्या इस दौरान उन्हें अपना वर्कआउट रूटीन फॉलो करना चाहिए या नहीं।
वर्कआउट हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए बहुत जरूरी है। खुद को स्वस्थ रखने के लिए हम सभी को सप्ताह में कम से कम पांच दिन वर्कआउट जरूर करना चाहिए। पर महिलाओं के लिए हर बार हालात एक जैसे नहीं होते। खासतौर से पीरियड्स (Workout in periods) के दिनों में तो कुछ महिलाएं बहुत ज्यादा परेशान हो जाती हैं। जबकि कुछ के लिए यह दिन ज्यादा मुश्किल भरे नहीं होते। तब क्या करना चाहिए। क्या इस दौरान उन्हें अपना वर्कआउट रूटीन फॉलो करना चाहिए या नहीं। आइए जानते हैं विस्तार से।
पीरियड्स के टाइम महिलाओं के लिए बहुत सारे बदलाव का टाइम होता है। यह उनकी प्रजनन क्षमता से जुड़ी प्रक्रिया है। इसलिए स्वभाविक है इस दौरान शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव होते हैं। इन्हीं पांच दिनों में उनका शरीर और मन दोनों में ही काफी सारे परिवर्तन देखने में आते हैं। कुछ महिलाएं इस दौरान हार्मोन्स के कारण मूड स्विंग की भी शिकार हो जाती हैं।
इस दौरान पेट में और निचले हिस्से में होने वाला दर्द भी काफी परेशान करता है। ऐसे में कुछ भी कर पाना मुश्किल हो जाता है। कुछ महिलाओं को पीरियड शुरू होने से एक या दो दिन पहले ही पीरियड क्रेम्स होना शुरू हो जाते हैं। इसमें पेट, पीठ और जांघों में काफी दर्द महसूस होता है। कुछ महिलाओं को ऐसे समय में उल्टी और मतली आने की भी शिकायत होती है।
अगर आप पीरियड क्रेम्प्स से परेशान हैं और बहुत ज्यादा दर्द है तो इस दौरान हैवी वर्कआउट न ही करें तो बहुत अच्छा होगा। इससे आपके लिए परेशानी हो सकती है। अपने वर्कआउट से तब तक ब्रेक लें जब तक आप खुद को बेहतर महसूस न करने लगें। इस दौरान अपनी डाइट का भी काफी ख्याल रखने की जरूरत होती है।
प्राणायाम और ध्यान दोनों ही ऐसी प्रक्रियाएं हैं जो शरीर को कष्ट पहुंचाए बिना मन को शांति प्रदान करती हैं। इसलिए अगर आप सहज महसूस करें तो पीरियड के दौरान इन दोनों ही प्रक्रियाओं को कर सकती हैं। इससे आपको मूड स्विंग में भी आराम मिलेगा।