
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : January 19, 2023 9:52 PM IST
How effective is intermittent fasting for children: मोटापा एक ग्लोबल हेल्थ प्रॉब्लम है और इस समस्या से राहत पाने के लिए लोग अलग-अलग तरह के तरीके अपनाते हैं। वेट लॉस डाइट्स भी ऐसा ही तरीका है और लोग अपे वेट लॉस गोल या अपनी समस्या की गम्भीरता के हिसाब से अलग-अलग तरह की डाइट्स फॉलो करते हैं। लो-कैलोरी डाइट से लेकर जीरो कार्ब और लिक्विड डाइट से ही तरीके हैं जिनमें लोग वेट लॉस के लिए अपने खान-पान में बदलाव करते हैं और उसकी मदद से अपा वजन कम करने की कोशिश करते हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग को बीते कुछ वर्षों में वेट लॉस के लिहाज से एक फायदेमंद डाइट के तौर पर पहचान मिली है। इस तरह की डाइट में लोग प्लांट बेस्ड फूड्स जैसे सब्जियों, फलों और सोया मिल्क जैसी चीजों का सेवन करते हैं और दिन में एक या दो बार खाना खाते हैं। ऐसे दावे किए जाते हैं कि इस तरह से डाइट फॉलो करने से तेजी से वजन कम होता है और लोग खुद को फिट बना पाते हैं। वहीं, कई सेलिब्रिटीज ने भी इंटरमिटेंट फास्टिंग की मदद से वजन कम करने के दावे किए हैं। इसीलिए, लोगों द्वारा इस डाइट को अपनाने में भी खास रूचि दिखायी जा रही है।
हालांकि, कुछ लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रभावों और फायदों को लेकर मतभेद भी हैं। जैसे कुछ क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को इंटरमिटेंट फास्टिंग ना करने की सलाह दी जाती है वहीं, बच्चों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का तरीका वेट लॉस के लिहाज से कितना कारगर है इस बारे में भी काफी बातें होती हैं। वहीं अब कुछ एक्सपर्ट्स द्वारा यंगस्टर्स, टीनएजर्स और नौजवनों में वेट लॉस के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग को मददगा बताया जा रहा है। लेकिन, कुछ एक्सपर्ट्स इस बात से सहमत नहीं हैं।
न्यूट्रिशन साइंसेस की प्रोफेसर और रिसर्चर कर्टनी पीटरसन (Courtney Peterson, an associate professor of nutrition sciences at the University of Alabama at Birmingham) लम्बे समय से वयस्कों में इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रभावों के बारे में स्टडी कर रही हैं। उनके अनुसार, किशोर बच्चों और नये वयस्कों में इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक बड़ा नुकसान यह हो सकता है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त ना हो और इससे न्यूट्रिशन डेफिशिएंसी की संभावना भी बड़ सकती है। पीटरसन कहती हैं कि, अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
बता दें कि पोषक तत्वों की कमी या न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी भी दुनियाभर में वेट गेन का एक बड़ा कारण बताया जाता है। वहीं, जिन लोगों को फिलहाल इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से मना किया जाता है उनमें इस तरह के लोग शामिल हैं-
क्योंकि इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से ब्लड शुगर लेवल बहुत तेजी से कम हो सकता है और लम्बे समय तक भूखा रहना या लो ब्लड शुगर लेवल डायबिटीज के मरीजं के लिए घातक साबित हो सकता है। इसीलिए डायबिटीज में इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करनी चाहिए।
प्रेगनेंट महिलाओं को पोषक तत्वों की जरूरत अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है इसीलिए दिन में एक से दो बार खाना खाने से उनकी ये जरूरत पूरी नहीं होती। इसीलिए उन्हें भी इंटरमिटेंट फास्टिंग के नुकसान से बचने के लिए इस तरह की डाइट नहीं करनी चाहिए।