मोटे बच्चों में ज्यादा होता ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा

व्यायाम न करने और आलस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने वाले बच्चों में खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है बॉडी मास इंडेक्स। उनकी सेहत को ठीक रखने के लिए व्यायाम जरूरी है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : June 25, 2019 8:39 AM IST

मोटे बच्‍चे देखने में भले ही सुंदर लगें, पर यह उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। लगातार हो रहे शोध यह बताते हैं कि मोटे बच्चों में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा अन्‍य बच्‍चों की तुलना में ज्‍यादा होता है। मोटापा उन्‍हें घुटनों, हिप और अन्‍य ज्‍वाइंट्स में समस्‍या दे सकता है। शोध यह भी बता रहे हैं कि व्यायाम न करने और आलस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने वाले बच्चों  का बॉडी मास इंडेक्‍स खतरनाक स्‍तर तक बढ़ जाता है।

वर्कआउट के लिए करें प्रेरित

अगर आपके बच्‍चे का वजन ज्‍यादा है तो उसे वर्कआट के लिए प्रेरित करें। वरना बाद में उन्‍हें घुटने और हिप ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा हो सकता है। नए शोध में यह तथ्‍य सामने आया है। ऑस्टियोआर्थराइटिस आर्थराइटिस का ही एक प्रकार है, जो हडि़डयों पर मौजूद टिश्‍यू का लचीलापन कम होते जाने के कारण बढ़ता है।

खतरनाक है बीएमआई का बढ़ना

नतीजे बताते हैं कि बचपन के बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में ध्‍यान देने लायक बढ़ोतरी हो रही है, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस में 1.7 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका असर घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में 0.6 फीसदी और हिप में 0.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, बड़ी उम्र के लोगों में बीएमआई में 2.7 प्रतिशत प्रति की बढ़ोतरी का असर घुटनों के आर्थराइटिस में 1.3 प्रतिशत और हिप में 0.4 प्रतिशत के रूप में देखने में आता है।

क्‍या कहता है शोध

ब्रिटेन के ऑक्‍सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुए शोध में यह चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आए हैं। अध्‍ययन का नेतृत्‍व करने वाले प्रोफेसर प्रीतो-अलहमब्रा ने कहा “हमारे नतीजे बताते हैं कि वयस्क बीएमआई का प्रभाव घुटनों पर अधिक होता है, जबकि बचपन में बीएमआई ज्‍यादा होने से घुटने और हिप दोनों प्रभावित होते हैं। जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस को जोखिम बढ़ जाता है। यह शोध जर्नल एनाल्स ऑफ रूमेटिक डिजीज में प्रकाशित हुआ, जिसमें जीनोम वाइड एसोसिएशन स्टडीज (जीडब्ल्यूएएस) के आंकड़े भी शामिल किए गए।

खतरनाक हैं आंकड़े

इन दोनों के आंकड़ों में क्रमश: 15 और 9 7 विशिष्ट जीन परिवर्तनों की पहचान की गई। चाइल्‍डहुड बीएमआई और एडल्‍ट बीएमआई के अध्‍यनन को एसएनपी (सिंगल न्यूक्लियोटाइड पॉलिमॉर्फिज्म) कहा जाता है। टीम ने 3,37,000 व्यक्तियों के एक अलग जीडब्ल्यूएएस का इस्तेमाल किया। चाइल्‍डहुड ऑबेसिटी में 13/15 एसएनपी और एडल्‍टहुड ऑबेसिटी में 68/97 एसएनपी की पहचान हुई। इसके बाद उन्‍होंने अपने अध्‍ययन और विभिन्‍न अस्‍पतालों में आने वाले घुटने, हाथ और हिप ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों के आंकड़ों का तुल्‍नात्‍मक अध्‍ययन किया।

क्‍यों खतरनाक है बच्‍चों का मोटापा 

अध्ययन, एम्स्टर्डम में रूमेटोलॉजी (युलर 2018) की वार्षिक यूरोपीय कांग्रेस में भी प्रस्तुत किया गया। हाथ में ऑस्टियोआर्थराइटिस के विकास में  बचपन और वयस्क मोटापे के बीच कोई संबंध नहीं था। स्विट्जरलैंड के एक गैरसरकारी संगठन यूरोपियन लीग अगेन्स्ट रूमेटिज़्म (ईयूएलएआर) के अध्यक्ष जोहान्स डब्ल्यू बिज्ल्स्मा ने भी कहा, “बचपन और वयस्‍क दोनों में मोटापा एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। मोटापे के कारण होने वाली इस समस्‍या और विकलांगता को रोकने के लिए इस अध्‍ययन पर गौर किया जाना चाहिए।”

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