आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाने के लिए रोज सुबह करें ये आसन, तेजी से दुरुस्त होगा आपका पाचन तंत्र

पुषाण मुद्रा को नियमित रूप से करने पर आपको पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिलती है। जानिए कौन सी हैं ये समस्याएं और इस मुद्रा को कैसे करें।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : December 8, 2021 2:22 PM IST

भारत में बीते कुछ वर्षों से योग, आयुर्वेद और देसी उपचारों का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। इन उपचार पद्धति से लोगों को काफी फायदा मिला है, जिस कारण से लोगों के बीच इनकी लोकप्रियता भी बढ़ी है। ठीक इसी तरह मुद्रा भी एक प्रकार की उपचार पद्धति है, जो हमारे शरीर में छिपे कई रोगों का उपचार कर सकती है। मुद्रा, हाथों और उंगलियों से की जाने वाली एक विशेष प्रकार की पोजिशन है, हमारे स्वास्थ्य को कई प्रकार से लाभ पहुंचा सकती है। मुद्रा से हमारे शरीर में ऊर्जा का संचार बहुत तेजी से होता है, जिससे आपका पाचन भी बेहतर होता है। कुल-मिलाकर कहा जाए तो मुद्रा के जरिए आपको अपने शरीर में ऊर्जा को संतुलित करने में मदद मिलती है। आइए जानते हैं कौन सी मुद्रा आपको पहुंचाती है सबसे ज्यादा फायदा ।

क्या है पुषाण मुद्रा (Pushan Mudra)

आमतौर पर पुषाण मुद्रा को पाचन और जीवन में होने वाले बदलावों से राहत पाने के लिए जोड़कर देखा जाता है। विवाह, बच्चे का जन्म और एक जगह से दूसरी जगह पर जाने से जुड़े तनाव को कम करने में ये मुद्रा आपकी मदद कर सकती है। जिंदगी में आए बदलाव अक्सर चिंता पैदा कर सकते हैं, जिससे राहत पाने के लिए आप इस मुद्रा को यूज में ला सकते हैं। इतना ही नहीं इस मुद्रा से पाचन की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है और यह पाचन तंत्र को हेल्दी बनाए रखने में भी मदद करती है।

पुषाण मुद्रा के फायदे

इस बात को ध्यान में रखना बहुत ही जरूरी है कि ये मुद्रा किसी भी प्रकार से उपचार के किसी भी तरीके की जगह नहीं ले सकती है। हां, ये मुद्रा आपको पेट फूलने, मतली और ज्यादा खाना खाने के बाद होने वाली परेशानी को खत्म करने में जरूर मदद कर सकती है। इन सबके अलावा ये मुद्रा चिंता और तनाव को कम कर आपको होने वाले मानसिक और भावनात्मक तनाव को भी दूर करने में मदद कर सकती है।

दूसरी सभी मुद्राओं के ठीक विपरीत पुषान मुद्रा में आपको अपने दोनों हाथ से ही मुद्रा को अंजाम देना होता है। इस मुद्रा में आपकी एक उंगली नाक के एक छेद पर रखकर सांस लेनी होती है तो दूसरे छेद से सांस को बाहर निकालना होता है।

1-इस मुद्रा को करने के लिए पहले अपने सीधे हाथ का प्रयोग करें।

2-तर्जनी और बीच की उंगलियों को अपने अंगूठे के आगे वाले भाग पर दबाएं।

3-अनामिका और छोटी अंगुलियों को फैलाकर रखें।

4- इस मुद्रा को करते वक्त हथेली ऊपर की ओर होनी चाहिए।

5- इस मुद्रा को करने से भारी भोजन के बाद आने वाली डकार और एसिडिटी को रोकने में मदद मिलती है।

पुषाण मुद्रा की दूसरी स्टेज

पहली मुद्रा में आपको जहां डकार और एसिडिटी को रोकने में मदद मिलती है तो वही दूसरी स्थिति पेट फूलने, गैस और कब्ज से राहत दिलाने में मददगार है। इस मुद्रा को करने के लिए आपको ये करना हैः

1-अपनी रिंग फिंगर और छोटी उंगली को अंगूठे से दबाएं।

2-तर्जनी और बीच की उंगली को हथेली के साथ ऊपर की ओर फैला हुआ छोड़ दें।

3- फिर नाक के एक छेद से सांस बाहर निकालें और एक से लें।

4- ऐसा करने से आपको ऊपर लिखी समस्याओं से राहत मिलती है।

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