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Written By: Atul Modi | Published : June 9, 2023 2:53 PM IST
आजकल की लाइफस्टाइल के चलते आपको अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल रखना होता है। ऐसे में लोग अच्छे लाइफस्टाइल को मेंटेन करने के लिए अच्छा खानपान और एक्सरसाइज की मदद लेते हैं। आपको शायद पता है कि मौसम के साथ आपको अपना आहार बदलना चाहिए लेकिन क्या आपको पता है कि आयुर्वेद के अनुसार प्राणायाम को भी साल में तीन बार बदलना चाहिए। प्रत्येक मौसम या दोषों (वात, पित्त और कफ) के लिए, अलग-अलग प्राणायाम को चुनना चाहिए, जो उस मौसम के विपरीत गुण रखता हो जिससे संतुलन और सामंजस्य बना रहे और आपका लाइफस्टाइल मेंटेन रहे। यहां हम आपको बताएंगे कि हर दोषों के लिए अलग प्राणायाम को कैसे करना है,आइए जानते हैं इनके बारे में...
वात को संतुलित बनाने के लिए महान तकनीकों में से एक नथुने की सांस है जिसे नाड़ी शोधन के रूप में जाना जाता है। नाड़ी शोधन से आपको मानसिक शांति मिलती है और शारीरिक तनाव दूर होता है। यह साल के इस समय के दौरान नियमित रूप से किया जा सकता है या जब आप चिंतित, तनावग्रस्त या थका हुआ महसूस कर रहे हैं तब भी आप नाड़ी शोधन को अपना सकते हैं।
इसे करने के लिए सबसे पहले आप एक आरामदायक आसन पर सीधे होकर बैठे। अगर आप गर्माहट महसूस कर रहे हैं तो मेडिटेशन शॉल का उपयोग कर सकते हैं। अपनी आंखें बंद कर ले। अब दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को धीरे से बंद करें। बाएं नथुने से धीरे-धीरे सांस अंदर ले। इसके बाद बाएं नासिका को अनामिका उंगली से बंद करें। अब अंगूठे को ऊपर उठाएं और दाएं नथुने से सांस छोड़ें। दायिनी नासिका से वापस ऊपर की ओर सांस लें, अब बाएं से सांस छोड़ें। अब इस प्रक्रिया को एक लय में जारी रखें और लगभग 5 या 10 मिनट करें।
शीतली प्राणायाम अतिरिक्त पित्त को ठंडा और शांत करता है। इसे आप गर्मी के मौसम में या जब कभी भी आप क्रोधित, निराश और चिड़चिड़े महसूस कर रहे हैं तो कर सकते हैं।
सीधे होकर एक आरामदायक आसन पर बैठे। अपने हाथों को अपनी गोद में रखें। आपकी हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए। अपनी आंखें बंद रखें और अब आप मुड़ी हुई जीभ से ताजगी भरी सांस अंदर ले। होठों को बंद करें। अपनी जीभ को अपने मुंह के ऊपरी हिस्से पर हल्के से स्पर्श करें। नाक से सांस छोड़ें। मुड़ी हुई जीभ के माध्यम से सांस लेना, नाक के माध्यम से सांस छोड़ना, इसे दोहराएं। अब इसे एक लय में जारी रखें और 1 या 2 मिनट तक इसे करें जब तक कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से तरोताजा महसूस न करें।
नाड़ियों के माध्यम से प्राण के अच्छे प्रवाह को बढ़ाने में मदद करती है। यह फेफड़ों में अतिरिक्त जमाव को दूर और दिमाग को तेज करता है। इसे आप वसंत ऋतु के दौरान या जब आप सुस्त या प्रेरणाहीन महसूस करते हैं तो भी आप इसे कर सकते हैं। यह प्राणायाम खाली पेट करना चाहिए और गर्भावस्था या ह्रदय समस्या के दौरान इसे ना करें।
सबसे पहले सीधे होकर बैठे और हाथों को अपनी गोद में रखें और आंखें बंद करें। नाक से गहरी सांस लें, पसलियों को खोलें। पूरी तरह से सांस छोड़े। सांस लेने की तकनीक को जारी रखें। सांस लेने और सांस छोड़ने पर समान ध्यान दें। लगभग 15-20 सेकंड के लिए जारी रखें और फिर प्राकृतिक सांस पर लौटें।