Exercising in Old Age: 80 वर्ष की उम्र में मिलिंद सोमन की मदर कर रही हैं बहू अंकिता कोंवर संग वर्कआउट, जानें सीनियर सिटीज़न्स के लिए एक्सरसाइज़ करने के लिए 3 हेल्दी फायदे

एक्सरसाइज सभी के लिए फायदेमंद होती है। उम्र बढ़ने के साथ खुद को फिट रखने के लिए एक्सरसाइज की मदद ले सकते हैं। मिलिंद सोमन की मां उषा सोमन इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं। जिन्होंने 80 साल की उम्र में बच्चों-सी फूर्ति दिखाते हुए जम्पिंग एक्सरसाइज़ की।

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : April 5, 2020 1:41 PM IST

Exercising in Old Age: फिटनेस ऑइकॉन और सुपरमॉडेल मिलिंद सोमन (Milind Soman) की 80 वर्षीय मां उषा सोमन (Usha Soman) भी अपनी फिटनेस एक्टिविटीज़ के लिए अक्सर ख़बरों में रहती हैं। इन दिनों उषा सोमन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर  वायरल हो रहा है। जिसमें, वह मिलिंद की सुपरमॉडल-अभिनेत्री और खेल प्रेमी पत्नी अंकिता कंवर के साथ वर्कआउट कर रही हैं। इस वीडियो को मिलिंद सोमन और अंकिता ने अपने-अपने इंस्टाग्राम पेज पर भी शेयर किया है। जिसमें, 28 साल की अंकिता और 80 वर्ष की उषा एक साथ वर्कआउट करती नज़र आ रही हैं।

80 वर्ष की उम्र में उषा सोमण ने की जम्पिंग एक्सरसाइज

वीडियो में, अंकिता को अपनी सास के साथ एक पैर पर कूदते हुए देखा जा सकता है, उनकी सास साड़ी में वर्कआउट कर रही हैं।

अंकिता ने वीडियो को कैप्शन दिया, "सभी अपने जीवन में बहुत मजा करें और हंसें। जिंदगी आनंद लेने के लिए है, न कि केवल सहने के लिए - यदि मैं 80 वर्ष की आयु तक जीवित रही, तो मेरी एकमात्र इच्छा है कि मैं आप जैसी फिट रहूं। आप कई लोगों को प्रेरणा दें।"

गौरतलब है कि उषा सोमन के वर्कआउट वीडियोज़ में वह हमेशा साड़ी में ही नज़र आती हैं। इससे पहले उषा को साड़ी में मैराथॉन दौड़ने और पुशअप्स एक्सरसाइज़ भी बड़ी आसानी से करते देखा जा चुका है। उषा सोमन की  फुर्ती और फिटनेस देखकर यह कहा जा सकता है कि फिटनेस या वर्कआउट के लिए कोई उम्र आड़े नहीं आनी चाहिए। एक्सपर्ट्स भी  बड़ी उम्र में भी एक्सरसाइज़ करने को एक अच्छा आइडिया बताते हैं।

क्या  हैं बुढ़ापे में एक्सरसाइज़ करने के फायदे (benefits of Exercising in Old Age)-

बीमारियां रहती हैं दूर

एक्सरसाइज़ करने से ओवरऑल इम्यून सिस्टम के कार्य में सुधार होता है। जैसा  कि उम्र बढ़ने की वजह से बुज़ुर्गों में इम्यूनिटी कम होने लगती है।  नियमित वर्कआउट से आम मौसमी बीमारियां, जैसे सर्दी-ज़ुकाम, बुखार के अलावा डायबिटीज़ और हार्ट डिज़िजेज़ जैसी लाइफस्टाइल रिलेटेड बीमारियां भी कम होती हैं।

मेंटल हेल्थ में होता है सुधार

एक्सरसाइज़ करने से मेंटल हेल्थ भी अच्छी रहती है। क्योंकि, कसरत करनें से एंडोर्फिन्स हार्मोन्स का निर्माण होता है, जिन्हें फील गुड हार्मोन्स कहा जाता है। एंडोर्फिन्स (endorphins) तनाव कम करते हैं, खुशहाल और संतुष्ट महसूस कराते हैं। यही नहीं वर्कआउट करने से नींद भी अच्छी है। जो कि, उम्र बढ़ने के साथ लोगों में एक बहुत ही कॉमन समस्या बन जाती है।

डिप्रेशन से बचना होता है आसान

बुढ़ापे में अच्छी सोशल लाइफ, अकेलेपन और डिप्रेशन से बचाने में मदद करती है। जब बुज़ुर्ग या अधिक उम्र के लोग वर्कआउट करने के लिए दूसरे लोगों के साथ जाते हैं या ग्रुप वॉकिंग या फिटनेस क्लब आदि में हिस्सा लेते हैं तो उनके लिए यह बहुत फायदेमंद साबित होता है। इस तरह, लोगों से मेल जोल और बॉन्डिंग बढ़ती है जो, उन्हें जीने के लिए प्रेरित करती है। (Exercising in Old Age in hindi)

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