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Written By: Yogita Yadav | Published : January 14, 2019 11:14 AM IST
Image credits by: सूर्य नमस्कार करने से आंखो की रोशनी बढती है, खून का प्रवाह तेज होता है, ब्लड प्रेशर में आरामदायक होता है, वजन कम होता है। सूर्य नमस्कार करने से कई रोगों से छुटकारा मिलता है। ©Shutterstock
मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनायी जाती है। यूं तो हर माह संक्रांति आती हैं, परंतु पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। भारत वर्ष में जगह-जगह लोग इस दिन नदी में स्नान कर सूर्यापसना करते हैं। सूर्य उपासना एवं सूर्य नमस्कार दोनों ही सेहत के लिए लाभदायक माने गए हैं। आइए हम आपको बताते हैं सूर्य नमस्कार के लाभ और उसकी विधि।
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सूर्य नमस्कार के लाभ
सूर्य नमस्कार में सभी आसनों का सार और लाभ छिपे होते हैं। सूर्य नमस्कार से विटामिन-डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं। सूर्य नमस्कार की क्रिया को कम से 12 बार करना चाहिए। योगासनो में सबसे असरकारी और लाभदायक सूर्यनमस्कार है। इसमें सभी आसनों का सार छिपा है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास 12 स्थितियों में होता है। इसके आसनों को बहुत ही आसानी से किया जा सकता है। सूर्य मुद्रा हमारे शरीर के अग्नि तत्वों को संचालित करती है। सूर्य की उंगली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य नमस्कार करने से आंखो की रोशनी बढती है, खून का प्रवाह तेज होता है, ब्लड प्रेशर में आरामदायक होता है, वजन कम होता है। सूर्य नमस्कार करने से कई रोगों से छुटकारा मिलता है।
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सूर्य नमस्कार की 12 विधियां हैं
1- सावधान की मुद्रा में खडे होकर दोनों हाथों को कंधे के बराबर में उठाते हुए ऊपर की ओर ले जाइए। हाथों के अगले भाग को एक-दूसरे से चिपका लीजिए फिर हाथों को उसी स्थिति में सामने की ओर लाकर नीचे की ओर गोल घूमते हुए नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाइए। यह भी पढ़ें - ये हैं मकर संक्रांति के खास व्यंजन, आप कौन सा करेंगे ट्राय
2- सांस लेते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर खींचिए तथा कमर से पीछे की ओर झुकते हुए भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाइए, यह अर्धचक्रासन की स्थिति मानी गई है।
सूर्य उपासना एवं सूर्य नमस्का र दोनों ही सेहत के लिए लाभदायक माने गए हैं। ©Shutterstock
3- सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकिए। हाथ को गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर घुटने को सीधे रखते हुए पैरों के दाएँ-बाएँ जमीन को छुएं। कुछ समय तक इसी स्थिति में रुकिए। इस स्थिति को पाद पश्चिमोत्तनासन या पादहस्तासन की कहते हैं। यह भी पढ़ें - सर्दियों में सेब से बनाएं ये हेल्दी हलवा
4- इसी स्थिति में हाथों को जमीन पर टिकाकर सांस लेते हुए दाहिने पैर को पीछे की तरफ ले जाइए। उसके बाद सीने को आगे खीचते हुए गर्दन को ऊपर उठाएं। इस मुद्रा में पैर का पंजा खड़ा हुआ रहना चाहिए।
5- सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए हुए बाएँ पैर को भी पीछे की तरफ ले जाइए। अब दोनों पैरों की एड़ियां आपस में मिली हों। शरीर को पीछे की ओर खिंचाव दीजिए और एड़ियों को जमीन पर मिलाकर गर्दन को झुकाइए।
6- सांस लेते हुए शरीर को जमीन के बराबर में साष्टांग दंडवत करें और घुटने, सीने और ठोड़ी को जमीन पर लगा दीजिए। जांघों को थोड़ा ऊपर उठाते हुए सांस को छोडें।
7- इस स्थिति में धीरे-धीरे सांस को भरते हुए सीने को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधा कीजिए। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएँ। घुटने जमीन को छू रहें हो तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। इसे भुजंगासन भी कहते हैं।
8- पांचवी स्थिति जैसी मुद्रा बनाएं उसके बाद इसमें ठोड़ी को कंठ से टिकाते हुए पैरों के पंजों को देखते हैं। यह भी पढ़ें- जनवरी में की डायटिंग तो और बढ़ जाएगा वजन : शोध
9- इस स्थिति में चौथी स्थिति के जैसी मुद्रा बनाएं उसके बाद बाएं पैर को पीछे ले जाएं, दाहिने पैर को आगे ले आएं।
10- तीसरी स्थिति जैसी मुद्रा बनाएं उसके बाद बाएं पैर को भी आगे लाते हुए पश्चिमोत्तनासन की स्थिति में आ जाएं।
11- दूसरी मुद्रा में रहते हुए सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाएं। उसी स्थिति में हाथों को पीछे की ओर ले जाएं साथ ही गर्दन तथा कमर को भी पीछे की ओर झुकाएं।
12- यह स्थिति पहली मु्द्रा की तरह है अर्थात नमस्कार की मुद्रा।
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