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Written By: Yogita Yadav | Updated : April 4, 2019 8:53 AM IST
प्राणायाम शरीर से विषाक्त पदार्थों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। यह किडनी और लीवर के कामकाज में सुधार करता है। इसके अलावा यह ब्लड सर्कुलेशन और पाचन को बढ़ाता है। © Shutterstock
अगर आप इतने व्यस्त हैं कि अपने लिए भी समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो यह शरीर जल्दी ही आपसे नाराज होने वाला है। भारतीय परंपराओं में तन के साथ-साथ मन का स्वस्थ होना भी जरूरी है। इन दोनों की राह आसान करता है प्राणायाम। तभी तो देश में ही नहीं विदेशों में भी लोग योगासन और प्राणायाम की जरूरत महसूस कर रहे हैं। जानिए हम सभी के लिए आखिर क्यों जरूरी है प्राणायाम का अभ्यास।
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क्या है कपालभाती प्राणायाम
कपाल का मतलब माथा और भाती का अर्थ चमक होता है, और’ प्राणायाम का मतलब सांस लेने की तकनीक है। कपलभाती प्राणायाम एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है फोरहेड शाइनिंग ब्रीथिंग तकनीक।
प्राणायाम करने की विधि
कपालभाती प्राणायाम करने के लिए आप सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर सांसों को बाहर छोड़ने की क्रिया करें। सांसों को बाहर छोड़ने या फेंकते समय पेट को अंदर की ओर धक्का देना है।
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ध्यान रखें कि श्वास लेना नहीं है क्योंकि इस क्रिया में श्वास अंदर ही अंदर चली जाती है। हालांकि अभ्यास के दौरान अपनी सीमाओं को ध्यान में रखें और तदनुसार प्रक्रिया के माध्यम से इस प्राणायाम करें।
प्राणायाम के अन्य लाभ
प्राणायाम शरीर से विषाक्त पदार्थों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।
यह किडनी और लीवर के कामकाज में सुधार करता है। इसके अलावा यह ब्लड सर्कुलेशन और पाचन को बढ़ाता है।
यह आंखों से तनाव को दूर करता है और डार्क सर्कल मिटा को देता है।
प्राणायाम आपके फेफड़ों को मजबूत करता है और उसकी क्षमता को बढ़ाता है।
कपालभाती का नियमित अभ्यास आपको सक्रिय करेगा और आपके चेहरे पर ग्लो लाएगा।
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यह स्मृति और एकाग्रता शक्ति में सुधार करता है।
यह अवसाद से दूर रखता है और सकारात्मकता उर्जा देता है।
यह आपकी संवेदनशीलता की भावना को संतुलित करता है। यह एसिडिटी और गैस से संबंधित समस्याओं को दूर करता है।
यह प्राणायाम मेटाबोलिक रेट को बढ़ाता है, इस प्रकार यह तेजी से वजन घटाने में सहायता करता है।