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Written By: Editorial Team | Published : October 12, 2017 8:59 AM IST
दिवाली का मौका हो और मिठाई की बात न हो ऐसा कैसे हो सकता है। दिवाली में नाते-रिश्तेदार हाथों में जब तरह-तरह की मिठाईयां लाते हैं तो मन ललचा जाता है। ऊपर से मिठाई पर अगर चांदी का वर्क लगा हो तो उसको देखकर बड़े-बूढ़े से लेकर बच्चों के मुँह में भी पानी आ जाता है। चमचमाता सुंदर रंग वाला मिठाई देखने देखने में तो अच्छा लगता है लेकिन क्या ये सचमुच सेहत के नजरिये से अच्छा होता है? तो फिर इस दिवाली चांदी के वर्क वाला मिठाई खरीदने से पहले डॉ. सौरभ अरोड़ा, फाउन्डर ऑफ फूड सेफ्टी हेल्पलाइन.कॉम और एम.डी. ऑरिगा रिसर्च एंड डायेरेक्टर एट आरब्रो फार्मासुटिकल ने जो जानकारी दी है उसको पहले जान लेते हैं।
चांदी का वर्क क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
सदियों से आयुर्वेद में औषधि के रूप में इसका इस्तेमाल हुआ है और बाद में चांदी के वर्क को पाक-शैली में भी इस्तेमाल किया जाने लगा। इसको मगुलाई और अवधि क्विज़ीन में इस्तेमाल किया गया जैसे शाही टुकड़ा, बिरायनी, कोरमा और कवाब़ और बाद में पान, ड्राई फ्रूट्स, इलायची ता दूसरे फूड्स में। चांदी का वर्क इस्तेमाल करने से-
क्या चांदी के वर्क का कोई साइड इफेक्ट होता है?
आंखो को सुंदर लगने वाली चांदी के वर्क सिर्फ चांदी का नहीं बना होता है इसमें कुछ टॉक्सिक मेटल भी होता है। त्योहार के समय मिठाई में मिलावट आम होता है। फूड रिगुलेटर ने जांच के दौरान ये पाया कि चांदी के वर्क में चांदी के विकल्प के अलावा अल्युमिनियम या खराब क्वालिटी का चांदी भी होता है (यानि 99.9% शुद्ध चांदी नहीं होता) है। इसके अलावा जहां मिठाई बनाई जाती है वहां की गंदगी और ये अशुद्धि दोनों मिलकर सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इससे पेट की बीमारी भी हो सकती है। इसके अलावा इसमें निकेल, लेड, कैडमियम भी पाया जाता है।
द फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBOs) को आज्ञानुसार या नियमानुसार और खुद के निरीक्षण में ही इसके पूरी तरह से ठीक होने की स्वीकृति मिल सकती है।
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अनुवादक: Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: Shutterstock.